
#सिमडेगा #शिक्षा_बैठक : 71 विद्यालयों के प्रधानाचार्यों की गरिमामय उपस्थिति रही।
सिमडेगा के सरखुटोली स्थित रामरेखा धाम विद्या मंदिर उच्च विद्यालय में प्रांतीय प्रधानाचार्य सह समिति बैठक का आयोजन किया गया। वनवासी कल्याण केंद्र झारखण्ड की शैक्षिक इकाई द्वारा आयोजित इस बैठक में 71 विद्यालयों के प्रधानाचार्य और 41 समिति पदाधिकारी शामिल हुए। कार्यक्रम का शुभारंभ दीप प्रज्ज्वलन से हुआ तथा वार्षिक पत्रिका ज्योत्स्ना के 17वें संस्करण का लोकार्पण किया गया। बैठक में शिक्षा की गुणवत्ता, संगठन सुदृढ़ीकरण और भावी योजनाओं पर विस्तृत चर्चा हुई।
- रामरेखा धाम विद्या मंदिर उच्च विद्यालय, सरखुटोली में आयोजन।
- 71 विद्यालयों के प्रधानाचार्य और 41 समिति पदाधिकारी शामिल।
- वार्षिक पत्रिका ज्योत्स्ना के 17वें संस्करण का लोकार्पण।
- मुख्य अतिथि भगवान सहाय जी का प्रेरक संबोधन।
- शिक्षा गुणवत्ता और संगठन सुदृढ़ीकरण पर विस्तृत मंथन।
सिमडेगा जिले के सरखुटोली स्थित रामरेखा धाम विद्या मंदिर उच्च विद्यालय में शिक्षा, संस्कार और राष्ट्रनिर्माण की भावना से ओत-प्रोत वातावरण में प्रांतीय प्रधानाचार्य सह समिति बैठक का आयोजन किया गया। यह कार्यक्रम वनवासी कल्याण केंद्र झारखण्ड की शैक्षिक इकाई श्रीहरि वनवासी विकास समिति झारखण्ड द्वारा संचालित विद्यालय परिसर में आयोजित हुआ। बैठक में राज्य भर से आए प्रधानाचार्य एवं समिति पदाधिकारियों ने भाग लिया। आयोजन का उद्देश्य शैक्षणिक गुणवत्ता को सुदृढ़ करना और संगठनात्मक एकता को मजबूत बनाना रहा।
दीप प्रज्ज्वलन के साथ हुआ शुभारंभ
कार्यक्रम का शुभारंभ सरस्वती माता, भारत माता, सरना माता एवं ‘ॐ’ के पावन चित्र के समक्ष दीप प्रज्ज्वलन तथा पुष्पार्चन के साथ किया गया। इस अवसर पर सभागार आध्यात्मिक ऊर्जा से आलोकित हो उठा।
बैठक में झारखण्ड में संचालित 71 विद्यालयों के प्रधानाचार्य तथा 41 समिति के पदाधिकारी जिनमें कोषाध्यक्ष एवं सचिव शामिल थे, की गरिमामय उपस्थिति रही। यह व्यापक सहभागिता संगठन की सक्रियता और शिक्षा क्षेत्र में उसके विस्तार को दर्शाती है।
वार्षिक पत्रिका ज्योत्स्ना का लोकार्पण
इस अवसर पर श्रीहरि वनवासी विकास समिति झारखण्ड द्वारा प्रकाशित वार्षिक पत्रिका “ज्योत्स्ना” के 17वें संस्करण का विधिवत लोकार्पण किया गया। यह पत्रिका शिक्षा और संगठन की उपलब्धियों को संकलित करने वाला प्रेरणास्रोत दस्तावेज बताया गया।
पत्रिका के माध्यम से बीते वर्ष की गतिविधियों, शैक्षणिक उपलब्धियों और सामाजिक पहलों का उल्लेख किया गया, जिससे उपस्थित जनों को संगठन की दिशा और लक्ष्य की जानकारी मिली।
मुख्य अतिथि का प्रेरक उद्बोधन
