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सिमडेगा को बाल विवाह मुक्त बनाने की दिशा में 100 दिवसीय जागरूकता रथ अभियान का शुभारंभ

#सिमडेगा #बालविवाहमुक्ति : ठेठईटांगर से ग्रामीण इलाकों तक जागरूकता रथ को हरी झंडी।

सिमडेगा जिले में बाल विवाह जैसी सामाजिक कुरीति के उन्मूलन के लिए 100 दिवसीय जागरूकता रथ अभियान की शुरुआत की गई। ठेठईटांगर प्रखंड से इस अभियान का शुभारंभ छोटानागपुर कल्याण निकेतन और जस्ट राइट्स फॉर चिल्ड्रेन्स के संयुक्त तत्वावधान में हुआ। जनप्रतिनिधियों की उपस्थिति में जागरूकता रथ को हरी झंडी दिखाकर ग्रामीण क्षेत्रों के लिए रवाना किया गया। यह पहल बाल अधिकारों की रक्षा और जिले को बाल विवाह मुक्त बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।

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  • 100 दिवसीय बाल विवाह मुक्ति जागरूकता रथ अभियान की शुरुआत।
  • छोटानागपुर कल्याण निकेतन और जस्ट राइट्स फॉर चिल्ड्रेन्स का संयुक्त आयोजन।
  • ठेठईटांगर प्रखंड प्रमुख बिपिन पंकज मिंज ने दिखाई हरी झंडी।
  • पंचायत मुखिया संगीता मिंज और विधायक प्रतिनिधि मोहोम्माद कारू रहे मौजूद।
  • ग्रामीण समुदायों में बाल विवाह के दुष्परिणामों पर जागरूकता फैलाने का लक्ष्य।
  • सिमडेगा को बाल विवाह मुक्त जिला बनाने का संकल्प।

सिमडेगा जिले में बाल अधिकारों की रक्षा और सामाजिक सुधार की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल के तहत 100 दिवसीय बाल विवाह मुक्ति जागरूकता रथ अभियान की औपचारिक शुरुआत की गई। इस अभियान का उद्देश्य ग्रामीण इलाकों तक सीधी पहुंच बनाकर बाल विवाह जैसी गहरी जड़ें जमा चुकी सामाजिक बुराई के प्रति जनचेतना फैलाना है। ठेठईटांगर प्रखंड से रवाना हुआ यह जागरूकता रथ जिले के विभिन्न गांवों में जाकर लोगों को बाल विवाह के कानूनी, सामाजिक और शैक्षणिक दुष्परिणामों की जानकारी देगा। कार्यक्रम में जनप्रतिनिधियों, सामाजिक कार्यकर्ताओं और संस्था के पदाधिकारियों की सक्रिय भागीदारी देखने को मिली।

जागरूकता रथ अभियान का शुभारंभ

ठेठईटांगर प्रखंड में आयोजित कार्यक्रम के दौरान प्रखंड प्रमुख बिपिन पंकज मिंज, पंचायत मुखिया श्रीमती संगीता मिंज एवं विधायक प्रतिनिधि मोहोम्माद कारू ने संयुक्त रूप से जागरूकता रथ को हरी झंडी दिखाकर अभियान का शुभारंभ किया। इस अवसर पर छोटानागपुर कल्याण निकेतन के सभी कार्यकर्ता एवं अधिकारी उपस्थित रहे, जिन्होंने अभियान को सफल बनाने का संकल्प लिया।

जागरूकता रथ को इस प्रकार डिजाइन किया गया है कि यह गांव-गांव जाकर लोगों को बाल विवाह से जुड़े कानून, बच्चों के अधिकार और शिक्षा के महत्व की जानकारी सरल भाषा में दे सके। रथ के माध्यम से ग्रामीणों को यह बताया जाएगा कि बाल विवाह न केवल कानूनन अपराध है, बल्कि इससे बच्चों के स्वास्थ्य, शिक्षा और भविष्य पर गंभीर नकारात्मक प्रभाव पड़ता है।

अतिथियों के विचार और संदेश

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए उपस्थित अतिथियों ने बाल विवाह उन्मूलन के लिए सामूहिक प्रयासों की आवश्यकता पर जोर दिया। प्रखंड प्रमुख बिपिन पंकज मिंज ने कहा:

“यह जागरूकता रथ ग्रामीण समुदायों में बाल विवाह के दुष्परिणामों को लेकर चेतना फैलाने का सशक्त माध्यम बनेगा। जब लोग इसके नुकसान समझेंगे, तभी इस कुप्रथा के खिलाफ आगे आएंगे।”

