Palamau

लेस्लीगंज में 25 जनवरी को हजरत अंजान शहदाता रहमतुल्लाह अलैह का 91वां उर्स, कव्वाली की रात बनेगी आकर्षण का केंद्र

#लेस्लीगंज #पलामू #धार्मिक_आयोजन : अकीदत और एहतराम के साथ 91वां उर्स, पूरी रात चलेगा कव्वाली मुकाबला।

पलामू जिले के लेस्लीगंज में 25 जनवरी 2026 को हजरत अंजान शहदाता रहमतुल्लाह अलैह का 91वां उर्स मनाया जाएगा। आयोजन अंजुमन मिल्लते इस्लामिया उर्स कमिटी के तत्वावधान में होगा, जिसमें दूर-दराज से अकीदतमंदों के शामिल होने की उम्मीद है। दिनभर धार्मिक रस्मों के बाद रात में पूरी रात कव्वाली महफिल आयोजित होगी। यह उर्स धार्मिक सौहार्द और सूफी परंपरा का प्रतीक माना जाता है।

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  • 25 जनवरी 2026 को लेस्लीगंज में आयोजित होगा 91वां उर्स
  • हजरत अंजान शहदाता रहमतुल्लाह अलैह की मजार पर चादरपोशी और दुआ।
  • फज्र के बाद कुरानखानी और मिलाद शरीफ का आयोजन।
  • रात 9 बजे से पूरी रात कव्वाली मुकाबला
  • मशहूर कव्वाल अजमत आफताब वारसी और इंतजार शाबरी होंगे आमने-सामने।

लेस्लीगंज में हर वर्ष की तरह इस बार भी हजरत अंजान शहदाता रहमतुल्लाह अलैह का उर्स पूरे अकीदत और रूहानियत के साथ मनाने की तैयारियां पूरी कर ली गई हैं। यह उर्स न सिर्फ धार्मिक आस्था का केंद्र है, बल्कि सामाजिक सौहार्द और भाईचारे की मिसाल भी पेश करता है। उर्स कमिटी के अनुसार, इस आयोजन में पलामू सहित आसपास के जिलों के अलावा झारखंड और पड़ोसी राज्यों से भी बड़ी संख्या में जायरीन पहुंचते हैं।

फज्र से शुरू होंगी धार्मिक रस्में

उर्स के दिन धार्मिक कार्यक्रमों की शुरुआत फज्र की नमाज से पहले गुस्ल व छीटा की रस्म से होगी। इसके बाद फज्र की नमाज अदा की जाएगी। नमाज के उपरांत कुरानखानी और मिलाद शरीफ का आयोजन किया जाएगा, जिसमें उलमा और अकीदतमंद शिरकत करेंगे। इस दौरान हजरत अंजान शहदाता रहमतुल्लाह अलैह की जिंदगी और उनके सूफी संदेशों पर प्रकाश डाला जाएगा।

मिलाद शरीफ के बाद मजार पर चादरपोशी की रस्म अदा की जाएगी। दिनभर जायरीन मजार पर हाजिरी देकर दुआ मांगते रहेंगे। पूरे दिन लेस्लीगंज का माहौल पूरी तरह रूहानी और सुकून भरा रहेगा।

कव्वाली महफिल रहेगा मुख्य आकर्षण

उर्स का सबसे बड़ा आकर्षण रात 9 बजे से शुरू होने वाली कव्वाली महफिल होगी, जो पूरी रात चलेगी। इस दौरान हिंदुस्तान के मशहूर कव्वाल अपनी प्रस्तुतियों से समां बांधेंगे। इस बार कव्वाली मुकाबले में अजमत आफताब वारसी (अमरोहा, उत्तर प्रदेश) और इंतजार शाबरी (बिजनौर/नागपुर) आमने-सामने होंगे।

कव्वाली के दीवाने श्रोताओं के लिए यह मुकाबला खास माना जा रहा है। सूफियाना कलाम, हम्द, नात और मनकबत के जरिए कव्वाल श्रोताओं को रूहानी सफर पर ले जाएंगे। हर साल की तरह इस बार भी कव्वाली महफिल में भारी भीड़ जुटने की संभावना है।

विशिष्ट अतिथियों की रहेगी मौजूदगी

कव्वाली कार्यक्रम का उद्घाटन समाजसेवी गौतम सिंह उर्फ डब्ल्यू सिंह एवं आयुष तिर्की उर्फ राजू तिर्की द्वारा किया जाएगा। वहीं विशिष्ट अतिथि के रूप में समाजसेवी मोहम्मद साहिद मौजूद रहेंगे। आयोजकों के अनुसार, सभी अतिथि कार्यक्रम की गरिमा बढ़ाएंगे और उर्स के संदेश को और व्यापक बनाएंगे।

उर्स कमिटी की अपील और नियम

अंजुमन मिल्लते इस्लामिया उर्स कमिटी ने अकीदतमंदों से आयोजन को शांतिपूर्ण और अनुशासित ढंग से संपन्न कराने में सहयोग की अपील की है। कमिटी ने स्पष्ट किया है कि चादरपोशी साउंड सिस्टम और गाड़ियों के माध्यम से शाम 5 बजे तक ही की जाएगी। इसके बाद किसी भी प्रकार की शोरगुल वाली गतिविधि की अनुमति नहीं होगी।

कमिटी ने यह भी आग्रह किया है कि कुरान पाक की आयत लिखी या प्रिंटेड चादर मजार पर न चढ़ाई जाए। केवल सादा चादर चढ़ाने की अपील की गई है, ताकि मजार की पवित्रता और मर्यादा बनी रहे। इसके अलावा, महफिल में नशे की हालत में आने पर सख्त प्रतिबंध रहेगा और नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।

क्षेत्र में उत्साह का माहौल

उर्स आयोजन को लेकर लेस्लीगंज और आसपास के इलाकों में उत्साह का माहौल है। स्थानीय दुकानदार, स्वयंसेवक और कमिटी के सदस्य तैयारियों में जुटे हुए हैं। साफ-सफाई, बिजली, पानी और सुरक्षा व्यवस्था को लेकर विशेष ध्यान दिया जा रहा है, ताकि जायरीन को किसी प्रकार की परेशानी न हो।

स्थानीय लोगों का कहना है कि उर्स के दौरान लेस्लीगंज में एक अलग ही रौनक देखने को मिलती है। विभिन्न धर्मों और समुदायों के लोग इस आयोजन में शामिल होकर गंगा-जमुनी तहजीब की मिसाल पेश करते हैं।

न्यूज़ देखो: सूफी परंपरा और सामाजिक सौहार्द का प्रतीक

लेस्लीगंज का उर्स केवल धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि सामाजिक एकता और भाईचारे का संदेश भी देता है। ऐसे आयोजन समाज में शांति, प्रेम और सहिष्णुता को मजबूत करते हैं। प्रशासन और कमिटी की जिम्मेदारी है कि परंपरा और अनुशासन दोनों बनाए रखें। हर खबर पर रहेगी हमारी नजर।

अकीदत के साथ जिम्मेदारी भी जरूरी

उर्स जैसे आयोजन हमें प्रेम और इंसानियत का रास्ता दिखाते हैं।
परंपराओं का सम्मान करें और नियमों का पालन करें।
शांति और सौहार्द के साथ कार्यक्रम को सफल बनाएं।
अपनी राय साझा करें, खबर को आगे बढ़ाएं और सामाजिक एकता का संदेश फैलाएं।

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