संस्कृति और परंपरा का उत्सव — ठेठईटांगर के केरिया भंडार टोली में धूमधाम से मनाई गई डाइर जतरा

संस्कृति और परंपरा का उत्सव — ठेठईटांगर के केरिया भंडार टोली में धूमधाम से मनाई गई डाइर जतरा

author Birendra Tiwari
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#ठेठईटांगर #डाइरजतरा : नवयुवक संघ भंडार टोली के तत्वावधान में पारंपरिक डाइर जतरा सह मेला का भव्य आयोजन
  • केरिया पंचायत के भंडार टोली में पारंपरिक डाइर जतरा सह मेला का सफल आयोजन।
  • आयोजन की कमान नवयुवक संघ भंडार टोली ने संभाली।
  • मंच पर रूपेश बड़ाईक, केशव देवी, कय्यूम अब्बास, शंकर संन्यासी, राजेंद्र नायक जैसे कलाकारों ने पेश किए शानदार नागपुरी गीत
  • कार्यक्रम में मुख्य अतिथि कृष्णा बड़ाईक और विशिष्ट अतिथि विपिन पंकज मिंज हुए शामिल।
  • अतिथियों का आदिवासी परंपरा के अनुसार स्वागत और फीता काटकर शुभारंभ

ठेठईटांगर प्रखंड के केरिया पंचायत के भंडार टोली में इस वर्ष डाइर जतरा सह मेला का आयोजन अत्यंत उत्साह और भव्यता के साथ संपन्न हुआ। आयोजन का नेतृत्व नवयुवक संघ भंडार टोली ने किया, जिसमें स्थानीय युवाओं ने न केवल अपनी सांस्कृतिक धरोहर का प्रदर्शन किया बल्कि परंपरा के संरक्षण का संदेश भी दिया।

मंच पर गूंजे नागपुरी सुर, झूम उठे ग्रामीण

कार्यक्रम का मुख्य आकर्षण रहा नागपुरी सांस्कृतिक संध्या, जिसमें कलाकारों रूपेश बड़ाईक, केशव देवी, कय्यूम अब्बास, शंकर संन्यासी और राजेंद्र नायक ने एक से बढ़कर एक गीत प्रस्तुत किए। तालियों की गूंज और ढोल-नगाड़ों की थाप पर पूरा भंडार टोली नाच उठा। हर उम्र के लोग इस आयोजन में शामिल हुए, जिससे पूरा क्षेत्र उत्सवमय वातावरण में डूब गया।

आदिवासी परंपरा में रचा-बसा स्वागत समारोह

मुख्य अतिथि जिला परिषद सदस्य कृष्णा बड़ाईक और विशिष्ट अतिथि प्रखंड प्रमुख विपिन पंकज मिंज का स्वागत पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ किया गया। ढोल-नगाड़ों की थाप पर अतिथियों को कार्यक्रम स्थल तक लाया गया, जहां हाथ धुलाई, अंगवस्त्र और फूलगुच्छ देकर सम्मानित किया गया। इसके बाद अतिथियों ने फीता काटकर कार्यक्रम का शुभारंभ किया।

कृष्णा बड़ाईक ने कहा: “हमारे पूर्वजों ने इस डाइर जतरा मेला की परंपरा को जीवित रखा है। हमें इसे और आगे बढ़ाना है, नशा पान से दूर रहना है और एकता व भाईचारा बनाए रखना है। तभी हमारे गांव और पंचायत का विकास संभव है।”

विपिन पंकज मिंज ने कहा: “हमारा क्षेत्र कृषि प्रधान है। हम खेती किसानी में गाय-बैल का उपयोग करते हैं। जब फसल अच्छी होती है तो ईश्वर को धन्यवाद देने के लिए ऐसे मेले का आयोजन किया जाता है। यह हमारी सांस्कृतिक विरासत है, जिसे हमें सहेजना और आगे ले जाना होगा।”

दोनों अतिथियों ने युवाओं को नशामुक्त समाज और सांस्कृतिक संरक्षण के लिए आगे आने का आह्वान किया।

सांस्कृतिक धरोहर और सामाजिक एकता का प्रतीक

यह डाइर जतरा मेला न केवल धार्मिक आस्था का केंद्र था, बल्कि सामाजिक एकजुटता का भी सशक्त उदाहरण रहा। इस मौके पर नवयुवक संघ के अध्यक्ष योगेश नायक, मुखिया क्रिस्तानी लकड़ा, संजय राम, मुन्ना नायक, राजेश नायक, सामाजिक कार्यकर्ता जुनाश डांग, विराज नायक, कृष्णा प्रधान समेत बड़ी संख्या में ग्रामीण मौजूद रहे।
लोगों ने कहा कि इस तरह के आयोजन समाज को जोड़ने और युवा पीढ़ी को अपनी जड़ों से जोड़ने का कार्य करते हैं।

न्यूज़ देखो: परंपरा के साथ आधुनिकता का संतुलन जरूरी

ठेठईटांगर की डाइर जतरा केवल एक मेला नहीं, बल्कि यह समाज की सामूहिक चेतना और सांस्कृतिक पहचान का प्रतीक है। जब युवा और ग्रामीण मिलकर इस तरह के आयोजन करते हैं, तो वह न केवल संस्कृति को जीवित रखते हैं बल्कि समाज में एकता और सकारात्मकता का संदेश भी फैलाते हैं।
हर खबर पर रहेगी हमारी नजर।

अपनी जड़ों से जुड़े, अपनी संस्कृति को सहेजें

आज के दौर में जब परंपराएं धीरे-धीरे आधुनिकता की दौड़ में खो रही हैं, ऐसे आयोजनों से हमें अपनी जड़ों से जुड़ने की प्रेरणा मिलती है। आइए, हम सब मिलकर इस विरासत को सहेजने का संकल्प लें। इस खबर को साझा करें, अपनी राय दें और आने वाली पीढ़ी को संस्कृति की यह मशाल सौंपें।

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Written by

सिमडेगा

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