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1 एकड़ 48 डिसमिल सरकारी जमीन पर कबजा, विशुनपुरा अंचल कार्यालय के खिलाफ जनआक्रोश फूटा

#विशुनपुरा #गढ़वा #अंचल_भ्रष्टाचार : सरकारी जमीन पर वर्षों से अतिक्रमण, म्यूटेशन और प्रमाण पत्र के नाम पर वसूली से परेशान ग्रामीण सड़क पर उतरे
  • लाल चौक क्षेत्र की 1 एकड़ 48 डिसमिल सरकारी जमीन पर वर्षों से अतिक्रमण का आरोप।
  • प्रखंड प्रमुख दीपा कुमारी के नेतृत्व में सैकड़ों ग्रामीणों का अंचल कार्यालय पर धरना।
  • अतिक्रमण हटाने के 24 घंटे के अल्टीमेटम के बावजूद कोई कार्रवाई नहीं।
  • म्यूटेशन और प्रमाण पत्र के नाम पर रिश्वत व बिचौलियों की मनमानी का आरोप।
  • सर्वजीत मेहता ने सुनाई पीड़ा—रिश्वत के कारण बेटे की पढ़ाई छूटी
  • एसडीओ वंशीधर नगर को सौंपा गया आठ सूत्री मांग पत्र, आंदोलन तेज करने की चेतावनी।

विशुनपुरा अंचल कार्यालय में व्याप्त भ्रष्टाचार, लापरवाही और मनमानी के खिलाफ गुरुवार को जनाक्रोश सड़कों पर उतर आया। प्रखंड प्रमुख दीपा कुमारी के नेतृत्व में सैकड़ों ग्रामीणों ने अंचल कार्यालय परिसर में धरना–प्रदर्शन कर प्रशासन के खिलाफ खुला मोर्चा खोल दिया। ग्रामीणों का कहना था कि यह आंदोलन किसी राजनीतिक दल का नहीं, बल्कि गरीब, किसान, मजदूर और विद्यार्थियों के हक की लड़ाई है।

अंचल कार्यालय बना आक्रोश का केंद्र

धरना–प्रदर्शन के दौरान अंचल कार्यालय परिसर नारेबाजी से गूंज उठा। ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि जमीन म्यूटेशन, जाति, आय, निवास प्रमाण पत्र और अतिक्रमण जैसे मामलों में बिना पैसे के कोई काम नहीं होता। बिचौलियों के जरिए खुलेआम वसूली की जाती है और आम लोगों को बार-बार कार्यालय के चक्कर काटने पड़ते हैं।

ग्रामीणों ने कहा कि महीनों तक फाइलें लंबित रखी जाती हैं और जब लोग सवाल पूछते हैं तो उन्हें अपमानित किया जाता है। इससे आम जनता में भारी आक्रोश है।

सरकारी जमीन पर कब्जा, प्रशासन मौन

धरना को संबोधित करते हुए प्रखंड प्रमुख दीपा कुमारी ने गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि लाल चौक क्षेत्र की लगभग 1 एकड़ 48 डिसमिल सरकारी जमीन पर वर्षों से अतिक्रमण है। अंचल प्रशासन ने अतिक्रमणकारियों को 24 घंटे में जमीन खाली करने का अल्टीमेटम भी दिया था, लेकिन आज तक न तो अतिक्रमण हटा और न ही कोई ठोस कार्रवाई हुई।

प्रखंड प्रमुख ने कहा कि इससे साफ है कि अतिक्रमणकारियों ने अंचल प्रशासन को ठेंगा दिखा रखा है। इसका सीधा नुकसान गरीब सब्जी विक्रेताओं और छोटे दुकानदारों को उठाना पड़ रहा है, जिन्हें स्थायी दुकान लगाने तक की जगह नहीं मिल पा रही।

