#गढ़वा #रक्तदान_मानवता : 172 बटालियन सीआरपीएफ के जवान ने एनीमिया से जूझ रही महिला को दिया एक यूनिट रक्त।
गढ़वा के भवनाथपुर थाना क्षेत्र में एक गर्भवती महिला की जान समय पर रक्त मिलने से बच गई। 172 बटालियन सीआरपीएफ के उपनिरीक्षक जसराम ने मानवता का परिचय देते हुए एक यूनिट रक्तदान किया। चिकित्सकों के अनुसार समय पर रक्त नहीं मिलता तो स्थिति गंभीर हो सकती थी।
- भवनाथपुर थाना क्षेत्र के अर्सली गांव की घटना।
- गर्भवती सीमा देवी को गंभीर एनीमिया, तत्काल रक्त की जरूरत।
- 172 बटालियन सीआरपीएफ गढ़वा के उपनिरीक्षक जसराम ने किया रक्तदान।
- एक यूनिट रक्त मिलने से महिला की स्थिति में सुधार।
- परिजनों ने जवान के मानवीय कदम के प्रति जताया आभार।
गढ़वा जिले के भवनाथपुर थाना क्षेत्र अंतर्गत अर्सली गांव में मानवता की एक प्रेरणादायक मिसाल देखने को मिली। गांव निवासी विजय ठाकुर की पत्नी सीमा देवी, जो गर्भवती थीं, अचानक तबीयत बिगड़ने के बाद एक निजी क्लिनिक में भर्ती कराई गईं। जांच के दौरान चिकित्सकों ने बताया कि उन्हें गंभीर रूप से खून की कमी (एनीमिया) है और तत्काल एक यूनिट रक्त की आवश्यकता है।
रक्त के अभाव में बढ़ी चिंता
चिकित्सकों की सूचना के बाद परिजनों में चिंता बढ़ गई। परिवारजन तत्काल रक्त की व्यवस्था करने में जुट गए, लेकिन समय पर उपयुक्त रक्तदाता मिलना कठिन हो रहा था। महिला की स्थिति लगातार नाजुक बनी हुई थी।
डॉक्टरों ने स्पष्ट किया कि यदि शीघ्र रक्त की व्यवस्था नहीं हुई तो मां और गर्भस्थ शिशु दोनों की जान को खतरा हो सकता है। ऐसे संवेदनशील समय में परिजन काफी परेशान नजर आए।
सीआरपीएफ जवान ने दिखाई तत्परता
इसी बीच मामले की जानकारी 172 बटालियन सीआरपीएफ गढ़वा के कमांडेंट तक पहुंची। सूचना मिलते ही 172 बीएन के उपनिरीक्षक जसराम ने बिना देर किए रक्तदान करने का निर्णय लिया। उन्होंने एक यूनिट रक्त देकर महिला की जान बचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
रक्तदान के तुरंत बाद सीमा देवी को रक्त चढ़ाया गया, जिससे उनकी स्थिति में तेजी से सुधार देखने को मिला। चिकित्सकों ने बताया कि समय पर रक्त मिल जाना उनके लिए जीवनदायी साबित हुआ।
चिकित्सकों के अनुसार, “यदि समय पर रक्त उपलब्ध नहीं होता तो स्थिति अत्यंत गंभीर हो सकती थी।”
परिजनों ने जताया आभार
महिला के पति विजय ठाकुर और अन्य परिजनों ने सीआरपीएफ जवान के इस मानवीय कदम के प्रति गहरा आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि संकट की घड़ी में जवान ने परिवार के लिए देवदूत की भूमिका निभाई।
स्थानीय लोगों ने भी जवान के इस कार्य की सराहना की और इसे मानवता की मिसाल बताया। क्षेत्र में इस घटना की चर्चा हो रही है और लोग इसे प्रेरणादायक उदाहरण के रूप में देख रहे हैं।
रक्तदान के प्रति बढ़ी जागरूकता
यह घटना एक बार फिर साबित करती है कि रक्तदान किसी भी जरूरतमंद के लिए जीवनदान बन सकता है। समय पर रक्त उपलब्ध होने से कई गंभीर परिस्थितियों को टाला जा सकता है। सामाजिक स्तर पर रक्तदान के प्रति जागरूकता बढ़ाने की आवश्यकता पर भी जोर दिया जा रहा है।
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सीआरपीएफ जवान का यह कदम दर्शाता है कि सुरक्षा बल केवल देश की रक्षा ही नहीं करते, बल्कि समाज के प्रति अपनी जिम्मेदारी भी निभाते हैं। संकट की घड़ी में तत्परता और मानवीयता ही सच्ची सेवा की पहचान है। ऐसी पहलें समाज में सकारात्मक संदेश देती हैं।
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रक्तदान महादान, जीवन बचाने का सबसे सरल माध्यम
एक यूनिट रक्त किसी की जिंदगी बदल सकता है।
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रक्तदान से न केवल जीवन बचता है, बल्कि समाज में सहयोग की भावना भी मजबूत होती है।
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