
#मेदिनीनगर #सनातन_आस्था : परशुराम सेना भार्गव के आयोजन में हजारों श्रद्धालुओं की सहभागिता से नगर भक्तिमय हुआ।
पलामू जिला मुख्यालय मेदिनीनगर में परशुराम सेना भार्गव के तत्वावधान में भगवान श्री परशुराम की भव्य प्रतिमा के साथ विशाल नगर भ्रमण का आयोजन किया गया। इस धार्मिक शोभायात्रा में हजारों सनातनी श्रद्धालुओं ने गाजे-बाजे, जयघोष और मोटरसाइकिल रैली के साथ सहभागिता की। नगर भ्रमण सिंगरा से प्रारंभ होकर प्रमुख चौक-चौराहों से होते हुए नवनिर्मित भगवान श्री परशुराम मंदिर तक पहुंचा। आयोजन का उद्देश्य सनातन संस्कृति का संरक्षण, सामाजिक एकता और धार्मिक चेतना को सशक्त करना रहा।
- परशुराम सेना भार्गव के तत्वावधान में भव्य नगर भ्रमण का आयोजन।
- हजारों सनातनी श्रद्धालु, सैकड़ों मोटरसाइकिलों के साथ शामिल।
- सिंगरा से नवनिर्मित परशुराम मंदिर तक शोभायात्रा निकाली गई।
- 2 से 6 फरवरी तक 12 कुंडीय महायज्ञ का आयोजन घोषित।
- प्राण-प्रतिष्ठा वैदिक मंत्रोच्चार के साथ अंतिम दिन होगी।
पलामू जिला मुख्यालय मेदिनीनगर गुरुवार को सनातन आस्था और धार्मिक उल्लास के अद्भुत रंग में रंगा नजर आया, जब भगवान श्री परशुराम की भव्य प्रतिमा के साथ गाजे-बाजे एवं जयकारों के बीच विशाल नगर भ्रमण निकाला गया। इस ऐतिहासिक आयोजन ने न केवल धार्मिक वातावरण का निर्माण किया, बल्कि शहर के हर वर्ग को आस्था और संस्कृति की डोर में बांध दिया।
सिंगरा से शुरू हुआ भव्य नगर भ्रमण
नगर भ्रमण की शुरुआत नगर निगम क्षेत्र के सिंगरा से हुई। इसके पश्चात शोभायात्रा बिसफुटा, पुलिस लाइन, साहित्य समाज चौक, छः मुहान, कचहरी चौक, रेड़मा ओवरब्रिज होते हुए रांची रोड स्थित ठाकुरबाड़ी पहुंची और अंततः नवनिर्मित भगवान श्री परशुराम मंदिर में जाकर संपन्न हुई।
पूरे मार्ग में “जय परशुराम”, “सनातन धर्म की जय” जैसे जयघोष गूंजते रहे। श्रद्धालुओं ने जगह-जगह पुष्पवर्षा कर शोभायात्रा का स्वागत किया, जिससे नगर पूरी तरह भक्तिमय वातावरण में सराबोर हो गया।
मोटरसाइकिल रैली और गाजे-बाजे ने बढ़ाया आकर्षण
इस नगर भ्रमण की विशेषता रही सैकड़ों मोटरसाइकिलों की रैली, जिसमें युवाओं से लेकर बुजुर्गों तक की उत्साहपूर्ण भागीदारी देखने को मिली। ढोल-नगाड़ों, शंखनाद और धार्मिक नारों के बीच चल रही शोभायात्रा शहरवासियों के लिए आकर्षण का केंद्र बनी रही। बच्चे, महिलाएं और बुजुर्ग सभी श्रद्धा और उत्साह के साथ इस ऐतिहासिक पल के साक्षी बने।
मंदिर परिसर में हवन-पूजन की शुरुआत
नगर भ्रमण के समापन के बाद भगवान श्री परशुराम मंदिर परिसर में विधिवत हवन-पूजन का आयोजन किया गया। आयोजकों ने जानकारी दी कि 2 फरवरी से 6 फरवरी तक 12 कुंडीय महायज्ञ आयोजित किया जा रहा है। महायज्ञ के अंतिम दिन भगवान श्री परशुराम की प्रतिमा की वैदिक मंत्रोच्चार के साथ विधि-विधान से प्राण-प्रतिष्ठा की जाएगी।