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि भगवान सहाय जी, अखिल भारतीय सह संगठन मंत्री, वनवासी कल्याण आश्रम ने अपने उद्बोधन में व्यक्ति निर्माण को मूल उद्देश्य बताया।
भगवान सहाय जी ने कहा: “हमारे कार्य का मूल उद्देश्य व्यक्ति निर्माण है। हमें सतत प्रयास करना होगा, ताकि हमारे शहीदों के सपनों का भारत पुनः सशक्त और गौरवशाली रूप में खड़ा हो सके।”
उनके संबोधन ने उपस्थित प्रधानाचार्यों और समिति पदाधिकारियों में राष्ट्रसेवा का नया संकल्प जागृत किया।
शिक्षा गुणवत्ता और संगठन पर मंथन
उद्घाटन सत्र के पश्चात विभिन्न विषयों पर गटानुसार प्रधानाचार्यों तथा समिति पदाधिकारियों की अलग-अलग बैठकें आयोजित की गईं। प्रांत एवं केंद्र से पधारे अधिकारियों ने शिक्षा की गुणवत्ता, संगठन सुदृढ़ीकरण एवं भावी योजनाओं पर विस्तृत मार्गदर्शन दिया।
मार्गदर्शन देने वालों में भगवान सहाय जी (अखिल भारतीय सह संगठन मंत्री, वनवासी कल्याण आश्रम), पी. वी. राधाकृष्णन जी (अखिल भारतीय शिक्षा प्रमुख, वनवासी कल्याण आश्रम), प्रफुल्ल अकांत जी (क्षेत्रीय संगठन मंत्री), शिरीष कोराने जी (क्षेत्रीय शिक्षा प्रमुख), राजेश अग्रवाल जी (सह मंत्री, श्रीहरि वनवासी विकास समिति झारखण्ड), सुभाष चंद्र दुबे जी (प्रांत शिक्षा प्रमुख) प्रमुख रूप से उपस्थित रहे।
बैठक में खेदु नायक जी, देवनंदन सिंह जी, मंगल सिंह मुंडा जी, तपेश्वर जी, हीरालाल महतो जी, संतोष दास जी तथा विभिन्न विद्यालयों से आए प्रधानाचार्य एवं समिति के सदस्य उपस्थित थे।
अनुशासन और राष्ट्रभक्ति की झलक
पूरे आयोजन में अनुशासन, संगठनात्मक एकता और राष्ट्रभक्ति की सजीव झलक देखने को मिली। वक्ताओं ने संस्कारयुक्त शिक्षा को सशक्त राष्ट्र निर्माण की आधारशिला बताया। बैठक ने शिक्षा क्षेत्र में नवचेतना का संचार करते हुए यह संदेश दिया कि गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के साथ सांस्कृतिक मूल्यों का समावेश आवश्यक है।
न्यूज़ देखो: शिक्षा और संगठन का समन्वित संदेश
सिमडेगा में आयोजित यह बैठक दर्शाती है कि शिक्षा केवल पाठ्यक्रम तक सीमित नहीं, बल्कि व्यक्तित्व निर्माण और सामाजिक चेतना से भी जुड़ी है। 71 विद्यालयों की सहभागिता संगठनात्मक विस्तार और समन्वय की मजबूत तस्वीर पेश करती है। अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि बैठक में लिए गए निर्णय जमीनी स्तर पर किस प्रकार लागू होते हैं। हर खबर पर रहेगी हमारी नजर।
संस्कारयुक्त शिक्षा से ही सशक्त होगा समाज
शिक्षा संस्थानों की ऐसी बैठकें भविष्य की दिशा तय करती हैं। जब प्रधानाचार्य और पदाधिकारी एक मंच पर मिलकर विचार करते हैं, तो नई ऊर्जा और स्पष्ट लक्ष्य सामने आते हैं।
जरूरी है कि शिक्षा के साथ मूल्य और अनुशासन भी सुदृढ़ हों।
संगठन और समाज के सहयोग से ही विकास की राह मजबूत होती है।






