
#बरवाडीह #पेसा_कानून : ग्राम सभा की सशक्त भूमिका पर जोर—कोयल नदी तट पर सामूहिक आयोजन के साथ खुशी का इजहार
- सैदुप ग्राम सभा द्वारा पेसा कानून लागू होने पर मिलन समारोह एवं वार्षिक वनभोज का आयोजन।
- यूथ कांग्रेस प्रदेश समन्वयक विजय बहादुर रहे मुख्य अतिथि, कई जनप्रतिनिधि व सामाजिक कार्यकर्ता रहे उपस्थित।
- अतिथियों का पारंपरिक पांव धुलाई कर स्वागत, अंगवस्त्र भेंट कर किया गया सम्मान।
- ग्राम सभा ने झारखंड सरकार का आभार जताते हुए पेसा कानून को ऐतिहासिक कदम बताया।
- वक्ताओं ने कहा— ग्राम सभा होगी विकास की धुरी, गांव तय करेंगे अपने विकास की दिशा।
बरवाडीह प्रखंड के मोरवाई कलां पंचायत अंतर्गत सैदुप ग्राम सभा की ओर से झारखंड में पेसा कानून लागू होने की खुशी में भव्य मिलन समारोह एवं वार्षिक वनभोज का आयोजन किया गया। इस अवसर पर ग्राम सभा परिसर में उत्सव जैसा माहौल देखने को मिला, जहां बड़ी संख्या में ग्रामीण, जनप्रतिनिधि और सामाजिक कार्यकर्ता शामिल हुए। आयोजन का मुख्य उद्देश्य पेसा कानून के लागू होने को लेकर ग्रामीणों में जागरूकता फैलाना, सरकार के प्रति आभार व्यक्त करना और ग्राम सभा की एकजुटता को मजबूत करना रहा।
पारंपरिक स्वागत के साथ हुआ समारोह का शुभारंभ
कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में यूथ कांग्रेस के प्रदेश समन्वयक विजय बहादुर उपस्थित रहे। उनके साथ विधायक प्रतिनिधि प्रेम सिंह पिंटू, माले नेता बिरजू राम, बी. एन. सिंह, अपना अधिकार– अपना सम्मान मंच के संस्थापक शशि शेखर, बीस सूत्री उपाध्यक्ष रंजीत राजू सहित कई गणमान्य अतिथि मंच पर मौजूद थे। आयोजन समिति की ओर से सभी अतिथियों का पारंपरिक रीति-रिवाजों के अनुसार पांव धुलाई कर स्वागत किया गया तथा उन्हें अंगवस्त्र भेंट कर सम्मानित किया गया।
कोयल नदी तट पर सामूहिक वनभोज
सम्मान समारोह के बाद अतिथियों एवं ग्रामीणों ने संयुक्त रूप से कोयल नदी तट पर आयोजित वार्षिक वनभोज का आनंद लिया। इस दौरान ग्रामीणों में खासा उत्साह देखने को मिला। पारंपरिक व्यंजनों के साथ आत्मीय संवाद और सामूहिक सहभागिता ने आयोजन को यादगार बना दिया। ग्रामीणों ने कहा कि ऐसे आयोजन समाज में भाईचारा, आपसी समझ और सामूहिकता को मजबूत करते हैं।
ग्राम सभा की सशक्त भूमिका पर जोर
मिलन समारोह को संबोधित करते हुए मुख्य अतिथि विजय बहादुर ने कहा कि झारखंड सरकार द्वारा पेसा कानून लागू करना आदिवासी और ग्रामीण समाज के लिए एक ऐतिहासिक कदम है। उन्होंने कहा—
“पेसा कानून लागू होने से ग्राम सभा को वास्तविक अधिकार मिले हैं। अब गांव अपने विकास की दिशा और दशा स्वयं तय कर सकेंगे। लोकतंत्र की आत्मा ग्राम सभा में बसती है और यह कानून उसी आत्मा को मजबूत करता है।”
उन्होंने आगे कहा कि ग्राम सभा के माध्यम से अब विकास योजनाओं, निर्माण कार्यों और स्थानीय संसाधनों के उपयोग पर निर्णय लिया जाएगा, जिससे गांवों का सर्वांगीण विकास संभव हो सकेगा।
गांव ही विकास की असली इकाई
माले नेता बिरजू राम ने अपने संबोधन में कहा कि देश के विकास में गांवों की भूमिका सबसे अहम है। उन्होंने कहा—
“ग्राम सभा गांव की सबसे महत्वपूर्ण इकाई है। पेसा कानून के माध्यम से ग्राम सभा को मजबूत करने का सरकार का निर्णय स्वागत योग्य है। इससे ग्रामीणों को अपने अधिकारों की रक्षा करने और अपने संसाधनों पर नियंत्रण रखने का अवसर मिलेगा।”
उन्होंने ग्रामीणों से आह्वान किया कि वे ग्राम सभा की बैठकों में सक्रिय भागीदारी करें और अपने अधिकारों के प्रति सजग रहें।
सरकार के प्रति जताया आभार
समारोह के दौरान सैदुप ग्राम सभा की ओर से सर्वसम्मति से झारखंड सरकार के प्रति आभार व्यक्त किया गया। ग्रामीणों ने कहा कि लंबे समय से पेसा कानून की मांग की जा रही थी, जो अब पूरी हुई है। इससे आदिवासी समाज की परंपराओं, स्वशासन और सांस्कृतिक पहचान को मजबूती मिलेगी।
अध्यक्षता और सहभागिता
कार्यक्रम की अध्यक्षता फ्रारिस गुड़िया ने की। आयोजन को सफल बनाने में ग्राम सभा के सदस्यों और ग्रामीणों की सक्रिय भूमिका रही। इस अवसर पर आशुतोष सिंह चेरो, केदार सिंह, सिलाश गुड़िया, हलदर महतो, राजेंद्र सिंह खरवार, सुरेंद्र सिंह चेरो, सुनील उरांव, बाबूलाल सिंह, बिजेंद्र पासवान, दीपक सिंह, महेंद्र पासवान सहित बड़ी संख्या में महिला-पुरुष एवं युवा उपस्थित थे।
न्यूज़ देखो: ग्राम स्वशासन की ओर मजबूत कदम
पेसा कानून का लागू होना झारखंड के आदिवासी और ग्रामीण इलाकों में स्वशासन की दिशा में बड़ा बदलाव है। इससे ग्राम सभा को न केवल संवैधानिक ताकत मिलेगी, बल्कि विकास की योजनाएं भी जमीनी जरूरतों के अनुरूप बन सकेंगी। बरवाडीह का यह आयोजन दर्शाता है कि ग्रामीण समाज इस कानून को लेकर जागरूक है और इसे अपने भविष्य के लिए सकारात्मक कदम मान रहा है। हर खबर पर रहेगी हमारी नजर।
ग्राम सभा की शक्ति से बनेगा मजबूत झारखंड
पेसा कानून केवल एक कानून नहीं, बल्कि गांवों को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में एक नई शुरुआत है।
ग्रामीणों से अपील है कि वे ग्राम सभा को मजबूत बनाएं, बैठकों में भाग लें और अपने अधिकारों को समझें।
सशक्त ग्राम सभा ही सशक्त झारखंड की नींव रखेगी।
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