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रौतिया समाज की एकता और सामाजिक सुधार के संकल्प के साथ तुरबुंगा शिव मंदिर में विराट सम्मेलन आयोजित

#कोलेबिरा #सामाजिक_सम्मेलन : तुरबुंगा शिव मंदिर परिसर में रौतिया समाज ने संगठन और संस्कृति संरक्षण पर किया विचार।

सिमडेगा जिले के कोलेबिरा प्रखंड स्थित तुरबुंगा शिव मंदिर परिसर में रौतिया ससिया मांदि समिति के तत्वावधान में विराट रौतिया सामाजिक सुधार सम्मेलन आयोजित किया गया। कार्यक्रम में अखिल भारतीय रौतिया विकास परिषद के प्रदेश अध्यक्ष रोहित सिंह सहित कई समाजसेवी और पदाधिकारी शामिल हुए। सम्मेलन में सामाजिक एकता, शिक्षा, सांस्कृतिक परंपराओं के संरक्षण और समाज के संगठन को मजबूत बनाने पर चर्चा की गई। वक्ताओं ने समाज के अधिकारों और विकास के लिए संगठित प्रयासों की आवश्यकता पर बल दिया।

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  • तुरबुंगा शिव मंदिर परिसर, कोलेबिरा में रौतिया ससिया मांदि समिति द्वारा विराट सामाजिक सुधार सम्मेलन आयोजित।
  • मुख्य अतिथि अखिल भारतीय रौतिया विकास परिषद के प्रदेश अध्यक्ष रोहित सिंह ने समाज की एकता पर दिया जोर।
  • सम्मेलन की शुरुआत मुख्य पुजारी बालमुकुंद सिंह के नेतृत्व में सामूहिक हनुमान चालीसा पाठ से हुई।
  • कार्यक्रम में कामेश्वर सिंह (सहादुर), हफिंदर सिंह, टकबर सिंह, भवानी सिंह सहित समाज के कई प्रतिनिधि उपस्थित।
  • सामाजिक संगठन, शिक्षा, संस्कृति संरक्षण और अधिकारों की आवाज बुलंद करने पर विस्तृत चर्चा।
  • कार्यक्रम में सैकड़ों की संख्या में रौतिया समाज के महिला-पुरुष और युवाओं की भागीदारी रही।

सिमडेगा जिले के कोलेबिरा प्रखंड अंतर्गत तुरबुंगा स्थित शिव मंदिर के पावन धारा धाम में रौतिया समाज के लोगों का एक महत्वपूर्ण सामाजिक सम्मेलन आयोजित किया गया। रौतिया ससिया मांदि समिति के तत्वावधान में आयोजित इस विराट रौतिया सामाजिक सुधार सम्मेलन में समाज के विभिन्न क्षेत्रों से आए प्रतिनिधियों ने भाग लिया। सम्मेलन का उद्देश्य समाज को नई दिशा देना, सामाजिक व्यवस्था को मजबूत बनाना और सांस्कृतिक परंपराओं को सुरक्षित रखने के लिए सामूहिक रणनीति तैयार करना था। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में महिला और पुरुषों की उपस्थिति ने समाज की एकजुटता का परिचय दिया।

सामूहिक हनुमान चालीसा पाठ से कार्यक्रम की शुरुआत

कार्यक्रम का शुभारंभ तुरबुंगा मंदिर के मुख्य पुजारी बालमुकुंद सिंह के नेतृत्व में सामूहिक हनुमान चालीसा पाठ के साथ किया गया। इस अवसर पर उपस्थित सभी लोगों ने भगवान श्री हनुमान से समाज के कल्याण और सही मार्गदर्शन की प्रार्थना की।

कार्यक्रम की शुरुआत में तुरबुंगा रौतिया महिला समूह द्वारा स्वागत गीत प्रस्तुत किया गया, जिसने पूरे वातावरण को भक्ति और उत्साह से भर दिया। इसके बाद मंचासीन अतिथियों का फूलमाला, गुलदस्ता और अंगवस्त्र भेंट कर सम्मान किया गया।

समाज की एकता और संगठन पर दिया गया जोर

सम्मेलन को संबोधित करते हुए अखिल भारतीय रौतिया विकास परिषद के प्रदेश अध्यक्ष रोहित सिंह ने समाज की एकता और संगठन को मजबूत करने की आवश्यकता पर विशेष जोर दिया। उन्होंने कहा कि समाज के लोग हर सुख-दुख की घड़ी में एक-दूसरे का साथ दें और शिक्षा को प्राथमिकता दें।

रोहित सिंह ने कहा:
“रौतिया समाज के लोगों को संगठित होकर अपने अधिकारों के लिए आवाज उठानी होगी। शिक्षा और एकता ही समाज को आगे बढ़ाने का सबसे मजबूत आधार है।”

उन्होंने कहा कि किसी भी समाज की पहचान उसकी संस्कृति और परंपराओं से होती है। इसलिए समाज के लोगों को अपनी परंपराओं को सुरक्षित रखना चाहिए ताकि आने वाली पीढ़ियां भी अपनी जड़ों को समझ सकें।

सामाजिक चुनौतियों और अधिकारों पर चर्चा

रोहित सिंह ने कहा कि रौतिया समाज के अधिकांश लोग जंगल, पहाड़ और सुदूर क्षेत्रों में निवास करते हैं, जिसके कारण उनकी समस्याएं अक्सर सरकार तक नहीं पहुंच पाती हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि समाज की जमीन को दलालों और बिचौलियों द्वारा नुकसान पहुंचाने की कोशिश की जाती है।

