
#लातेहार #नीलाम्बरपीताम्बरजयंती : झारखंड की वीर परंपरा को नमन करते हुए जमटिया में ऐतिहासिक समारोह संपन्न।
झारखंड के लातेहार जिले के बरवाडीह प्रखंड अंतर्गत छिपादोहर पंचायत के जुरूहार स्थित जमटिया में गुरुवार को वीर शहीद नीलाम्बर–पीताम्बर की 198वीं जयंती भव्य रूप से मनाई गई। नीलाम्बर–पीताम्बर स्मृति पार्क में आयोजित इस समारोह में हजारों श्रद्धालु, जनप्रतिनिधि और सामाजिक कार्यकर्ता शामिल हुए। कार्यक्रम का उद्देश्य झारखंड के आदिवासी स्वाभिमान, स्वतंत्रता संग्राम और सांस्कृतिक विरासत को स्मरण करना रहा।
- जमटिया स्थित नीलाम्बर–पीताम्बर स्मृति पार्क में दोपहर 12 बजे से समारोह का आयोजन।
- छिपादोहर मुखिया बेरोनिका कुजुर, पंसस दिलीप कुमार सिंह, हरातू मुखिया सावित्री देवी रही मुख्य अतिथि।
- अजय सिंह, श्रीराम गणेश सिंह, अरुण कुमार सिंह, जनेश्वर सिंह सहित कई विशिष्ट अतिथि शामिल।
- हजारों श्रद्धालुओं ने वीर शहीदों की प्रतिमाओं पर अर्पित की पुष्पांजलि।
- सांस्कृतिक कार्यक्रम, झुमर नृत्य और मकर संक्रांति मेला रहा आकर्षण का केंद्र।
झारखंड की वीर भूमि एक बार फिर अपने इतिहास और बलिदान की गौरवगाथा से जीवंत हो उठी, जब छिपादोहर पंचायत के ग्राम जुरूहार स्थित जमटिया में परम पूज्य वीर शहीद नीलाम्बर–पीताम्बर की 198वीं जयंती श्रद्धा और सम्मान के साथ मनाई गई। गुरुवार को आयोजित इस ऐतिहासिक समारोह में जिले के साथ-साथ आसपास के क्षेत्रों से हजारों की संख्या में श्रद्धालु पहुंचे और वीर शहीदों को नमन किया।
पुष्पांजलि से हुआ समारोह का शुभारंभ
समारोह की शुरुआत नीलाम्बर–पीताम्बर स्मृति पार्क में स्थापित वीर शहीद नीलाम्बर और वीर शहीद पीताम्बर की प्रतिमाओं पर अतिथियों द्वारा फूल-माला अर्पित कर की गई। श्रद्धालुओं ने जयघोष के साथ वीरों के बलिदान को याद किया। पूरे परिसर में देशभक्ति और सम्मान का वातावरण व्याप्त रहा।
मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित छिपादोहर मुखिया बेरोनिका कुजुर, पंचायत समिति सदस्य दिलीप कुमार सिंह एवं हरातू मुखिया सावित्री देवी ने संयुक्त रूप से श्रद्धांजलि अर्पित की। विशिष्ट अतिथियों में समाजसेवी अजय सिंह, श्रीराम गणेश सिंह (जिला अध्यक्ष, लातेहार), अरुण कुमार सिंह (ग्राम प्रधान, जुरूहार) और जनेश्वर सिंह (पूर्व मुखिया, हरातू) शामिल रहे।
वक्ताओं ने बताया बलिदान का महत्व
समारोह को संबोधित करते हुए वक्ताओं ने कहा कि नीलाम्बर–पीताम्बर का बलिदान झारखंड के इतिहास में स्वर्ण अक्षरों में दर्ज है। उन्होंने ब्रिटिश हुकूमत के खिलाफ आदिवासी समाज को संगठित कर अन्याय और शोषण के विरुद्ध संघर्ष किया।
बेरोनिका कुजुर ने कहा कि नीलाम्बर–पीताम्बर केवल स्वतंत्रता सेनानी नहीं, बल्कि झारखंडी अस्मिता के प्रतीक हैं।
