करैत सांप के डंसने से पिता-पुत्र की दर्दनाक मौत, झाड़-फूंक के भरोसे गंवा दी गई जिंदगी

करैत सांप के डंसने से पिता-पुत्र की दर्दनाक मौत, झाड़-फूंक के भरोसे गंवा दी गई जिंदगी

author News देखो Team
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#रांची #सर्पदंश_त्रासदी : समय पर इलाज न मिलने से पिता-पुत्र की मौत हुई।

रांची जिले के अनगड़ा प्रखंड स्थित बैजनाथ टाटा गांव में करैत सांप के डंसने से पिता और पुत्र की दर्दनाक मौत हो गई। देर रात सर्पदंश के बाद परिजनों ने अस्पताल ले जाने के बजाय झाड़-फूंक का सहारा लिया, जिससे उपचार में देरी हो गई। हालत बिगड़ने पर दोनों को रिम्स ले जाया गया, जहां चिकित्सकों ने मृत घोषित कर दिया। घटना ने ग्रामीण क्षेत्रों में सर्पदंश के प्रति जागरूकता और त्वरित चिकित्सा की आवश्यकता को फिर उजागर किया।

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  • अनगड़ा प्रखंड के बैजनाथ टाटा गांव में करैत सांप के डंसने से पिता-पुत्र की मौत।
  • सर्पदंश के बाद अस्पताल ले जाने की बजाय झाड़-फूंक में महत्वपूर्ण समय गंवाया गया।
  • मृतकों की पहचान सुधीर महतो (35 वर्ष) और उनके पुत्र रितेश महतो (10 वर्ष) के रूप में हुई।
  • गंभीर स्थिति में दोनों को रिम्स रांची ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने मृत घोषित कर दिया।
  • स्थानीय जनप्रतिनिधियों ने पीड़ित परिवार को सरकारी मुआवजा देने की मांग की।
  • विशेषज्ञों ने सर्पदंश के मामलों में तत्काल अस्पताल पहुंचने की सलाह दी।

रांची जिले के अनगड़ा प्रखंड से एक बेहद दुखद और चिंताजनक घटना सामने आई है, जहां करैत सांप के डंसने से एक पिता और उनके मासूम पुत्र की मौत हो गई। यह हादसा केवल एक परिवार की त्रासदी नहीं है, बल्कि ग्रामीण क्षेत्रों में सर्पदंश को लेकर फैली जागरूकता की कमी और अंधविश्वास के दुष्परिणामों को भी सामने लाता है। समय पर चिकित्सा सुविधा मिलने की संभावना होने के बावजूद झाड़-फूंक में लगा समय दोनों की जान बचाने में बाधा बन गया।

गर्मी से राहत पाने के लिए फर्श पर सो रहे थे पिता-पुत्र

जानकारी के अनुसार, 35 वर्षीय सुधीर महतो अपने 10 वर्षीय पुत्र रितेश महतो के साथ घर के कच्चे मकान के फर्श पर सो रहे थे। क्षेत्र में पड़ रही गर्मी के कारण दोनों खुले और ठंडे स्थान पर आराम कर रहे थे।

रात करीब एक बजे एक जहरीला करैत सांप कमरे में घुस आया और गहरी नींद में सो रहे पिता-पुत्र को डंस लिया। करैत सांप का जहर अत्यंत घातक माना जाता है और कई बार सर्पदंश के तुरंत बाद दर्द या सूजन महसूस नहीं होती, जिसके कारण पीड़ित खतरे को समझ नहीं पाते।

देर रात दिखा सांप, लेकिन नहीं समझ पाए खतरे की गंभीरता

सर्पदंश के कुछ समय बाद रितेश को उल्टी होने लगी। परिजनों को जब कुछ असामान्य लगा तो उन्होंने कमरे की जांच की। इसी दौरान उन्हें कमरे में सांप दिखाई दिया।

हालांकि, सुधीर महतो और रितेश ने स्वयं को सांप के डंसने की आशंका से इंकार किया। परिजनों ने सांप को मार दिया और यह मानकर कि कोई गंभीर बात नहीं है, सभी वापस सो गए।

यहीं वह समय था जब तत्काल चिकित्सा सहायता मिलने से शायद दोनों की जान बचाई जा सकती थी।

सुबह बिगड़ी तबीयत, झाड़-फूंक में बीत गया कीमती समय

सुबह होने तक पिता-पुत्र की स्थिति लगातार खराब होने लगी। शरीर में कमजोरी, बेचैनी और अन्य गंभीर लक्षण दिखाई देने लगे।

इसके बावजूद परिजन उन्हें तुरंत अस्पताल ले जाने के बजाय झाड़-फूंक कराने में जुट गए। ग्रामीण क्षेत्रों में आज भी कई लोग सर्पदंश जैसी गंभीर परिस्थितियों में वैज्ञानिक उपचार के बजाय पारंपरिक उपायों और अंधविश्वासों पर भरोसा कर लेते हैं।

