चीरों गांव के सतरतीया जेठ जतरा में दिखी लोकसंस्कृति की भव्य झलक, हजारों ग्रामीणों की मौजूदगी में गूंजे मांदर और पारंपरिक गीत

चीरों गांव के सतरतीया जेठ जतरा में दिखी लोकसंस्कृति की भव्य झलक, हजारों ग्रामीणों की मौजूदगी में गूंजे मांदर और पारंपरिक गीत

author Ravikant Kumar Thakur
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#चंदवा #सतरतीया_जतरा : चीरों गांव में पारंपरिक जतरा के दौरान लोकनृत्य और सांस्कृतिक विरासत का भव्य प्रदर्शन हुआ।

लातेहार जिले के चंदवा प्रखंड अंतर्गत चीरों गांव में आयोजित सतरतीया जेठ जतरा में ग्रामीण संस्कृति और परंपरा का अद्भुत संगम देखने को मिला। देवी मंडप परिसर में आयोजित इस पारंपरिक कार्यक्रम में बड़ी संख्या में ग्रामीणों, महिलाओं और युवाओं ने भाग लिया। मांदर की थाप, लोकनृत्य और सांस्कृतिक प्रस्तुतियों ने पूरे क्षेत्र को भक्तिमय और उत्सवी माहौल में बदल दिया। कार्यक्रम में शामिल अतिथियों ने लोकसंस्कृति और परंपराओं को समाज की पहचान बताते हुए इसे नई पीढ़ी तक पहुंचाने पर जोर दिया।

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  • चीरों गांव के देवी मंडप परिसर में सतरतीया जेठ जतरा का भव्य आयोजन हुआ।
  • मांदर की गूंज और पारंपरिक लोकनृत्य ने ग्रामीण संस्कृति की झलक पेश की।
  • कार्यक्रम में हिण्डाल्को जीएम प्रकाश साहू समेत कई अतिथि शामिल हुए।
  • अतिथियों ने लोकसंस्कृति और परंपराओं को समाज की ताकत बताया।
  • विभिन्न नृत्य मंडलियों को अंगवस्त्र और नगद पुरस्कार देकर सम्मानित किया गया।
  • आयोजन को सफल बनाने में ग्रामीण युवाओं की अहम भूमिका रही।

चंदवा प्रखंड के बोदा पंचायत स्थित चीरों गांव मंगलवार को पूरी तरह सांस्कृतिक रंग में रंगा नजर आया। गांव के देवी मंडप परिसर में आयोजित पारंपरिक सतरतीया जेठ जतरा में हजारों ग्रामीणों की भीड़ उमड़ी। पारंपरिक वेशभूषा में महिला-पुरुषों ने मांदर की थाप पर लोकनृत्य प्रस्तुत कर कार्यक्रम को यादगार बना दिया। पूरे आयोजन के दौरान श्रद्धा, उत्साह और लोकसंस्कृति की अनूठी छटा देखने को मिली।

ग्रामीण संस्कृति और परंपरा का अद्भुत संगम

सतरतीया जेठ जतरा झारखंड की पारंपरिक लोकसंस्कृति का महत्वपूर्ण हिस्सा माना जाता है। चीरों गांव में आयोजित इस कार्यक्रम में आसपास के गांवों से भी बड़ी संख्या में लोग पहुंचे। देवी मंडप परिसर में सुबह से ही श्रद्धालुओं और ग्रामीणों की भीड़ जुटने लगी थी।

कार्यक्रम के दौरान पारंपरिक गीत-संगीत और लोकनृत्य ने माहौल को पूरी तरह उत्सवी बना दिया। मांदर, नगाड़ा और पारंपरिक वाद्ययंत्रों की गूंज से पूरा क्षेत्र संस्कृति और आस्था के रंग में सराबोर दिखाई दिया।

अतिथियों का पारंपरिक स्वागत

कार्यक्रम में हिण्डाल्को के जीएम प्रकाश साहू, दैनिक मजदूर यूनियन के अध्यक्ष प्रमोद साहू, हिण्डाल्को के एचआर अंकित कुमार गुप्ता तथा संजय कुमार सिंह बतौर मुख्य अतिथि शामिल हुए। आयोजन समिति द्वारा सभी अतिथियों का पुष्पगुच्छ एवं अंगवस्त्र भेंट कर पारंपरिक तरीके से स्वागत किया गया।

ग्रामीणों ने पारंपरिक नृत्य और गीतों के माध्यम से अतिथियों का अभिनंदन किया। आयोजन के दौरान पूरा परिसर सांस्कृतिक उत्साह से भरा हुआ नजर आया।

जीएम प्रकाश साहू ने संस्कृति को बताया समाज की पहचान

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए हिण्डाल्को के जीएम प्रकाश साहू ने कहा कि तेजी से बदलते आधुनिक दौर में लोकसंस्कृति और परंपराओं को बचाए रखना बेहद जरूरी है।

