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एमके इंटर कॉलेज के 400 छात्र 11वीं परीक्षा से वंचित, फाइटर मंजूलता ने जैक अध्यक्ष से मिलकर विशेष परीक्षा की रखी मांग

#पांकी #पलामू #शैक्षणिकसंकट : एडमिट कार्ड जारी न होने से छात्र परीक्षा से बाहर रहे।

पलामू के पांकी स्थित एमके इंटर कॉलेज के लगभग 400 छात्र 11वीं की वार्षिक परीक्षा से वंचित रह गए हैं। कॉलेज प्रबंधन की कथित लापरवाही के कारण इन छात्रों का एडमिट कार्ड समय पर जारी नहीं हो सका। मामले को लेकर भाजपा नेत्री फाइटर मंजूलता ने रांची में जैक अध्यक्ष डॉ. नटवा हांसदक से मुलाकात कर विशेष परीक्षा आयोजित कराने की मांग की। परिषद ने मामले की जांच कर उचित कार्रवाई का आश्वासन दिया है।

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  • एमके इंटर कॉलेज, पांकी के लगभग 400 छात्र परीक्षा से वंचित।
  • एडमिट कार्ड जारी न होने से नहीं दे सके 11वीं की वार्षिक परीक्षा
  • फाइटर मंजूलता ने रांची में डॉ. नटवा हांसदक से की मुलाकात।
  • प्रभावित छात्रों के लिए विशेष परीक्षा आयोजित करने की मांग।
  • जैक ने जांच कर उचित कार्रवाई का दिया आश्वासन।

पलामू जिले के पांकी प्रखंड स्थित एमके इंटर कॉलेज से जुड़ा एक बड़ा शैक्षणिक मामला सामने आया है। कॉलेज के लगभग 400 छात्र 11वीं की चल रही वार्षिक परीक्षा में शामिल नहीं हो सके। आरोप है कि कॉलेज प्रबंधन की लापरवाही के कारण समय पर एडमिट कार्ड जारी नहीं किया गया, जिससे छात्र परीक्षा केंद्र तक नहीं पहुंच पाए। इस घटना के बाद छात्रों और अभिभावकों में गहरी नाराजगी और चिंता व्याप्त है। अब यह मामला राजनीतिक और प्रशासनिक स्तर पर भी चर्चा का विषय बन गया है।

क्या है पूरा मामला

जानकारी के अनुसार, एमके इंटर कॉलेज के करीब 400 छात्र पूरे वर्ष नियमित रूप से कक्षाओं में उपस्थित रहे और परीक्षा की तैयारी करते रहे। लेकिन परीक्षा के समय उनका एडमिट कार्ड जारी नहीं हो सका। परिणामस्वरूप वे 11वीं की वार्षिक परीक्षा में शामिल होने से वंचित रह गए।

छात्रों का कहना है कि वे अपनी पढ़ाई को लेकर गंभीर थे, लेकिन संस्थागत त्रुटि का खामियाजा उन्हें भुगतना पड़ रहा है। अभिभावकों ने भी इसे बच्चों के भविष्य के साथ खिलवाड़ बताया है।

फाइटर मंजूलता ने उठाया मामला

इस गंभीर स्थिति को लेकर भारतीय जनता पार्टी की नेत्री फाइटर मंजूलता ने पहल करते हुए रांची में झारखंड एकेडमिक काउंसिल के अध्यक्ष डॉ. नटवा हांसदक से मुलाकात की। उन्होंने छात्रों की पूरी समस्या विस्तार से रखते हुए विशेष परीक्षा आयोजित करने की मांग की।

फाइटर मंजूलता ने कहा: “छात्रों का भविष्य सर्वोपरि है। यदि संस्थान स्तर पर कोई त्रुटि हुई है तो उसकी सजा बच्चों को नहीं मिलनी चाहिए। प्रशासन को मानवीय दृष्टिकोण अपनाते हुए त्वरित और सकारात्मक निर्णय लेना चाहिए।”

उन्होंने इसे छात्रों के भविष्य के साथ अन्याय बताते हुए कहा कि किसी भी परिस्थिति में विद्यार्थियों का एक वर्ष बर्बाद नहीं होना चाहिए।