जब हालत अत्यधिक गंभीर हो गई, तब दोनों को इलाज के लिए रिम्स रांची ले जाया गया। लेकिन तब तक काफी देर हो चुकी थी।

रिम्स में डॉक्टरों ने मृत घोषित किया

रिम्स पहुंचने के बाद चिकित्सकों ने दोनों की जांच की। डॉक्टरों ने पाया कि शरीर में जहर का प्रभाव अत्यधिक बढ़ चुका था।

चिकित्सकीय जांच के बाद दोनों को मृत घोषित कर दिया गया। पोस्टमार्टम की प्रक्रिया पूरी होने के बाद शव परिजनों को सौंप दिए गए।

पिता और पुत्र की एक साथ मौत ने पूरे गांव को स्तब्ध कर दिया। ग्रामीणों के अनुसार परिवार सामान्य जीवन व्यतीत कर रहा था और किसी ने भी ऐसी दुखद घटना की कल्पना नहीं की थी।

परिवार पर टूटा दुखों का पहाड़

घटना के समय सुधीर महतो की पत्नी अपनी बेटी के साथ दूसरे कमरे में सो रही थीं। एक ही रात में पति और बेटे को खो देने से परिवार पूरी तरह टूट गया है।

गांव में मातम का माहौल है और लोग लगातार पीड़ित परिवार के घर पहुंचकर संवेदना व्यक्त कर रहे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि यह घटना पूरे क्षेत्र के लिए एक बड़ी सीख है।

जनप्रतिनिधियों ने मुआवजे की मांग की

घटना की जानकारी मिलने के बाद कई स्थानीय जनप्रतिनिधि पीड़ित परिवार से मिलने पहुंचे।

भाजपा नेता अमरनाथ चौधरी, कांग्रेस नेता छोटेलाल महतो तथा पूर्व मुखिया मधुसूदन मुंडा ने जिला प्रशासन से मांग की है कि पीड़ित परिवार को सरकारी प्रावधानों के तहत चार-चार लाख रुपये का मुआवजा दिया जाए।

उन्होंने कहा कि परिवार पर अचानक आर्थिक और मानसिक संकट आ गया है, ऐसे में प्रशासन को मानवीय दृष्टिकोण अपनाते हुए तत्काल सहायता उपलब्ध करानी चाहिए।

विशेषज्ञों ने दी महत्वपूर्ण सलाह

सर्पदंश के मामलों में विशेषज्ञ लगातार यह सलाह देते हैं कि किसी भी परिस्थिति में झाड़-फूंक या घरेलू उपायों पर निर्भर नहीं होना चाहिए।

विशेषज्ञों का कहना है:

चिकित्सकों के अनुसार, “सर्पदंश होने पर मरीज को तुरंत नजदीकी अस्पताल पहुंचाना चाहिए। समय पर एंटी-वेनम उपचार मिलने से अधिकांश मामलों में जान बचाई जा सकती है।”

उन्होंने यह भी बताया कि करैत जैसे जहरीले सांप के काटने के बाद लक्षण धीरे-धीरे सामने आते हैं, इसलिए मामूली संकेतों को भी नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।

न्यूज़ देखो: जागरूकता की कमी बन रही जानलेवा

रांची की यह घटना केवल एक दुर्घटना नहीं, बल्कि ग्रामीण समाज में स्वास्थ्य संबंधी जागरूकता की कमी का गंभीर उदाहरण है। आज भी कई लोग सर्पदंश जैसी आपात स्थिति में अस्पताल जाने के बजाय झाड़-फूंक का सहारा लेते हैं, जिससे अनमोल समय नष्ट हो जाता है। प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग को गांव-गांव तक सर्पदंश जागरूकता अभियान चलाने की आवश्यकता है। साथ ही यह भी सवाल उठता है कि क्या प्राथमिक स्तर पर पर्याप्त स्वास्थ्य शिक्षा लोगों तक पहुंच रही है। हर खबर पर रहेगी हमारी नजर।

जीवन बचाने वाली जानकारी हर घर तक पहुंचाना जरूरी

सर्पदंश जैसी घटनाएं हमें याद दिलाती हैं कि सही जानकारी और समय पर उपचार जीवन बचा सकते हैं। अंधविश्वास और देरी कई बार अपूरणीय क्षति का कारण बन जाते हैं। परिवार, विद्यालय और समाज को मिलकर स्वास्थ्य जागरूकता बढ़ाने की दिशा में काम करना चाहिए।

यदि आपके आसपास कोई व्यक्ति सर्पदंश का शिकार हो जाए तो उसे तुरंत अस्पताल पहुंचाने में मदद करें। इस महत्वपूर्ण जानकारी को अधिक से अधिक लोगों तक साझा करें, अपनी राय कमेंट में दें और जागरूक समाज निर्माण में अपनी भूमिका निभाएं।

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