परशुराम सेना भार्गव का भव्य मिलन समारोह सह वनभोज संपन्न, श्री परशुराम मंदिर में प्राण-प्रतिष्ठा की रूपरेखा तय

परशुराम सेना भार्गव का भव्य मिलन समारोह सह वनभोज संपन्न, श्री परशुराम मंदिर में प्राण-प्रतिष्ठा की रूपरेखा तय

author Tirthraj Dubey
1 Views Download E-Paper (0)
#मेदिनीनगर #धार्मिक_आयोजन : नव-निर्मित श्री परशुराम मंदिर परिसर में हजारों श्रद्धालुओं की सहभागिता।

मेदिनीनगर शहर के रांची रोड स्थित रेड़मा क्षेत्र के मथुराबाड़ी में नव-निर्मित भगवान श्री परशुराम मंदिर परिसर में परशुराम सेना भार्गव के तत्वावधान में भव्य मिलन समारोह सह वनभोज का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में पलामू प्रमंडल के विभिन्न जिलों से बड़ी संख्या में सनातनी श्रद्धालु, सामाजिक कार्यकर्ता और संगठन से जुड़े लोग शामिल हुए। इस दौरान आगामी श्री परशुराम प्राण-प्रतिष्ठा कार्यक्रम की रूपरेखा तय की गई और धार्मिक अनुष्ठानों की तिथियां घोषित की गईं। आयोजन ने धार्मिक आस्था के साथ सामाजिक समरसता और सांस्कृतिक चेतना को भी मजबूती प्रदान की।

Join WhatsApp
  • मेदिनीनगर के मथुराबाड़ी स्थित नव-निर्मित श्री परशुराम मंदिर में आयोजन।
  • परशुराम सेना भार्गव के तत्वावधान में मिलन समारोह सह वनभोज।
  • 15 जनवरी को नगर भ्रमण व हनुमंत पूजा का निर्णय।
  • 2 फरवरी से श्री परशुराम प्राण-प्रतिष्ठा कार्यक्रम की शुरुआत।
  • कार्यक्रम प्रभारी की जिम्मेदारी दिलीप तिवारी ‘मंटू’ को सौंपी गई।
  • पलामू प्रमंडल के विभिन्न जिलों से हजारों श्रद्धालुओं की सहभागिता

मेदिनीनगर शहर के रांची रोड स्थित रेड़मा क्षेत्र के मथुराबाड़ी में स्थित नव-निर्मित भगवान श्री परशुराम मंदिर परिसर शनिवार को धार्मिक और सामाजिक गतिविधियों का केंद्र बना रहा। परशुराम सेना भार्गव के तत्वावधान में आयोजित मिलन समारोह सह वनभोज कार्यक्रम में सनातन संस्कृति, धार्मिक आस्था और सामाजिक एकता का अद्भुत संगम देखने को मिला। पलामू प्रमंडल के विभिन्न जिलों से आए श्रद्धालुओं, सामाजिक कार्यकर्ताओं और संगठन के पदाधिकारियों ने पूरे दिन कार्यक्रम में सक्रिय सहभागिता निभाई।

कार्यक्रम की शुरुआत भगवान श्री परशुराम की विधिवत पूजा-अर्चना एवं वैदिक मंत्रोच्चार के साथ की गई। मंदिर परिसर में भक्तिमय वातावरण व्याप्त रहा। इसके बाद संगठन के वरिष्ठ पदाधिकारियों और संरक्षकों ने अपने विचार साझा करते हुए सनातन संस्कृति के संरक्षण, सामाजिक समरसता और संगठन की भूमिका पर विस्तार से प्रकाश डाला।

सनातन संस्कृति और श्री परशुराम के आदर्श

वक्ताओं ने अपने संबोधन में कहा कि भगवान श्री परशुराम केवल शस्त्र और शास्त्र के ज्ञाता ही नहीं थे, बल्कि वे न्याय, धर्म और सामाजिक संतुलन के प्रतीक भी हैं। उनका जीवन अन्याय के विरुद्ध संघर्ष, धर्म की रक्षा और समाज में संतुलन स्थापित करने का संदेश देता है। वक्ताओं ने युवाओं से श्री परशुराम के आदर्शों को आत्मसात कर समाज निर्माण में सकारात्मक भूमिका निभाने की अपील की।

प्राण-प्रतिष्ठा कार्यक्रम की विस्तृत रूपरेखा

मिलन समारोह के दौरान आगामी श्री परशुराम प्राण-प्रतिष्ठा कार्यक्रम को लेकर विस्तृत चर्चा की गई। आयोजन समिति ने जानकारी दी कि प्राण-प्रतिष्ठा कार्यक्रम कई चरणों में संपन्न कराया जाएगा।
समिति के अनुसार 15 जनवरी को नगर भ्रमण का आयोजन किया जाएगा, जिसमें भगवान श्री परशुराम की भव्य शोभायात्रा निकाली जाएगी। नगर भ्रमण के पश्चात हनुमंत पूजा का आयोजन किया जाएगा, जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के शामिल होने की संभावना है।

आयोजन समिति ने यह भी बताया कि 2 फरवरी से भगवान श्री परशुराम की विधिवत प्राण-प्रतिष्ठा की शुरुआत होगी। इस संपूर्ण कार्यक्रम की जिम्मेदारी कार्यक्रम प्रभारी दिलीप तिवारी ‘मंटू’ को सौंपी गई है।