विशेष परीक्षा की मांग

फाइटर मंजूलता ने जैक अध्यक्ष से आग्रह किया कि सभी प्रभावित छात्रों के लिए विशेष परीक्षा आयोजित की जाए। उनका कहना है कि यदि स्पेशल एग्जाम की व्यवस्था की जाती है तो छात्रों का शैक्षणिक सत्र सुरक्षित रह सकेगा और वे अगली कक्षा में समय पर प्रवेश ले सकेंगे।

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उन्होंने अभिभावकों और छात्रों से संयम बनाए रखने की अपील करते हुए भरोसा दिलाया कि वे इस मुद्दे को अंतिम समाधान तक ले जाएंगी।

भाजपा नेतृत्त्व की मौजूदगी

मुलाकात के दौरान भाजपा की निवर्तमान प्रदेश उपाध्यक्ष श्रीमती आरती कुजूर भी मौजूद रहीं। उन्होंने भी छात्रों के हित में शीघ्र समाधान निकालने की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने कहा कि शिक्षा से जुड़ा यह मामला अत्यंत संवेदनशील है और इसमें विलंब छात्रों के भविष्य पर प्रतिकूल प्रभाव डाल सकता है।

जैक अध्यक्ष का आश्वासन

जैक अध्यक्ष डॉ. नटवा हांसदक ने पूरे मामले को गंभीरता से सुना और उचित कार्रवाई का आश्वासन दिया।

डॉ. नटवा हांसदक ने कहा: “परिषद इस विषय की जांच कर आवश्यक कदम उठाएगी, ताकि छात्रों को किसी प्रकार की शैक्षणिक क्षति न हो।”

उन्होंने संकेत दिया कि परिषद स्तर पर तथ्यों की जांच के बाद नियमानुसार निर्णय लिया जाएगा।

छात्रों और अभिभावकों में चिंता

इस घटनाक्रम के बाद छात्रों और उनके अभिभावकों की निगाहें जैक के निर्णय पर टिकी हुई हैं। यदि समय पर समाधान नहीं निकला तो करीब 400 छात्रों का एक शैक्षणिक वर्ष प्रभावित हो सकता है।

छात्रों का कहना है कि वे किसी प्रकार की गलती के दोषी नहीं हैं, इसलिए उन्हें परीक्षा का एक और अवसर दिया जाना चाहिए। अभिभावकों ने भी प्रशासन से मानवीय दृष्टिकोण अपनाने की मांग की है।

आगे क्या

अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि परिषद कब तक जांच पूरी कर निर्णय लेती है। यदि विशेष परीक्षा की घोषणा होती है तो यह छात्रों के लिए राहत भरी खबर होगी। अन्यथा मामला और तूल पकड़ सकता है।

न्यूज़ देखो: लापरवाही की सजा क्यों भुगतें छात्र

यह मामला शिक्षा व्यवस्था में प्रशासनिक जवाबदेही पर गंभीर प्रश्न खड़ा करता है। यदि वास्तव में एडमिट कार्ड जारी करने में संस्थागत चूक हुई है, तो इसकी जिम्मेदारी तय होनी चाहिए। छात्रों का एक वर्ष दांव पर लगना किसी भी सूरत में स्वीकार्य नहीं है। अब जैक के निर्णय से ही यह तय होगा कि न्याय कितनी शीघ्रता से मिलता है। हर खबर पर रहेगी हमारी नजर।

छात्रों के भविष्य के लिए आवाज उठाना जरूरी

शिक्षा केवल परीक्षा नहीं, बल्कि भविष्य की नींव है। यदि किसी प्रशासनिक गलती से छात्रों का भविष्य प्रभावित होता है तो समाज को सजग होना होगा।

आइए हम सभी यह सुनिश्चित करें कि बच्चों के अधिकारों से समझौता न हो।
यदि आप भी मानते हैं कि छात्रों को विशेष परीक्षा का अवसर मिलना चाहिए, तो अपनी राय जरूर साझा करें।
खबर को अधिक से अधिक लोगों तक पहुंचाएं ताकि जिम्मेदार तंत्र तक यह आवाज मजबूती से पहुंचे और प्रभावित छात्रों को न्याय मिल सके।

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