
#बानो #समावेशी_शिक्षा : एसएस प्लस टू विद्यालय में दिव्यांग बच्चों की शिक्षा पर कार्यशाला आयोजित।
बानो स्थित एसएस प्लस टू विद्यालय के सभागार में समावेशी शिक्षा के तहत एक दिवसीय कार्यशाला आयोजित की गई। इसमें विभिन्न विद्यालयों के प्रधान, शिक्षक और अभिभावक शामिल हुए। कार्यक्रम में दिव्यांग बच्चों की पहचान, देखभाल, यू डायस एंट्री और ई विद्या वाहिनी में उपस्थिति सुनिश्चित करने पर मार्गदर्शन दिया गया। यह पहल समावेशी शिक्षा को मजबूत बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।
- एसएस प्लस टू विद्यालय, बानो में एक दिवसीय कार्यशाला का आयोजन।
- बाल गोबिंद पटेल ने दिव्यांग बच्चों की पहचान व देखभाल पर दी जानकारी।
- बच्चों को मुख्यधारा की शिक्षा से जोड़ने पर विशेष जोर।
- यू डायस एंट्री और ई विद्या वाहिनी उपस्थिति सुनिश्चित करने के निर्देश।
- महिला सुपरवाइजर नैना कुमारी सहित कई अधिकारी और शिक्षक रहे उपस्थित।
बानो, सिमडेगा। प्रखंड क्षेत्र के एसएस प्लस टू विद्यालय बानो के सभागार में समावेशी शिक्षा के अंतर्गत सभी विद्यालयों के प्रधानाध्यापकों, शिक्षकों एवं अभिभावकों की एक दिवसीय कार्यशाला आयोजित की गई। इस कार्यशाला का उद्देश्य दिव्यांग बच्चों को शिक्षा की मुख्यधारा से जोड़ना, उनकी पहचान सुनिश्चित करना तथा विद्यालय स्तर पर आवश्यक शैक्षणिक और प्रशासनिक प्रक्रियाओं को सुदृढ़ करना था। कार्यक्रम में शिक्षा और बाल विकास से जुड़े कई अधिकारी एवं कर्मी उपस्थित रहे।
कार्यशाला की शुरुआत समावेशी शिक्षा के महत्व पर चर्चा के साथ हुई। वक्ताओं ने स्पष्ट किया कि शिक्षा का अधिकार सभी बच्चों के लिए समान है और किसी भी प्रकार की शारीरिक या मानसिक चुनौती शिक्षा में बाधा नहीं बननी चाहिए। विद्यालय स्तर पर जागरूकता और समन्वय से ही समावेशी शिक्षा को प्रभावी बनाया जा सकता है।
दिव्यांग बच्चों की पहचान और समुचित देखभाल
कार्यशाला में जानकारी देते हुए बाल गोबिंद पटेल ने दिव्यांग बच्चों की सही पहचान की प्रक्रिया पर विस्तार से चर्चा की। उन्होंने बताया कि विद्यालयों में ऐसे बच्चों की पहचान समय पर करना आवश्यक है, ताकि उन्हें आवश्यक शैक्षणिक सहयोग और संसाधन उपलब्ध कराए जा सकें।
बाल गोबिंद पटेल ने कहा: “दिव्यांग बच्चों की पहचान कर उनका समुचित देखभाल करना और उन्हें शिक्षा से जोड़ना हम सबकी जिम्मेदारी है।”
उन्होंने शिक्षकों को सुझाव दिया कि वे नियमित कक्षा अवलोकन, अभिभावकों से संवाद और स्वास्थ्य संबंधी संकेतों के आधार पर बच्चों की आवश्यकताओं को समझें। साथ ही अभिभावकों को भी जागरूक किया गया कि वे बच्चों की स्थिति को छिपाने के बजाय विद्यालय के साथ साझा करें, ताकि उचित सहायता मिल सके।
शिक्षा से जोड़ने और उपस्थिति सुनिश्चित करने पर बल
कार्यक्रम में इस बात पर विशेष जोर दिया गया कि दिव्यांग बच्चों को विद्यालय में नियमित रूप से लाना और उनकी उपस्थिति सुनिश्चित करना प्राथमिकता होनी चाहिए। इसके लिए अभिभावकों, शिक्षकों और प्रशासन के बीच समन्वय आवश्यक है।
