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महुआडांड़ में माता चंद्रघंटा मंदिर की 11वीं वर्षगांठ, तीन दिवसीय यज्ञ पूर्णाहुति के साथ संपन्न

#महुआडांड़ #धार्मिक_आयोजन : कलश यात्रा से शुरू यज्ञ—भंडारा और कन्या पूजन के साथ समापन।

लातेहार के महुआडांड़ प्रखंड के चटकपुर गांव में माता चंद्रघंटा मंदिर की 11वीं वर्षगांठ पर तीन दिवसीय यज्ञ का आयोजन किया गया। 1 से 3 अप्रैल तक चले इस कार्यक्रम में बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल हुए। कलश यात्रा, हवन, भजन-कीर्तन और भंडारे का आयोजन हुआ। अंतिम दिन कन्या पूजन के साथ पूर्णाहुति दी गई।

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  • चटकपुर गांव में तीन दिवसीय यज्ञ का आयोजन।
  • 1 से 3 अप्रैल तक चला धार्मिक कार्यक्रम।
  • रिशेश्वर महाराज के मार्गदर्शन में पूजा संपन्न।
  • कलश यात्रा और भजन-कीर्तन से भक्तिमय माहौल
  • कन्या पूजन के साथ पूर्णाहुति दी गई

लातेहार जिले के महुआडांड़ प्रखंड के चटकपुर गांव में माता चंद्रघंटा मंदिर की स्थापना की 11वीं वर्षगांठ के अवसर पर तीन दिवसीय यज्ञ का भव्य आयोजन किया गया। इस धार्मिक कार्यक्रम में गांव सहित आसपास के क्षेत्रों से बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने भाग लिया और भक्ति भाव के साथ पूजा-अर्चना की।

यह आयोजन 1 अप्रैल से शुरू होकर 3 अप्रैल को पूर्णाहुति के साथ संपन्न हुआ, जिसमें धार्मिक परंपराओं का सुंदर समन्वय देखने को मिला।

कलश यात्रा से हुई शुरुआत

कार्यक्रम की शुरुआत भव्य कलश यात्रा के साथ हुई, जिसमें महिलाओं और युवतियों ने पारंपरिक वेशभूषा में भक्ति गीत गाते हुए गांव का भ्रमण किया।

श्रद्धालुओं ने कहा: “कलश यात्रा से पूरे गांव में भक्ति का वातावरण बन गया।”

वैदिक विधि से पूजा-पाठ

इस आयोजन में गहीरा गुरु आश्रम, श्रीकोट से आए ब्राह्मण रिशेश्वर महाराज के मार्गदर्शन में पूजा-पाठ और हवन का आयोजन किया गया।

तीनों दिनों तक नियमित रूप से हवन, भजन-कीर्तन और धार्मिक अनुष्ठान किए गए।

भंडारा और सामूहिक सहभागिता

कार्यक्रम के दौरान श्रद्धालुओं के लिए भंडारे की भी व्यवस्था की गई थी। इसमें बड़ी संख्या में लोगों ने भाग लिया और प्रसाद ग्रहण किया।

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यह आयोजन केवल धार्मिक ही नहीं, बल्कि सामाजिक एकता का भी प्रतीक बना।

कन्या पूजन के साथ पूर्णाहुति

अंतिम दिन नव कन्याओं का पूजन कर यज्ञ की पूर्णाहुति दी गई। इस दौरान श्रद्धालुओं ने आस्था के साथ पूजा कर अपनी मनोकामनाएं मांगी।

एक श्रद्धालु ने कहा: “कन्या पूजन से आयोजन को विशेष धार्मिक महत्व मिला।”

ग्रामीणों की महत्वपूर्ण भूमिका

इस पूरे आयोजन को सफल बनाने में स्थानीय ग्रामीणों और विशेष रूप से मातृशक्ति की अहम भूमिका रही। सभी ने मिलकर इस कार्यक्रम को सफल बनाया।

क्षेत्र में उत्साह का माहौल

तीन दिनों तक चले इस आयोजन ने पूरे क्षेत्र को भक्तिमय बना दिया। लोगों ने इसे परंपरा और आस्था का संगम बताया।

धार्मिक परंपरा का संरक्षण

यह आयोजन स्थानीय संस्कृति और धार्मिक परंपराओं को जीवित रखने का एक महत्वपूर्ण माध्यम बना।

न्यूज़ देखो: परंपरा से जुड़ता समाज

महुआडांड़ का यह आयोजन दिखाता है कि ग्रामीण समाज आज भी अपनी परंपराओं और आस्था से गहराई से जुड़ा हुआ है। ऐसे आयोजन सामाजिक एकता और सांस्कृतिक पहचान को मजबूत करते हैं। हर खबर पर रहेगी हमारी नजर।

अपनी संस्कृति को सहेजें

धार्मिक आयोजन हमारी पहचान हैं।
जरूरी है कि हम इन्हें आगे बढ़ाएं और अगली पीढ़ी तक पहुंचाएं।
सामूहिक सहभागिता ही समाज को मजबूत बनाती है।
आइए, हम भी अपनी संस्कृति को सहेजने का संकल्प लें।

अपनी राय कमेंट में साझा करें, खबर को शेयर करें और इस सांस्कृतिक आयोजन को आगे बढ़ाएं।

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