इस महायज्ञ को लेकर श्रद्धालुओं में विशेष उत्साह देखा जा रहा है और आसपास के क्षेत्रों से भी बड़ी संख्या में लोगों के पहुंचने की संभावना जताई जा रही है।
आयोजकों और वक्ताओं ने रखे विचार
इस अवसर पर भार्गव सेना के संरक्षक कमलेश शुक्ला ने कहा:
कमलेश शुक्ला ने कहा: “भगवान श्री परशुराम सनातन धर्म के महान योद्धा और धर्म रक्षक हैं। उनका जीवन अन्याय के विरुद्ध संघर्ष, सत्य और धर्म की रक्षा का प्रेरणादायी संदेश देता है। ऐसे आयोजन समाज में संस्कार, एकता और सनातन संस्कृति को मजबूत करते हैं।”
अन्य वक्ताओं ने भी कहा कि परशुराम सेना भार्गव का उद्देश्य सनातन संस्कृति का संरक्षण, धार्मिक चेतना का प्रसार और सामाजिक समरसता को बढ़ावा देना है। इस प्रकार के आयोजनों से युवा पीढ़ी को अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जोड़ने का कार्य होता है।
बड़ी संख्या में पदाधिकारी और श्रद्धालु रहे मौजूद
नगर भ्रमण में संरक्षक कमलेश शुक्ला के अलावा मुकेश तिवारी, अजय तिवारी, सुनील तिवारी, प्रदेश पर्यवेक्षक अभिषेक तिवारी, जिला अध्यक्ष मधुकर शुक्ला, कोषाध्यक्ष अंकित पांडे, अप्पू तिवारी, मनीष पांडे, मृत्युंजय तिवारी, मीडिया प्रभारी नितेश तिवारी, रूपेश तिवारी, आशुतोश तिवारी, संजीत पांडे, काजू शुक्ला, चंचल तिवारी, सनातनी धर्मरक्षक अर्जुन पांडे, विभाकर पांडे, बलराम पांडे, बसंत तिवारी, मनि तिवारी, प्रिंस शुक्ला, सुशील तिवारी, अंकित शुक्ला, रुद्र शुक्ला सहित हजारों की संख्या में सनातनी भक्त उपस्थित रहे।
सुरक्षा और व्यवस्था रही चाक-चौबंद
आयोजन के दौरान सुरक्षा और यातायात व्यवस्था को लेकर स्वयंसेवकों की तैनाती की गई थी। वहीं पूरे नगर भ्रमण को शांतिपूर्ण और अनुशासित ढंग से संपन्न कराने में पुलिस प्रशासन का भी भरपूर सहयोग रहा। किसी भी प्रकार की अव्यवस्था या अप्रिय घटना की सूचना नहीं मिली।
न्यूज़ देखो: सनातन चेतना का सशक्त सार्वजनिक प्रदर्शन
मेदिनीनगर में आयोजित यह नगर भ्रमण केवल धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि सांस्कृतिक पहचान और सामाजिक एकता का सार्वजनिक प्रदर्शन भी है। जिस तरह से शांतिपूर्ण और अनुशासित तरीके से हजारों लोग एकत्र हुए, वह समाज में धार्मिक समरसता का सकारात्मक संकेत देता है। प्रशासन और आयोजकों के समन्वय ने आयोजन को सफल बनाया। हर खबर पर रहेगी हमारी नजर।
संस्कृति से जुड़ाव ही समाज की ताकत
धार्मिक और सांस्कृतिक आयोजन समाज को अपनी जड़ों से जोड़ते हैं और सकारात्मक ऊर्जा का संचार करते हैं। ऐसे आयोजनों में सहभागिता कर हम अपनी परंपराओं को जीवित रख सकते हैं।
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