#सिमडेगा #आम_सभा : कोचेडेगा में भूमि अधिकार और योजनाओं पर गहन चर्चा।
सिमडेगा के कोचेडेगा बाजार टांड में आयोजित आम सभा में सीएनटी एसपीटी एक्ट, पेसा कानून और आदिवासी योजनाओं में अनियमितताओं पर विस्तार से चर्चा की गई। कार्यक्रम की अध्यक्षता पंकज टोप्पो ने की, जबकि पूर्व शिक्षा मंत्री गीताश्री उरांव और पूर्व मंत्री देवकुमार धन मुख्य रूप से उपस्थित रहे। सभा में भूमि अधिकार, शिक्षा और स्वास्थ्य जैसे मुद्दों पर चिंता जताई गई। सर्वसम्मति से ग्राम सभा गठन कर अवैध बालू उठाव रोकने का निर्णय लिया गया।
- कोचेडेगा बाजार टांड, सिमडेगा में आयोजित हुई आम सभा।
- पंकज टोप्पो की अध्यक्षता, प्रदीप टोप्पो ने किया संचालन।
- मुख्य अतिथि गीताश्री उरांव, विशिष्ट अतिथि देवकुमार धन रहे उपस्थित।
- सीएनटी/एसपीटी एक्ट, पेसा कानून और योजनाओं में अनियमितता पर चर्चा।
- ग्राम सभा गठन कर अवैध बालू उठाव रोकने का निर्णय।
सिमडेगा जिले के कोचेडेगा बाजार टांड में एक महत्वपूर्ण आम सभा का आयोजन किया गया, जिसमें बड़ी संख्या में ग्रामीणों की भागीदारी रही। सभा की अध्यक्षता पंकज टोप्पो ने की और संचालन प्रदीप टोप्पो द्वारा किया गया। कार्यक्रम का समापन एवं धन्यवाद ज्ञापन मुखिया शिशिर टोप्पो ने किया। सभा में भूमि अधिकार, पेसा कानून और आदिवासी योजनाओं से जुड़े मुद्दों पर गहन विचार-विमर्श हुआ।
भूमि अधिकार और कानूनों पर विस्तृत चर्चा
सभा में मुख्य रूप से सीएनटी/एसपीटी एक्ट और पेसा कानून की वर्तमान स्थिति पर चर्चा की गई। वक्ताओं ने कहा कि ये कानून आदिवासी समाज की जमीन और अधिकारों की रक्षा के लिए बनाए गए हैं, लेकिन जमीनी स्तर पर इनके क्रियान्वयन में कई चुनौतियां हैं।
मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित झारखंड राज्य की पूर्व शिक्षा मंत्री गीताश्री उरांव ने अपने संबोधन में समाज की एकता और जागरूकता पर जोर दिया।
गीताश्री उरांव ने कहा: “हमारे पुरखे भले ही पढ़े-लिखे नहीं थे, फिर भी उन्होंने संगठित होकर शोषण, अत्याचार और जमीन लूट के खिलाफ अंग्रेजों से लोहा लिया। आज का युवा वर्ग नशे की गिरफ्त में जा रहा है, हमारी भाषा और संस्कृति धीरे-धीरे खत्म होती जा रही है। कल्याण विभाग की आदिवासी योजनाओं में हो रही लूट के खिलाफ हम सबको एकजुट होकर संघर्ष करना होगा।”
उन्होंने शिक्षा और स्वास्थ्य के क्षेत्र में सुधार की आवश्यकता पर भी बल दिया।
सीएनटी एक्ट को बताया सुरक्षा कवच
विशिष्ट अतिथि के रूप में मौजूद बिहार सरकार के पूर्व मंत्री देवकुमार धन ने कहा कि सीएनटी एक्ट आदिवासी समाज का सुरक्षा कवच है और इसे कमजोर करने की किसी भी कोशिश का विरोध होना चाहिए।
देवकुमार धन ने कहा: “सीएनटी एक्ट आदिवासी समाज का सुरक्षा कवच है। आदिवासियों की जमीन किसी भी गैर-आदिवासी को नहीं दी जा सकती। आज आदिवासियों की पहनाई जमीन एवं रैयती जमीनें लगातार छीनी जा रही हैं। ऐसी सभी जमीनों को चिन्हित कर वापस दिलाने की आवश्यकता है। पेसा कानून हमारे समाज को मजबूत करता है।”
उन्होंने कहा कि पेसा कानून को प्रभावी ढंग से लागू करने के लिए गंभीर प्रयास की जरूरत है।
अवैध बालू उठाव पर सख्त रुख
सभा में सर्वसम्मति से निर्णय लिया गया कि शीघ्र ही ग्राम सभा का गठन कर क्षेत्र में हो रहे अवैध बालू उठाव पर रोक लगाई जाएगी। ग्रामीणों ने कहा कि प्राकृतिक संसाधनों की लूट से पर्यावरण और स्थानीय आजीविका दोनों प्रभावित हो रहे हैं।
ग्राम सभा के माध्यम से निगरानी तंत्र मजबूत करने और प्रशासन को ज्ञापन सौंपने की भी बात कही गई।
बड़ी संख्या में ग्रामीणों की भागीदारी
सभा में नूतन कुल्लू, लक्ष्मण बड़ाइक, जेम्स डुंगडुंग, प्रभा कुजूर, बेलस टोप्पो, संदीप प्रधान, हानुक टोप्पो, सुकरा सिंह, शुशीला बाड़ा, अंजीर टेटे, निर्मला बाड़ा, सरिता डुंगडुंग, मेरी कुल्लू, समीर लकड़ा, पूनम खड़िया, किशोर मांझी, भूषण बेक, सिसिलिया बाड़ा, मंजूला बिलुंग, बिरसा पहान, रेजिना डुंगडुंग, उषा डुंगडुंग सहित बड़ी संख्या में महिला-पुरुष ग्रामीण उपस्थित थे।
ग्रामीणों ने अपनी समस्याएं मंत्रियों के समक्ष रखीं और समाधान की मांग की। शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार और भूमि विवाद जैसे मुद्दे प्रमुख रूप से उठाए गए।
न्यूज़ देखो: जागरूकता से ही मजबूत होगा समाज
कोचेडेगा की यह आम सभा दर्शाती है कि ग्रामीण स्तर पर कानूनों और अधिकारों को लेकर जागरूकता बढ़ रही है। सीएनटी/एसपीटी एक्ट और पेसा कानून जैसे प्रावधान तभी प्रभावी होंगे जब समाज संगठित होकर इनके पालन की मांग करेगा। अब यह देखना होगा कि ग्राम सभा गठन और अवैध बालू उठाव पर रोक के निर्णय को जमीन पर कैसे उतारा जाता है।
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अपने अधिकार जानें और संगठित रहें
भूमि, जल और जंगल से जुड़े अधिकार केवल कागजों तक सीमित न रहें, इसके लिए सामूहिक प्रयास जरूरी है। ग्राम सभा और सामाजिक एकजुटता ही वास्तविक ताकत है।
युवाओं को नशामुक्ति, शिक्षा और संस्कृति संरक्षण की दिशा में आगे आना होगा। कानून की जानकारी ही शोषण के खिलाफ सबसे बड़ा हथियार है।