कार्यशाला में बच्चों का यू डायस में सही और समयबद्ध पंजीकरण करने के महत्व को समझाया गया। बताया गया कि सटीक डाटा एंट्री से ही सरकारी योजनाओं का लाभ संबंधित बच्चों तक पहुंच पाता है। इसके साथ ही ई विद्या वाहिनी के तहत सभी बच्चों की उपस्थिति दर्ज करने की प्रक्रिया पर भी विस्तृत जानकारी दी गई।
सहायक उपकरणों की जानकारी
दिव्यांग बच्चों के लिए उपलब्ध विभिन्न सहायक उपकरणों के बारे में भी प्रतिभागियों को अवगत कराया गया। बताया गया कि श्रवण, दृष्टि या शारीरिक बाधा से जूझ रहे बच्चों के लिए विशेष उपकरण उपलब्ध हैं, जिनका उपयोग कर उनकी सीखने की क्षमता को बेहतर बनाया जा सकता है। शिक्षकों को इन उपकरणों के उपयोग और आवश्यकता के अनुसार अनुशंसा करने की प्रक्रिया भी समझाई गई।
विभिन्न पदाधिकारी रहे मौजूद
इस अवसर पर बाल विकास परियोजना की महिला सुपरवाइजर नैना कुमारी, बीपीएम विकास शरण, स्मिथ सोनी, लॉरेंस मिंज, घनश्याम साहू, ओमप्रकाश दास, गणेश गोंझु, केदारनाथ सिंह सहित अन्य शिक्षक, अभिभावक और संबंधित कर्मी उपस्थित रहे। सभी ने समावेशी शिक्षा को प्रभावी बनाने के लिए मिलकर कार्य करने की प्रतिबद्धता जताई।
कार्यक्रम के दौरान प्रतिभागियों ने अपने अनुभव साझा किए और दिव्यांग बच्चों की शिक्षा में आने वाली चुनौतियों पर चर्चा की। कई शिक्षकों ने सुझाव दिया कि ऐसी कार्यशालाएं नियमित अंतराल पर आयोजित की जानी चाहिए, ताकि अद्यतन जानकारी और प्रशिक्षण मिलता रहे।
समावेशी सोच से मजबूत होगा शिक्षा तंत्र
कार्यशाला में यह स्पष्ट किया गया कि समावेशी शिक्षा केवल एक सरकारी योजना नहीं, बल्कि सामाजिक उत्तरदायित्व है। जब विद्यालय, परिवार और प्रशासन मिलकर कार्य करते हैं, तब ही प्रत्येक बच्चे को समान अवसर मिल पाता है। दिव्यांग बच्चों को आत्मनिर्भर और आत्मविश्वासी बनाने में विद्यालयों की भूमिका महत्वपूर्ण है।
इस प्रकार की पहल से न केवल बच्चों का शैक्षणिक स्तर सुधरेगा, बल्कि समाज में समानता और संवेदनशीलता की भावना भी मजबूत होगी। बानो में आयोजित यह कार्यशाला इसी दिशा में एक सार्थक प्रयास के रूप में देखी जा रही है।

न्यूज़ देखो: समावेशी शिक्षा की ओर ठोस पहल
बानो में आयोजित यह कार्यशाला दर्शाती है कि शिक्षा विभाग समावेशी सोच को व्यवहारिक रूप देने की दिशा में सक्रिय है। दिव्यांग बच्चों की पहचान, डाटा प्रबंधन और नियमित उपस्थिति जैसे मुद्दों पर गंभीर चर्चा प्रशासनिक प्रतिबद्धता को दर्शाती है। अब आवश्यक है कि इन निर्देशों का प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित हो और समय-समय पर समीक्षा की जाए।
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हर बच्चे को मिले समान अवसर
समाज की प्रगति तभी संभव है जब कोई भी बच्चा पीछे न छूटे।
दिव्यांग बच्चों को शिक्षा से जोड़ना संवेदनशील और जिम्मेदार समाज की पहचान है।
विद्यालय, अभिभावक और प्रशासन मिलकर बदलाव ला सकते हैं।
आइए, समावेशी शिक्षा को अभियान बनाएं और हर बच्चे तक पहुंच सुनिश्चित करें।
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