49 ग्राम हेरोइन के साथ पकड़ी गई महिला को 8 साल की सजा, गढ़वा कोर्ट ने कहा- समाज में जहर घोलने वालों के लिए नहीं कोई रहम

49 ग्राम हेरोइन के साथ पकड़ी गई महिला को 8 साल की सजा, गढ़वा कोर्ट ने कहा- समाज में जहर घोलने वालों के लिए नहीं कोई रहम

author News देखो Team
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#गढ़वा #ड्रग्स_तस्करी – नशे के व्यापार पर कड़ा प्रहार, दो बच्चों की मां को मिली कठोर सजा

  • गढ़वा कोर्ट ने NDPS एक्ट के तहत सुनाई 8 साल की सश्रम कारावास
  • आरोपी महिला रूबी देवी पर 1 लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया गया
  • जुर्माना नहीं चुकाने पर एक साल अतिरिक्त जेल की सजा होगी
  • महिला को 2022 में 49 ग्राम हेरोइन के साथ गिरफ्तार किया गया था
  • LDPP ने की अधिकतम सजा की मांग, कोर्ट ने मानी तस्करी की गंभीरता
  • CRPC की धारा 428 के तहत पूर्व हिरासत अवधि सजा में जोड़ी जाएगी

नशे के कारोबार पर न्यायालय का सख्त रुख

गढ़वा जिला मुख्यालय में प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश नलिन कुमार की अदालत ने NDPS एक्ट के अंतर्गत एक महिला आरोपी को कठोर सजा सुनाई है। रूबी देवी, जो कि दो बच्चों की मां है, को 8 साल की सश्रम कारावास और 1 लाख रुपये जुर्माने की सजा दी गई। यदि वह जुर्माना अदा नहीं करती है तो उसे एक साल अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा।

2022 की गिरफ्तारी बनी अपराध की नींव

यह मामला 21 जून 2022 को सामने आया था जब पुलिस ने रूबी देवी को 49 ग्राम हेरोइन के साथ गिरफ्तार किया था। उसे गढ़वा शहर क्षेत्र से पकड़ा गया था, और उसी दिन से NDPS एक्ट की धाराओं के तहत मुकदमा दर्ज कर जेल भेज दिया गया। मामले की सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष ने पूरे तथ्य प्रस्तुत किए, जिससे अदालत को इस नतीजे पर पहुंचने में स्पष्टता मिली।

अभियोजन की दलीलें और अदालत की टिप्पणी

मामले की सुनवाई के दौरान लोक अभियोजक (LDPP) ने कोर्ट से निवेदन किया कि यह अपराध गंभीर सामाजिक असर वाला है और समाज को नशे के जहर से बचाने के लिए कड़ी सजा जरूरी है

“महिला की पारिवारिक स्थिति और बच्चों की चिंता अपनी जगह है, लेकिन समाज में नशे का जहर घोलने वालों को माफ नहीं किया जा सकता।”
लोक अभियोजक, गढ़वा कोर्ट

वहीं अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि सीआरपीसी की धारा 428 के अंतर्गत रूबी देवी की हिरासत की अवधि को अंतिम सजा में समायोजित किया जाएगा।

महिला की स्थिति पर अदालत की संवेदनशीलता

कोर्ट ने यह माना कि रूबी देवी महिला है और उसके दो नाबालिग बच्चे हैं। लेकिन साथ ही यह भी कहा कि ऐसे अपराधों में संलिप्तता का कोई औचित्य नहीं हो सकता, और परिवार की जिम्मेदारी के नाम पर समाज को जोखिम में नहीं डाला जा सकता

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