जीएम प्रकाश साहू ने कहा: “आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में लोग अपनी संस्कृति और परंपराओं से दूर होते जा रहे हैं। ऐसे जतरा और मेले हमारी सांस्कृतिक पहचान को जीवित रखने का सबसे मजबूत माध्यम हैं।”

उन्होंने कहा कि गांवों की लोकसंस्कृति समाज को जोड़ने का कार्य करती है और नई पीढ़ी को अपनी जड़ों से परिचित कराती है। उन्होंने ग्रामीणों से परंपराओं को संरक्षित रखने की अपील भी की।

सामाजिक एकता और भाईचारे का प्रतीक बना जतरा

दैनिक मजदूर यूनियन के अध्यक्ष प्रमोद साहू ने जतरा को सामाजिक एकता और भाईचारे का प्रतीक बताया।

प्रमोद साहू ने कहा: “जतरा मेला केवल मनोरंजन का माध्यम नहीं है, बल्कि यह समाज के हर वर्ग को एक मंच पर जोड़ने का अवसर देता है।”

उन्होंने कहा कि पारंपरिक वेशभूषा और मांदर की थाप पर जब लोग एक साथ नृत्य करते हैं, तो समाज में अपनापन और एकता और अधिक मजबूत होती है।

सांस्कृतिक प्रस्तुतियों ने बांधा समां

जतरा के दौरान विभिन्न नृत्य मंडलियों ने आकर्षक सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत किए। कलाकारों ने पारंपरिक झारखंडी लोकनृत्य और गीतों से लोगों का मन मोह लिया। ग्रामीणों और युवाओं ने भी उत्साहपूर्वक कार्यक्रम में भाग लिया।

आयोजन समिति की ओर से सभी नृत्य मंडलियों को अंगवस्त्र एवं नगद पुरस्कार देकर सम्मानित किया गया। इस दौरान पूरे कार्यक्रम में उत्साह और उल्लास का वातावरण बना रहा।

आयोजन को सफल बनाने में युवाओं की अहम भूमिका

कार्यक्रम के सफल आयोजन में धनेश्वर तुरी, मच्छिंद्र लोहार, राजेंद्र तुरी, राहुल साव, सुरेश बासपती, श्याम सुंदर उरांव, केदार पाहन, रमेश गंझू, रौशन गंझू, बालगोविंद गंझू, चरकू पाहन, जंगू पाहन, महाबीर पाहन, फुलदेव गंझू तथा प्रताप तुरी सहित कई युवाओं की महत्वपूर्ण भूमिका रही।

ग्रामीणों ने आयोजन समिति की सराहना करते हुए कहा कि ऐसे कार्यक्रम गांवों की सांस्कृतिक पहचान को मजबूत करने का काम करते हैं।

न्यूज़ देखो: लोकसंस्कृति को जीवित रखने की जरूरत

चीरों गांव में आयोजित सतरतीया जेठ जतरा सिर्फ एक धार्मिक या सांस्कृतिक आयोजन नहीं, बल्कि ग्रामीण समाज की पहचान और परंपरा का जीवंत उदाहरण है। तेजी से बदलते समय में जब आधुनिकता लोकसंस्कृति को प्रभावित कर रही है, तब ऐसे आयोजन नई पीढ़ी को अपनी जड़ों से जोड़ने का कार्य करते हैं। समाज की एकता, भाईचारा और सांस्कृतिक समृद्धि को बनाए रखने में इस तरह के पारंपरिक आयोजनों की महत्वपूर्ण भूमिका है। प्रशासन और सामाजिक संगठनों को भी ऐसे आयोजनों के संरक्षण और प्रोत्साहन की दिशा में आगे आना चाहिए। हर खबर पर रहेगी हमारी नजर।

#संस्कृतिसेजुड़ें : अपनी परंपराओं को बचाएं, नई पीढ़ी तक पहुंचाएं

लोकसंस्कृति किसी भी समाज की सबसे बड़ी पहचान होती है।
जब गांव, समाज और युवा अपनी परंपराओं से जुड़ते हैं, तभी संस्कृति जीवित रहती है।
जतरा, मेले और लोकनृत्य केवल आयोजन नहीं, बल्कि हमारी विरासत हैं।
नई पीढ़ी को अपनी भाषा, संस्कृति और परंपराओं से जोड़ना आज की सबसे बड़ी जरूरत है।

आप भी अपने क्षेत्र की लोकसंस्कृति और परंपराओं को बढ़ावा दें।
इस खबर पर अपनी राय कमेंट करें, इसे अधिक से अधिक लोगों तक साझा करें और अपनी सांस्कृतिक विरासत को मजबूत बनाने में भागीदार बनें।

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Written by

चंदवा, लातेहार

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