कार्यक्रम प्रभारी का आह्वान

कार्यक्रम प्रभारी दिलीप तिवारी ‘मंटू’ ने कहा:

“यह हम सभी के लिए गौरव का विषय है कि भगवान श्री परशुराम की प्राण-प्रतिष्ठा का आयोजन हो रहा है। समस्त सनातन समाज से आग्रह है कि बढ़-चढ़कर भाग लें और इस कार्यक्रम को ऐतिहासिक बनाएं।”

उन्होंने कहा कि समिति के साथ-साथ समाज के प्रत्येक व्यक्ति का सहयोग आवश्यक है, ताकि आयोजन भव्य और स्मरणीय बन सके।

कलश यात्रा और यज्ञ का आयोजन

प्राण-प्रतिष्ठा के अवसर पर सुबह कलश यात्रा का आयोजन किया जाएगा, जिसमें सैकड़ों महिलाएं और श्रद्धालु सिर पर कलश लेकर भाग लेंगे। इसके बाद वैदिक विधि-विधान से प्राण-प्रतिष्ठा एवं यज्ञ संपन्न कराया जाएगा। यह संपूर्ण धार्मिक अनुष्ठान श्री-श्री जीयर स्वामी के सानिध्य में संपन्न होगा, जिनकी उपस्थिति से कार्यक्रम की गरिमा और आध्यात्मिक महत्व और अधिक बढ़ेगा।

मंदिर विकास और सौंदर्यीकरण पर चर्चा

बैठक के दौरान मंदिर के विकास, सौंदर्यीकरण और श्रद्धालुओं की सुविधाओं को लेकर भी गंभीर चर्चा हुई। वक्ताओं ने कहा कि यह मंदिर केवल पूजा स्थल नहीं, बल्कि सामाजिक एकता और सांस्कृतिक चेतना का केंद्र बनेगा। यहां भविष्य में धार्मिक प्रवचन, सांस्कृतिक कार्यक्रम और सामाजिक गतिविधियों का आयोजन किया जाएगा।

इस दौरान आयोजन स्थल के सामने स्थित जमीन के हाता को हटाकर मंदिर की शोभा बढ़ाने के लिए मूल रैयतों द्वारा सहमति दिए जाने की जानकारी भी दी गई। इस निर्णय का उपस्थित समाज के लोगों ने खुले दिल से स्वागत किया।

वनभोज में दिखा सामाजिक समरसता का भाव

वनभोज कार्यक्रम के दौरान श्रद्धालुओं के बीच आपसी संवाद, मेल-मिलाप और सौहार्द का वातावरण देखने को मिला। बच्चों, युवाओं और बुजुर्गों में विशेष उत्साह देखा गया। भजन-कीर्तन और धार्मिक गीतों की प्रस्तुति ने पूरे परिसर को भक्तिमय बना दिया।

प्रमुख रूप से रहे उपस्थित

इस अवसर पर पूर्व मंत्री केएन त्रिपाठी, रबिन्द्र तिवारी, बिनोद तिवारी (गढ़वा), संरक्षक अजय तिवारी, मीडिया प्रभारी नितेश तिवारी, बसन्त तिवारी, परमेश तिवारी, मुकेश तिवारी, बकमलेश शुक्ला, जिला अध्यक्ष मधुकर शुक्ला, अभिषेक तिवारी, अंकित पांडे, मनी तिवारी, राकेश तिवारी, आलोक तिवारी, रितिक चौबे सहित बड़ी संख्या में परशुराम वंशज एवं श्रद्धालु उपस्थित रहे।

न्यूज़ देखो: धार्मिक आस्था के साथ सामाजिक एकता का संदेश

परशुराम सेना भार्गव द्वारा आयोजित यह कार्यक्रम दर्शाता है कि धार्मिक आयोजन केवल आस्था तक सीमित नहीं रहते, बल्कि वे समाज को जोड़ने और सांस्कृतिक चेतना को सशक्त करने का माध्यम भी बनते हैं। श्री परशुराम मंदिर का विकास और प्राण-प्रतिष्ठा कार्यक्रम आने वाले समय में क्षेत्र को एक नई धार्मिक पहचान देने वाला है। हर खबर पर रहेगी हमारी नजर।

सनातन परंपरा से जुड़ने का समय

धार्मिक और सांस्कृतिक विरासत को जीवंत बनाए रखना हम सभी की जिम्मेदारी है।
ऐसे आयोजन समाज में एकता, अनुशासन और नैतिक मूल्यों को मजबूत करते हैं।
इस खबर पर अपनी राय साझा करें, लेख को अधिक से अधिक लोगों तक पहुंचाएं और सनातन संस्कृति के इस प्रयास को समर्थन दें।

📥 Download E-Paper

यह खबर आपके लिए कितनी महत्वपूर्ण थी?

रेटिंग देने के लिए किसी एक स्टार पर क्लिक करें!

इस खबर की औसत रेटिंग: 0 / 5. कुल वोट: 0

अभी तक कोई वोट नहीं! इस खबर को रेट करने वाले पहले व्यक्ति बनें।

चूंकि आपने इस खबर को उपयोगी पाया...

हमें सोशल मीडिया पर फॉलो करें!

Written by

पांडु, पलामू

🔔

Notification Preferences

error: