
#केरसई #हिंदू_सम्मेलन : देवी मंडप परिसर में आयोजित कार्यक्रम में वक्ताओं ने हिंदू एकता का आह्वान किया।
सिमडेगा जिले के केरसई में गुरुवार को देवी मंडप परिसर के पास विराट हिंदू सम्मेलन का आयोजन किया गया, जिसमें विभिन्न धार्मिक और सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधि शामिल हुए। कार्यक्रम में हिंदू समाज की एकता, संस्कृति और परंपराओं की रक्षा पर जोर दिया गया। मुख्य वक्ता बजरंग दल के प्रांत संयोजक रंगनाथ महतो ने लोगों से संगठित रहने और धर्म, संस्कृति तथा परंपराओं की रक्षा करने का आह्वान किया। सम्मेलन में कई वक्ताओं ने सनातन परंपराओं और सामाजिक जागरूकता पर अपने विचार रखे।
- केरसई देवी मंडप परिसर में आयोजित हुआ विराट हिंदू सम्मेलन।
- मुख्य अतिथि बजरंग दल प्रांत संयोजक रंगनाथ महतो ने किया संबोधन।
- सम्मेलन में विहिप जिला अध्यक्ष कौशल राज सिंह देव सहित कई वक्ता उपस्थित।
- वक्ताओं ने हिंदू समाज की एकता, संस्कृति और परंपरा की रक्षा पर दिया जोर।
- कार्यक्रम का समापन सामूहिक हनुमान चालीसा पाठ के साथ हुआ।
सिमडेगा जिले के केरसई प्रखंड में गुरुवार को देवी मंडप परिसर के पास विराट हिंदू सम्मेलन का आयोजन किया गया। इस सम्मेलन में क्षेत्र के विभिन्न धार्मिक, सामाजिक और सांस्कृतिक संगठनों से जुड़े लोग बड़ी संख्या में शामिल हुए। कार्यक्रम का उद्देश्य हिंदू समाज की एकता, संस्कृति और परंपराओं के संरक्षण को लेकर जागरूकता बढ़ाना बताया गया।
कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में झारखंड बजरंग दल के प्रांत संयोजक रंगनाथ महतो, विश्व हिंदू परिषद सिमडेगा के जिला अध्यक्ष कौशल राज सिंह देव, जैन मुनि डॉ. पद्मराज, विहिप जिला उपाध्यक्ष श्याम सुंदर मिश्रा तथा जिला प्रचार-प्रसार प्रमुख विकास साहू मुख्य रूप से उपस्थित रहे।
कार्यक्रम की शुरुआत केरसई प्रखंड अध्यक्ष सुरेश प्रसाद के स्वागत भाषण से हुई, जिसमें उन्होंने सम्मेलन में आए सभी अतिथियों और उपस्थित लोगों का स्वागत करते हुए धर्म और संस्कृति के महत्व पर अपने विचार व्यक्त किए।
हिंदू समाज की एकता और संस्कृति पर जोर
सम्मेलन को संबोधित करते हुए बजरंग दल के प्रांत संयोजक रंगनाथ महतो ने कहा कि यह कार्यक्रम केवल एक सम्मेलन नहीं बल्कि हिंदू समाज की आस्था, संस्कृति और स्वाभिमान की रक्षा का संकल्प है।
रंगनाथ महतो ने कहा: “यह केवल एक सम्मेलन नहीं बल्कि हमारी आस्था और संस्कृति की रक्षा का संकल्प है। हजारों वर्षों से हिंदू समाज ने इस देश की सभ्यता और परंपराओं को संजोकर रखा है। हमें संगठित होकर अपनी पहचान को और मजबूत करना होगा।”
उन्होंने लोगों से आह्वान किया कि वे हिंदुत्व की रक्षा के लिए माता, गौ माता, मठ-मंदिर, मातृभूमि और धर्म ग्रंथों की रक्षा करें और आने वाली पीढ़ियों को भी अपनी संस्कृति और परंपराओं पर गर्व करना सिखाएं।
प्रकृति और सनातन परंपरा पर विचार
विश्व हिंदू परिषद सिमडेगा के जिला अध्यक्ष कौशल राज सिंह देव ने सम्मेलन को संबोधित करते हुए कहा कि सनातन संस्कृति का मूल आधार प्रकृति से जुड़ाव है।
कौशल राज सिंह देव ने कहा: “हमारी सभ्यता और संस्कृति प्रकृति से जुड़ी हुई है। प्राचीन काल से ही हिंदू समाज प्रकृति का सम्मान और पूजन करता आया है।”
उन्होंने लोगों से अपनी संस्कृति और परंपराओं को बचाए रखने के लिए संगठित रहने और सामाजिक एकता को मजबूत करने की अपील की।
धर्म और संस्कारों पर कायम रहने का संदेश