दिलीप कुमार सिंह ने कहा कि उनकी शहादत आज भी युवाओं को अन्याय के खिलाफ खड़े होने की प्रेरणा देती है।
सावित्री देवी ने कहा कि वीरों की जयंती मनाना केवल औपचारिकता नहीं, बल्कि उनके विचारों को जीवन में उतारने का संकल्प है।
सांस्कृतिक कार्यक्रमों ने बढ़ाई भव्यता
समारोह के दौरान आयोजित मकर संक्रांति मेला और सांस्कृतिक कार्यक्रमों ने आयोजन को और भी भव्य बना दिया। स्थानीय कलाकारों ने ढोल, नगाड़ा और मांदर की थाप पर पारंपरिक झुमर नृत्य प्रस्तुत किया। आदिवासी पारंपरिक वेश-भूषा में सजी महिलाओं और कलाकारों की प्रस्तुति ने दर्शकों का मन मोह लिया।
स्कूली बच्चों द्वारा प्रस्तुत सांस्कृतिक झांकियों को भी खूब सराहना मिली। इन झांकियों के माध्यम से नीलाम्बर–पीताम्बर के संघर्ष, आदिवासी जीवन और झारखंड की संस्कृति को जीवंत रूप में प्रस्तुत किया गया।
आयोजन समिति की भूमिका
कार्यक्रम का आयोजन नीलाम्बर–पीताम्बर विचार मंच, जमटिया द्वारा किया गया। मंच के संस्थापक एवं छिपादोहर प्रखंड निर्माण संघर्ष समिति के अध्यक्ष देवनाथ सिंह खरवार ने अतिथियों का स्वागत करते हुए कहा कि यह आयोजन केवल एक जयंती समारोह नहीं, बल्कि सामाजिक एकता और ऐतिहासिक चेतना को मजबूत करने का प्रयास है।
देवनाथ सिंह खरवार ने कहा:
“नीलाम्बर–पीताम्बर का संघर्ष हमें अपनी जड़ों से जोड़ता है। जब तक उनकी गाथा जीवित रहेगी, झारखंड का स्वाभिमान भी जीवित रहेगा।”
उन्होंने सभी आगंतुकों और श्रद्धालुओं के प्रति आभार व्यक्त करते हुए आयोजन को सफल बनाने के लिए सहयोग देने वालों का धन्यवाद किया।
हजारों श्रद्धालुओं की सहभागिता
इस ऐतिहासिक समारोह में हजारों श्रद्धालुओं की मौजूदगी यह दर्शाती है कि नीलाम्बर–पीताम्बर आज भी जनमानस के हृदय में जीवित हैं। दूर-दराज से पहुंचे लोग पूरे दिन आयोजन स्थल पर डटे रहे और कार्यक्रम में सक्रिय सहभागिता निभाई।
श्रद्धालुओं का कहना था कि इस तरह के आयोजन नई पीढ़ी को अपने इतिहास से जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।



न्यूज़ देखो: इतिहास से जुड़ाव की मिसाल
जमटिया में आयोजित यह समारोह साबित करता है कि झारखंड का समाज आज भी अपने वीरों को नहीं भूला है। नीलाम्बर–पीताम्बर की जयंती केवल अतीत की स्मृति नहीं, बल्कि वर्तमान और भविष्य के लिए प्रेरणा है। हर खबर पर रहेगी हमारी नजर।
वीरों की विरासत को आगे बढ़ाएं
नीलाम्बर–पीताम्बर जैसे वीरों की शहादत हमें अन्याय के खिलाफ खड़े होने का साहस देती है। उनकी विरासत को जीवित रखना हम सभी की जिम्मेदारी है। इस प्रेरक आयोजन पर अपनी राय साझा करें, खबर को आगे बढ़ाएं और झारखंड की गौरवशाली इतिहास गाथा को नई पीढ़ी तक पहुंचाने में सहभागी बनें।





