
#बरवाडीह #जनवितरण_व्यवस्था : क्लोजिंग बैलेंस के नाम पर राशन कटौती से गरीब परिवारों को नहीं मिला दिसंबर का खाद्यान्न।
लातेहार जिले के बरवाडीह प्रखंड अंतर्गत बगीचा अखरा कोलपुरवा क्षेत्र में सार्वजनिक वितरण प्रणाली की अव्यवस्था सामने आई है। यहां करीब 150 राशन कार्डधारियों को दिसंबर माह का राशन अब तक नहीं मिल सका है। विभागीय प्रणाली में क्लोजिंग बैलेंस के नाम पर राशन कटौती किए जाने से यह स्थिति उत्पन्न हुई है। मामले की पुष्टि के बाद जिला प्रशासन ने जांच शुरू कर दी है, जिससे प्रभावित परिवारों को राहत मिलने की उम्मीद जगी है।
- बरवाडीह प्रखंड के बगीचा अखरा कोलपुरवा क्षेत्र का मामला।
- लगभग 150 राशन कार्डधारी दिसंबर के राशन से वंचित।
- जविप्र डीलर कासिम के खाते से क्लोजिंग बैलेंस में राशन कटौती।
- प्रभारी एमओ राजेश कुमार ने वितरण नहीं होने की पुष्टि की।
- जिला प्रशासन स्तर पर जांच प्रक्रिया शुरू।
बरवाडीह प्रखंड में सार्वजनिक वितरण प्रणाली की खामियों का खामियाजा एक बार फिर गरीब और जरूरतमंद परिवारों को भुगतना पड़ रहा है। प्रखंड अंतर्गत बगीचा अखरा कोलपुरवा क्षेत्र के लगभग 150 राशन कार्डधारियों को दिसंबर माह का खाद्यान्न अब तक उपलब्ध नहीं कराया गया है। ठंड के मौसम में राशन नहीं मिलने से इन परिवारों की दैनिक जरूरतें बुरी तरह प्रभावित हो रही हैं।
दिसंबर माह का राशन नहीं मिलने से मजदूर, बुजुर्ग, महिलाएं और छोटे बच्चे सबसे अधिक प्रभावित हैं। कई परिवारों का कहना है कि सरकारी राशन पर ही उनका अधिकांश जीवन निर्भर है और एक माह का राशन नहीं मिलने से घर का चूल्हा जलाना मुश्किल हो गया है।
क्लोजिंग बैलेंस के नाम पर राशन कटौती
विभागीय जानकारी के अनुसार यह समस्या सार्वजनिक वितरण प्रणाली (जविप्र) के अंतर्गत कार्यरत डीलर कासिम के खाते से जुड़े क्लोजिंग बैलेंस के कारण उत्पन्न हुई है। बताया गया है कि पूर्व माह का कुछ राशन शेष रहने के कारण विभागीय प्रणाली में उसे क्लोजिंग बैलेंस के तहत समायोजित कर दिया गया। इसी प्रक्रिया के चलते दिसंबर माह का नया राशन आवंटित नहीं हो सका।
इस तकनीकी और प्रशासनिक प्रक्रिया का सीधा असर कार्डधारियों पर पड़ा, जिन्हें बिना किसी पूर्व सूचना के दिसंबर माह के राशन से वंचित कर दिया गया। ग्रामीणों का कहना है कि उन्हें यह तक नहीं बताया गया कि राशन क्यों नहीं मिलेगा और समस्या कब तक सुलझेगी।
प्रभारी एमओ ने की पुष्टि
इस पूरे मामले में प्रभारी मार्केटिंग ऑफिसर (एमओ) राजेश कुमार ने दिसंबर माह का राशन वितरण नहीं होने की पुष्टि की है। उन्होंने बताया कि यह मामला विभाग के संज्ञान में है और इसकी जानकारी जिला प्रशासन को भेज दी गई है।
प्रभारी एमओ राजेश कुमार ने कहा: “क्लोजिंग बैलेंस के तहत राशन कटौती का मामला सामने आया है। जिला स्तर पर यह जांच की जा रही है कि किस माह में कितना राशन काटा गया और यह प्रक्रिया किस नियम के तहत की गई।”
उन्होंने यह भी कहा कि जांच पूरी होने के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी और प्रभावित कार्डधारियों को राहत देने का प्रयास किया जाएगा।
कार्डधारियों में नाराजगी
राशन नहीं मिलने से कार्डधारियों में गहरी नाराजगी देखी जा रही है। ग्रामीणों का कहना है कि विभागीय गलती का खामियाजा आम जनता को भुगतना पड़ रहा है। उनका सवाल है कि यदि किसी माह का राशन शेष भी रह गया था, तो उसकी जानकारी पहले क्यों नहीं दी गई और उसका समाधान समय रहते क्यों नहीं किया गया।
कई कार्डधारियों ने बताया कि उन्होंने डीलर और प्रखंड कार्यालय के चक्कर लगाए, लेकिन हर जगह सिर्फ आश्वासन ही मिला। ठंड के मौसम में जब रोजगार के साधन भी सीमित हो जाते हैं, ऐसे समय में राशन की कमी परिवारों पर अतिरिक्त बोझ डाल रही है।
गरीब परिवारों पर सीधा असर
दिसंबर माह में ठंड बढ़ने के कारण भोजन की जरूरत भी अधिक हो जाती है। ऐसे में राशन नहीं मिलने से गरीब परिवारों को बाजार से महंगे दामों पर अनाज खरीदना पड़ रहा है, जो उनके लिए संभव नहीं है। कई परिवारों ने उधार लेकर या पड़ोसियों की मदद से किसी तरह समय गुजारा है।
ग्रामीणों का कहना है कि सरकारी योजनाओं का उद्देश्य गरीबों को राहत देना है, लेकिन ऐसी विभागीय अव्यवस्थाएं योजनाओं की मंशा पर सवाल खड़े करती हैं।
जिला प्रशासन की जांच पर टिकी निगाहें
प्रभारी एमओ द्वारा जिला प्रशासन को सूचना दिए जाने के बाद अब सभी की निगाहें जिला स्तर पर चल रही जांच पर टिकी हुई हैं। यह जांच इस बात को स्पष्ट करेगी कि क्लोजिंग बैलेंस के तहत राशन कटौती किस नियम के अंतर्गत की गई और इसमें किसी प्रकार की लापरवाही या तकनीकी गड़बड़ी तो नहीं हुई।
कार्डधारियों को उम्मीद है कि जांच के बाद उन्हें दिसंबर माह का राशन उपलब्ध कराया जाएगा या किसी वैकल्पिक व्यवस्था के तहत राहत दी जाएगी।
न्यूज़ देखो: सिस्टम की खामी का बोझ जनता पर
बरवाडीह का यह मामला सार्वजनिक वितरण प्रणाली की कमजोरियों को उजागर करता है। क्लोजिंग बैलेंस जैसी तकनीकी प्रक्रिया की स्पष्ट जानकारी न होने से आम लोग सीधे प्रभावित हो रहे हैं। अब जरूरी है कि प्रशासन पारदर्शिता के साथ जांच पूरी करे और भविष्य में ऐसी स्थिति दोबारा न उत्पन्न हो। हर खबर पर रहेगी हमारी नजर।
हक का राशन समय पर मिलना हर नागरिक का अधिकार
सरकारी योजनाओं की सफलता तभी संभव है जब लाभ समय पर पहुंचे।
विभागीय लापरवाही पर सवाल उठाना और समाधान की मांग करना जरूरी है।
यदि आपके क्षेत्र में भी ऐसी समस्या है तो आवाज उठाएं।
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