सर्वजीत मेहता की पीड़ा ने रुलाया

धरना स्थल पर उस समय माहौल भावुक हो गया जब ग्रामीण सर्वजीत मेहता ने अपनी आपबीती सुनाई। उन्होंने बताया कि म्यूटेशन के नाम पर रिश्वत देने के कारण उनकी आर्थिक हालत इतनी खराब हो गई कि उनके इकलौते पुत्र चंदन कुमार को पढ़ाई बीच में ही छोड़नी पड़ी।

सब्जी बेचकर परिवार चलाने वाले सर्वजीत की कहानी सुनकर कई ग्रामीणों की आंखें नम हो गईं। लोगों ने कहा कि यही अंचल कार्यालय की हकीकत है, जहां गरीब की मजबूरी को कमाई का जरिया बना लिया गया है।

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प्रमाण पत्रों में देरी से छात्रों का भविष्य खतरे में

उपप्रमुख प्रतिनिधि अजय पाल ने आरोप लगाया कि अंचल कार्यालय में पैसे के बिना कोई फाइल आगे नहीं बढ़ती। पैसा देने के बाद भी लोगों को घंटों बैठाकर मानसिक रूप से प्रताड़ित किया जाता है।

वहीं प्रखंड प्रमुख प्रतिनिधि चंदन मेहता ने कहा कि जाति, आय, निवास, जन्म–मृत्यु प्रमाण पत्र महीनों से लंबित पड़े हैं। समय पर प्रमाण पत्र नहीं मिलने से हजारों छात्र छात्रवृत्ति, नामांकन और प्रतियोगी परीक्षाओं से वंचित हो रहे हैं। गरीब परिवार सरकारी योजनाओं का लाभ नहीं ले पा रहे, जिससे उनका भविष्य अंधकार में जा रहा है।

बिचौलियों का बोलबाला, अफसरों के आदेश बेअसर

धरना के दौरान यह आरोप भी लगा कि अंचल कार्यालय में वर्षों से जमे कुछ कर्मी बिचौलियों के संरक्षण में अवैध वसूली कर रहे हैं। वरीय अधिकारियों के आदेशों की भी खुलेआम अवहेलना की जा रही है, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई।

ग्रामीणों ने कहा कि यदि जल्द सुधार नहीं हुआ तो वे बड़े आंदोलन के लिए मजबूर होंगे।

आठ सूत्री मांग पत्र सौंपा, आंदोलन तेज करने की चेतावनी

धरना–प्रदर्शन के अंत में प्रखंड प्रमुख दीपा कुमारी के नेतृत्व में अनुमंडल पदाधिकारी, वंशीधर नगर के नाम आठ सूत्री मांग पत्र सौंपा गया। प्रमुख ने चेतावनी दी कि यदि अंचल कार्यालय में व्याप्त भ्रष्टाचार पर शीघ्र कार्रवाई नहीं हुई तो यह आंदोलन जिला स्तर तक फैलाया जाएगा।

धरना–प्रदर्शन के दौरान विशुनपुरा पुलिस प्रशासन स्थिति पर नजर बनाए हुए था और मौके पर मुस्तैद रहा।

न्यूज़ देखो: जब जनता सड़क पर उतरती है

विशुनपुरा अंचल कार्यालय के खिलाफ यह धरना केवल एक कार्यालय का विरोध नहीं, बल्कि सिस्टम में फैले भ्रष्टाचार के खिलाफ आम जनता की आवाज है। सरकारी जमीन पर कब्जा और प्रमाण पत्र में देरी जैसे मुद्दे प्रशासनिक संवेदनशीलता की परीक्षा हैं। हर खबर पर रहेगी हमारी नजर।

अब चुप नहीं, अधिकार चाहिए

अगर सिस्टम जनता की नहीं सुनेगा तो जनता को सड़कों पर आना पड़ेगा।
विशुनपुरा का यह आंदोलन पूरे जिले के लिए चेतावनी है।
आप क्या सोचते हैं—क्या दोषियों पर कार्रवाई होगी?
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Rajkumar Singh (Raju)

विशुनपुरा, गढ़वा

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