वहीं पंचायत मुखिया श्रीमती संगीता मिंज ने समाज की भूमिका पर प्रकाश डालते हुए कहा:

“बाल विवाह का उन्मूलन केवल सरकारी या गैर सरकारी संस्थाओं की जिम्मेदारी नहीं है। इसके लिए हर नागरिक को अपनी जिम्मेदारी समझनी होगी और आवाज उठानी होगी।”

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विधायक प्रतिनिधि मोहोम्माद कारू ने भी इस पहल को समय की आवश्यकता बताते हुए ग्रामीण स्तर पर सतत संवाद को जरूरी बताया। उन्होंने कहा कि जब समाज स्वयं आगे आकर इस बुराई के खिलाफ खड़ा होगा, तभी इसका स्थायी समाधान संभव हो सकेगा।

अभियान का उद्देश्य और कार्ययोजना

100 दिवसीय इस जागरूकता रथ अभियान का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि सिमडेगा जिले का प्रत्येक बच्चा सुरक्षित, संरक्षित और शिक्षित वातावरण में बड़ा हो सके। अभियान के दौरान रथ विभिन्न पंचायतों और गांवों में जाकर स्थानीय लोगों, अभिभावकों, किशोर-किशोरियों और जनप्रतिनिधियों से संवाद करेगा।

इस पहल के जरिए यह संदेश दिया जा रहा है कि बाल विवाह बच्चों के सपनों और संभावनाओं को सीमित कर देता है। शिक्षा, स्वास्थ्य और आत्मनिर्भरता के रास्ते पर आगे बढ़ने के लिए बाल विवाह पर पूर्ण प्रतिबंध और सामाजिक सहयोग अनिवार्य है। छोटानागपुर कल्याण निकेतन लंबे समय से बच्चों के अधिकारों और सामाजिक न्याय के क्षेत्र में सक्रिय है और इस अभियान को उसी निरंतरता का हिस्सा बताया गया।

ग्रामीण समुदायों की भूमिका

अभियान के दौरान विशेष रूप से ग्रामीण समुदायों को केंद्र में रखा गया है, क्योंकि बाल विवाह की घटनाएं प्रायः ग्रामीण और दूरस्थ इलाकों में अधिक देखने को मिलती हैं। जागरूकता रथ के माध्यम से ग्रामीणों को यह समझाने का प्रयास किया जाएगा कि कानून के साथ-साथ सामाजिक सोच में बदलाव कितना आवश्यक है। जब माता-पिता, पंचायत प्रतिनिधि और समुदाय के वरिष्ठ सदस्य मिलकर बाल विवाह के खिलाफ खड़े होंगे, तभी वास्तविक परिवर्तन संभव होगा।

न्यूज़ देखो: बाल अधिकारों की रक्षा की दिशा में मजबूत पहल

यह अभियान दर्शाता है कि सिमडेगा जिले में बाल विवाह के खिलाफ संगठित और दीर्घकालिक प्रयास शुरू हो चुके हैं। जनप्रतिनिधियों और सामाजिक संगठनों की संयुक्त भागीदारी से यह पहल अधिक प्रभावी बनती दिख रही है। अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि अभियान के दौरान मिले संदेश कितने व्यवहारिक बदलाव ला पाते हैं। प्रशासन और समाज की निरंतर सक्रियता ही सिमडेगा को वास्तव में बाल विवाह मुक्त बना सकती है।
हर खबर पर रहेगी हमारी नजर।

बच्चों का भविष्य सुरक्षित करने की साझा जिम्मेदारी

बाल विवाह के खिलाफ यह जागरूकता अभियान केवल एक कार्यक्रम नहीं, बल्कि समाज को आत्ममंथन का अवसर देता है। जब हम बच्चों को शिक्षा, सुरक्षा और समान अवसर देंगे, तभी वे अपने गांव, जिले और देश का नाम रोशन कर सकेंगे।

आज जरूरत है कि हम सभी इस संदेश को आगे बढ़ाएं और अपने आसपास होने वाली गलत प्रथाओं के खिलाफ आवाज उठाएं। सजग नागरिक बनकर, सकारात्मक सोच के साथ बदलाव की पहल करें।
आपकी राय इस विषय पर क्या है? कमेंट में अपनी बात साझा करें, इस खबर को दूसरों तक पहुंचाएं और बाल विवाह मुक्त समाज के निर्माण में अपनी जिम्मेदारी निभाएं।

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Birendra Tiwari

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