कार्यक्रम में उपस्थित जैन मुनि डॉ. पद्मराज महाराज ने अपने संबोधन में कहा कि जीवन में परिस्थितियां चाहे जैसी भी हों, व्यक्ति को अपने धर्म और संस्कारों पर दृढ़ रहना चाहिए।
जैन मुनि डॉ. पद्मराज महाराज ने कहा: “जीवन में कितनी भी कठिन परिस्थितियां क्यों न आएं, हमें अपने धर्म, संस्कार और नैतिक मूल्यों को नहीं छोड़ना चाहिए।”
उन्होंने अपने संबोधन में मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान राम के जीवन का उल्लेख करते हुए बताया कि उनके जीवन से हमें आदर्श आचरण और मर्यादा का संदेश मिलता है।
आरएसएस के इतिहास और विचारों पर चर्चा
कार्यक्रम में आरएसएस के जिला संघ चालक श्रवण बड़ाईक ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सौ वर्षों के इतिहास और उसके संघर्षों पर विस्तार से प्रकाश डाला।
उन्होंने संघ के विचारों और समाज में सकारात्मक परिवर्तन लाने के लिए बताए गए पांच प्रमुख परिवर्तन के बारे में भी लोगों को जानकारी दी और उन्हें अपने जीवन में अपनाने की प्रेरणा दी।
अन्य वक्ताओं ने भी रखे विचार
सम्मेलन में श्याम सुंदर मिश्रा और सोनी पैकरा सहित कई वक्ताओं ने भी अपने विचार व्यक्त किए और समाज में जागरूकता, एकता और सांस्कृतिक मूल्यों को मजबूत करने की आवश्यकता पर जोर दिया।
कार्यक्रम को सफल बनाने में प्रणव कुमार, रवि गुप्ता, विकास कुमार, आकाश कुमार, श्रवण कुमार (संत), प्रभु मांझी, पवन कुमार, अमित कुमार, अयोध्या प्रसाद, दिलीप साव, अजय झा, राजेश प्रसाद, रामेश्वरम प्रसाद, गणेश प्रसाद, रितेश कुमार, महाबीर प्रसाद, पंकज कुमार, प्रमोद प्रसाद, विक्रम कुमार, बुलेश्वर प्रसाद, बिष्णु प्रसाद और रविंद्र बड़ाईक सहित गांव के कई लोगों की महत्वपूर्ण भूमिका रही।
कार्यक्रम का मंच संचालन संदीप नाग ने किया।
सामूहिक हनुमान चालीसा पाठ के साथ कार्यक्रम का समापन
कार्यक्रम के अंत में सभी उपस्थित लोगों ने सामूहिक रूप से हनुमान चालीसा पाठ किया। इसके साथ ही सम्मेलन का समापन हुआ।
सम्मेलन में बड़ी संख्या में ग्रामीण और विभिन्न संगठनों के कार्यकर्ता उपस्थित रहे। आयोजन का उद्देश्य समाज में सांस्कृतिक जागरूकता और सामाजिक एकता को बढ़ावा देना बताया गया।

न्यूज़ देखो: सांस्कृतिक कार्यक्रम समाज को जोड़ने का माध्यम
केरसई में आयोजित विराट हिंदू सम्मेलन यह दर्शाता है कि सामाजिक और सांस्कृतिक कार्यक्रमों के माध्यम से समाज में संवाद और जागरूकता को बढ़ावा दिया जा सकता है। ऐसे आयोजनों में विभिन्न विचारों और परंपराओं पर चर्चा होती है, जिससे लोगों को अपनी सांस्कृतिक पहचान और सामाजिक जिम्मेदारियों के प्रति जागरूक होने का अवसर मिलता है। यह भी जरूरी है कि ऐसे कार्यक्रम समाज में सकारात्मक संवाद और आपसी सद्भाव को मजबूत करने का माध्यम बनें। हर खबर पर रहेगी हमारी नजर।
संस्कृति और समाज की शक्ति हमारी एकता
किसी भी समाज की असली ताकत उसकी संस्कृति, परंपराओं और आपसी एकता में होती है। जब लोग अपने मूल्यों को समझते हैं और उन्हें आगे बढ़ाने का प्रयास करते हैं, तभी समाज मजबूत बनता है।
सांस्कृतिक कार्यक्रम केवल परंपराओं को याद करने का अवसर नहीं होते, बल्कि वे समाज को जोड़ने और नई पीढ़ी को अपनी जड़ों से परिचित कराने का माध्यम भी बनते हैं।
यदि आपको लगता है कि ऐसे कार्यक्रम समाज में जागरूकता और एकता को बढ़ावा देते हैं, तो इस खबर को जरूर साझा करें। अपनी राय कमेंट में लिखें और समाज से जुड़े मुद्दों पर सकारात्मक चर्चा को आगे बढ़ाएं।