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रोहित सिंह ने कहा:
“समाज के लोगों द्वारा कई बार आवेदन और मांग पत्र दिए गए, लेकिन अब तक उचित सुनवाई नहीं हुई है। यह स्थिति चिंता का विषय है और इसके समाधान के लिए समाज को एकजुट होकर प्रयास करना होगा।”

उन्होंने यह भी कहा कि यदि समाज संगठित होकर अपनी आवाज बुलंद करेगा तो सरकार तक उसकी मांगें मजबूती से पहुंचेंगी।

सकारात्मक बदलाव और आत्मनिर्भरता की जरूरत

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए विशिष्ट अतिथि कामेश्वर सिंह (सहादुर) ने समाज के विकास के लिए सकारात्मक बदलाव की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि समाज को अपनी चुनौतियों का समाधान स्वयं ढूंढना होगा और इसके लिए हर व्यक्ति की भूमिका महत्वपूर्ण है।

कामेश्वर सिंह (सहादुर) ने कहा:
“हमारा समाज वर्षों से संगठित रहा है, लेकिन आज भी कई सामाजिक चुनौतियां मौजूद हैं। आत्मनिर्भर बनने के लिए हमें अपने समाज में सकारात्मक परिवर्तन लाना होगा।”

उन्होंने समाज के लोगों से आपसी प्रेम, सहयोग और भाईचारा बनाए रखने का आह्वान किया और कहा कि यदि समाज की स्थिति को बेहतर बनाना है तो सभी को मिलकर प्रयास करना होगा।

पदाधिकारियों ने निभाई महत्वपूर्ण भूमिका

कार्यक्रम में समाज के अध्यक्ष मदन सिंह ने स्वागत भाषण दिया और सम्मेलन के उद्देश्य पर प्रकाश डाला। मंच संचालन उप सचिव भूपेश्वर सिंह ने किया, जबकि धन्यवाद ज्ञापन सचिव करमपाल सिंह ने प्रस्तुत किया।

इस अवसर पर समाज के कई वरिष्ठ सदस्य और पदाधिकारी मौजूद रहे। इनमें बालमुकुंद सिंह, अजमर सिंह, जयंती देवी, विमला देवी, रविंद्र सिंह, सुनेश्वर सिंह, हफिंदर सिंह, गणेश सिंह, मदन सिंह, बालेश्वर सिंह, करमपाल सिंह, भूपेश्वर सिंह, नवीन सिंह, रविंद्र सिंह, मोहन सिंह, अजमर सिंह, लालधर सिंह, भोला सिंह, अमीन सिंह, दिगम्बर सिंह, रामविलास सिंह, जयप्रकाश सिंह, रमेश सिंह, अल्पनाथ सिंह, रामचरण सिंह, गुरूदयाल सिंह, शंभू सिंह, शोभनाथ सिंह, टकबर सिंह, चयन सिंह, अमरनाथ सिंह, रतन सिंह, मोहन सिंह, भवानी सिंह, बालेश्वर सिंह, कामेश्वर सिंह, अशोक सिंह, रवि सिंह, रामजीत सिंह, बहुरा सिंह, पार्वती देवी, कमला देवी, चिंतामणि सिंह सहित कई अन्य लोग उपस्थित रहे।

सम्मेलन में सैकड़ों की संख्या में रौतिया समाज के लोगों की भागीदारी रही, जिससे कार्यक्रम का महत्व और प्रभाव और अधिक बढ़ गया।

न्यूज़ देखो: समाज के संगठन और पहचान की दिशा में महत्वपूर्ण पहल

तुरबुंगा में आयोजित यह सम्मेलन केवल एक सामाजिक कार्यक्रम नहीं बल्कि समाज की एकजुटता और पहचान को मजबूत करने का प्रयास भी है। जब समाज के लोग अपने मुद्दों, अधिकारों और भविष्य की दिशा पर खुलकर चर्चा करते हैं तो यह सामाजिक जागरूकता का संकेत होता है।

ऐसे आयोजनों से समाज के भीतर संवाद बढ़ता है और नई पीढ़ी को अपनी संस्कृति और जिम्मेदारियों के प्रति जागरूक होने का अवसर मिलता है। अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि सम्मेलन में उठाए गए मुद्दों और सुझावों को आगे किस प्रकार क्रियान्वित किया जाता है।

हर खबर पर रहेगी हमारी नजर।

समाज की शक्ति है एकता और जागरूकता

किसी भी समाज की मजबूती उसकी एकता, जागरूकता और सकारात्मक सोच में छिपी होती है। जब लोग मिलकर अपनी समस्याओं और भविष्य की दिशा पर चर्चा करते हैं तो बदलाव की नई राह बनती है।

समाज के विकास में हर व्यक्ति की भूमिका महत्वपूर्ण होती है। शिक्षा, संगठन और सहयोग के माध्यम से ही समाज आगे बढ़ सकता है।

यदि ऐसे सम्मेलन समाज को जागरूक और संगठित बनाते हैं तो यह निश्चित रूप से आने वाली पीढ़ियों के लिए एक मजबूत आधार तैयार करेगा।

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Birendra Tiwari

सिमडेगा

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