12 साल बाद आया बड़ा फैसला: रिश्वतखोरी में डोरंडा कोषागार अधिकारी पवन केडिया दोषी, अब जेल में कटेगी रातें

12 साल बाद आया बड़ा फैसला: रिश्वतखोरी में डोरंडा कोषागार अधिकारी पवन केडिया दोषी, अब जेल में कटेगी रातें

author News देखो Team
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#रांची — रिश्वत मांगने वाले अफसर का अंत, एसीबी कोर्ट ने सुनाया ऐतिहासिक फैसला, तत्काल होटवार जेल भेजा गया:

  • डोरंडा कोषागार के तत्कालीन अधिकारी पवन कुमार केडिया को 12 साल पुराने मामले में दोषी करार
  • 2013 में 30 हजार रुपये रिश्वत लेते रंगे हाथ पकड़ा गया था
  • कोर्ट ने न्यायिक हिरासत में भेजा, 29 मार्च को सजा का ऐलान होगा
  • कुल 9 गवाहों के साक्ष्य के बाद कोर्ट का बड़ा निर्णय
  • भ्रष्टाचार के खिलाफ बड़ी जीत मानी जा रही कार्रवाई

घटना का पूरा विवरण

रांची के डोरंडा कोषागार में 12 साल पुराने रिश्वतखोरी के मामले में आखिरकार बड़ा फैसला आ गया है। पवन कुमार केडिया, जो उस समय कोषागार पदाधिकारी थे, को एसीबी की विशेष अदालत ने दोषी करार दे दिया है। सोमवार को विशेष अदालत के न्यायाधीश योगेश कुमार सिंह ने यह फैसला सुनाया। दोषी ठहराए जाने के बाद पवन केडिया को तुरंत न्यायिक हिरासत में लेकर बिरसा मुंडा केंद्रीय कारा, होटवार भेज दिया गया

जांच और एसीबी की कार्रवाई

27 मई 2013 को विभागीय लिपिक प्रशांत कुमार दास ने शिकायत दर्ज कराई थी कि पवन केडिया ने उनसे 30 हजार रुपये रिश्वत की मांग की थी। निगरानी ब्यूरो ने इस शिकायत को गंभीरता से लिया और एक विशेष टीम गठित कर पवन केडिया को रंगे हाथ रिश्वत लेते गिरफ्तार किया।

साजिश और भ्रष्ट तंत्र का खुलासा

जांच में सामने आया कि यह केवल एक रिश्वतखोरी का मामला नहीं था, बल्कि विभागीय तंत्र में बैठे भ्रष्ट अधिकारियों की मिलीभगत थी। पवन केडिया ने प्रशांत कुमार दास से बिल पास कराने और उसकी जिम्मेदारी बदलवाने के बदले रिश्वत की मांग की थी, जो उनकी साजिश का हिस्सा था।

गिरफ्तारी और कोर्ट की प्रक्रिया

2013 में गिरफ्तारी के बाद पवन केडिया जमानत पर थे। लंबी सुनवाई के दौरान कुल 9 गवाहों के बयान और ठोस साक्ष्यों के आधार पर अदालत ने उन्हें दोषी माना। अब 29 मार्च को उनकी सजा का ऐलान किया जाएगा।

“यह फैसला झारखंड में भ्रष्टाचार के खिलाफ एक कड़ा संदेश है। किसी भी अधिकारी को बख्शा नहीं जाएगा।” — एसीबी प्रवक्ता

अपराधी का पुराना रिकॉर्ड

पवन केडिया पर पहले भी विभागीय कार्यों में लापरवाही और अनियमितता के आरोप लगे थे। यह पहली बार है जब उन्हें कानूनी रूप से दोषी करार दिया गया।

एसीबी और पुलिस की सख्त भूमिका

इस केस में एसीबी और पुलिस टीम ने संयम और धैर्य के साथ अपना काम किया। टीम ने गवाहों को मजबूत तरीके से कोर्ट में पेश किया और तथ्यों के साथ दोषी को सजा दिलवाने में सफलता पाई।

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