
#पांकी #पलामू #शिक्षा_संकट : एडमिट कार्ड जारी नहीं होने से 11वीं की परीक्षा नहीं दे सके छात्र, भविष्य पर मंडराया संकट।
पलामू जिले के पांकी प्रखंड स्थित एम.के. इंटर कॉलेज, डंडार कला के 422 छात्र-छात्राएं झारखंड एकेडमिक काउंसिल (JAC) द्वारा आयोजित 11वीं की वार्षिक परीक्षा से वंचित रह गए हैं। कॉलेज प्रशासन की लापरवाही के कारण समय पर एडमिट कार्ड जारी नहीं हो सका, जिससे छात्रों का एक साल बर्बाद होने का खतरा उत्पन्न हो गया है। छात्रों और अभिभावकों ने राज्यपाल से हस्तक्षेप कर विशेष परीक्षा आयोजित कराने की मांग की है।
- एम.के. इंटर कॉलेज, डंडार कला के 422 छात्र-छात्राएं परीक्षा से वंचित।
- JAC 11वीं वार्षिक परीक्षा में शामिल नहीं हो सके छात्र।
- आरोप — कॉलेज प्रशासन की लापरवाही से एडमिट कार्ड जारी नहीं हुआ।
- छात्रों और अभिभावकों में भारी आक्रोश और चिंता का माहौल।
- राज्यपाल से विशेष परीक्षा (स्पेशल एग्जाम) कराने की मांग।
पलामू जिले के पांकी प्रखंड से एक गंभीर शैक्षणिक मामला सामने आया है, जहां एम.के. इंटर कॉलेज, डंडार कला के 422 छात्र-छात्राएं 11वीं की वार्षिक परीक्षा से वंचित रह गए। यह परीक्षा झारखंड एकेडमिक काउंसिल (JAC) द्वारा आयोजित की जा रही थी। इस घटना के बाद छात्रों, अभिभावकों और स्थानीय लोगों में आक्रोश का माहौल है।
एडमिट कार्ड नहीं होने से परीक्षा छूटी
प्राप्त जानकारी के अनुसार कॉलेज प्रशासन की लापरवाही और अन्य प्रशासनिक कारणों के चलते छात्रों का एडमिट कार्ड समय पर जारी नहीं किया गया। इसके कारण छात्र परीक्षा केंद्र पर उपस्थित होने के बावजूद परीक्षा में शामिल नहीं हो सके।
छात्रों का कहना है कि उन्होंने पूरे वर्ष मेहनत से पढ़ाई की और परीक्षा के लिए पूरी तरह तैयार थे, लेकिन प्रशासनिक चूक के कारण उनका भविष्य संकट में पड़ गया है।
छात्रों का भविष्य अधर में
इस घटना से 422 छात्रों का शैक्षणिक भविष्य अधर में लटक गया है। कई छात्रों ने भावुक होकर कहा कि यदि जल्द समाधान नहीं निकाला गया तो उनका एक पूरा साल बर्बाद हो जाएगा।
एक छात्र ने कहा, “हमने पूरे साल पढ़ाई की, लेकिन हमारी गलती के बिना हमें परीक्षा से वंचित कर दिया गया। अब हमारा भविष्य क्या होगा?”
यह स्थिति छात्रों के मानसिक तनाव और चिंता को भी बढ़ा रही है।
अभिभावकों में नाराजगी
इस मामले को लेकर अभिभावकों में भी भारी नाराजगी देखी जा रही है। उनका कहना है कि बच्चों के भविष्य के साथ इस तरह की लापरवाही बिल्कुल भी स्वीकार्य नहीं है।
अभिभावकों ने प्रशासन से मांग की है कि इस मामले की जांच कर दोषियों पर कार्रवाई की जाए और छात्रों के लिए जल्द समाधान निकाला जाए।
राज्यपाल से हस्तक्षेप की मांग
स्थिति की गंभीरता को देखते हुए छात्रों और अभिभावकों ने झारखंड के राज्यपाल से हस्तक्षेप की मांग की है। उन्होंने अनुरोध किया है कि छात्रों के हित में विशेष परीक्षा (स्पेशल एग्जाम) आयोजित कराई जाए या कोई वैकल्पिक व्यवस्था बनाई जाए।
छात्रों का कहना है कि वे परीक्षा देने के लिए पूरी तरह तैयार थे और उन्हें केवल एक अवसर की आवश्यकता है।
स्थानीय लोगों ने भी जताई चिंता
स्थानीय लोगों ने भी इस घटना को गंभीर मानते हुए कहा कि शिक्षा व्यवस्था में इस तरह की लापरवाही बेहद चिंताजनक है।
उनका कहना है कि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए प्रशासन को ठोस कदम उठाने चाहिए ताकि किसी भी छात्र का भविष्य इस तरह खतरे में न पड़े।
जांच और समाधान की उम्मीद
अब सभी की नजर प्रशासन और शिक्षा विभाग के निर्णय पर टिकी हुई है। यदि समय रहते उचित निर्णय लिया गया तो छात्रों का एक साल बचाया जा सकता है।
न्यूज़ देखो: शिक्षा व्यवस्था में लापरवाही के गंभीर परिणाम
शिक्षा से जुड़े मामलों में छोटी सी लापरवाही भी छात्रों के भविष्य पर बड़ा असर डाल सकती है। एडमिट कार्ड जैसी बुनियादी प्रक्रिया में चूक होना गंभीर प्रशासनिक विफलता को दर्शाता है। ऐसे मामलों में त्वरित कार्रवाई और वैकल्पिक व्यवस्था बेहद जरूरी है ताकि छात्रों को नुकसान से बचाया जा सके।
हर खबर पर रहेगी हमारी नजर।
छात्रों का भविष्य सर्वोपरि
किसी भी व्यवस्था का सबसे महत्वपूर्ण उद्देश्य छात्रों का भविष्य सुरक्षित करना होना चाहिए। प्रशासन, विद्यालय और शिक्षा विभाग को मिलकर यह सुनिश्चित करना चाहिए कि किसी भी छात्र को लापरवाही का खामियाजा न भुगतना पड़े।
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