
#बानो #सिमडेगा #महाशिवरात्रि_उत्सव : केतुंगाधाम मंदिर में कलश यात्रा से तीन दिवसीय आयोजन प्रारंभ।
सिमडेगा जिले के बानो प्रखंड स्थित केतुंगाधाम मंदिर में महाशिवरात्रि के अवसर पर तीन दिवसीय उत्सव की शुरुआत भव्य कलश शोभायात्रा के साथ हुई। वैदिक मंत्रोच्चार के बीच सैकड़ों महिलाओं और युवतियों ने मालगो देव नदी से पवित्र जल लाकर अनुष्ठान का शुभारंभ किया। मंदिर परिसर को विशेष रूप से सजाया गया है। क्षेत्र में भक्तिमय वातावरण व्याप्त है।
- केतुंगाधाम मंदिर, बानो में महाशिवरात्रि पर तीन दिवसीय उत्सव शुरू।
- सैकड़ों महिलाओं ने मालगो देव नदी से भरा पवित्र जल।
- मंदिर परिसर से निकली भव्य कलश शोभायात्रा।
- 15 फरवरी से 24 घंटे का अखंड कीर्तन आरंभ।
- न्यास समिति के अध्यक्ष सुकरा केरकेट्टा की अगुवाई में आयोजन।
सिमडेगा जिले के बानो प्रखंड क्षेत्र स्थित प्रसिद्ध शिव धाम केतुंगाधाम मंदिर में शनिवार को महाशिवरात्रि के अवसर पर तीन दिवसीय धार्मिक उत्सव का शुभारंभ भव्य कलश शोभायात्रा के साथ हुआ। सुबह से ही मंदिर परिसर में श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ पड़ी थी। वैदिक मंत्रोच्चार और विधिवत पूजा-अर्चना के बाद कुंवारी कन्याओं और महिलाओं ने कलश धारण कर मालगो देव नदी की ओर प्रस्थान किया।
वैदिक मंत्रों के बीच निकली श्रद्धामयी यात्रा
कलश यात्रा से पूर्व मंदिर परिसर में विधिवत पूजा की गई। इसके बाद सैकड़ों महिलाएं और युवतियां पारंपरिक वेशभूषा में सुसज्जित होकर सिर पर कलश रखकर यात्रा में शामिल हुईं। यात्रा मंदिर परिसर से शुरू होकर स्थानीय जलाशयों और मालगो देव नदी तट तक पहुंची।
नदी तट पर वैदिक मंत्रोच्चार के बीच श्रद्धालुओं ने पवित्र जल भरा और पुनः कलश के साथ मंदिर लौटे। धार्मिक मान्यता के अनुसार इस दिन निकाली जाने वाली कलश यात्रा देवताओं के आह्वान और अनुष्ठानों की निर्विघ्न पूर्णता का प्रतीक मानी जाती है।
मंदिर परिसर में सजा भक्ति का रंग
महाशिवरात्रि को लेकर मंदिर परिसर को आकर्षक ढंग से सजाया गया है। रंग-बिरंगी झालरों, फूलों और विद्युत सजावट से पूरा क्षेत्र भक्तिमय वातावरण में डूबा नजर आया। बानो के स्थानीय ग्रामीणों के अलावा बरसलोया, सेमरटोली और कुरूचडेगा क्षेत्रों से भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचे।
कलश यात्रा के साथ ही विशेष व्रत, पूजन और अनुष्ठानों की शुरुआत की गई। हर वर्ष की तरह इस वर्ष भी महाशिवरात्रि के अवसर पर मेले का आयोजन किया गया है, जिससे क्षेत्र में उत्सव का माहौल बना हुआ है।
बच्चों की उत्साहपूर्ण भागीदारी
कलश यात्रा में सरस्वती शिशु विद्या मंदिर, केतुंगाधाम के बच्चों ने भी उत्साहपूर्वक भाग लिया। बच्चों ने पारंपरिक वेशभूषा में शामिल होकर धार्मिक कार्यक्रम को और भी आकर्षक बना दिया। स्थानीय लोगों ने इसे सांस्कृतिक और आध्यात्मिक जागरूकता का सकारात्मक संकेत बताया।
अखंड कीर्तन और भक्ति जागरण का आयोजन
न्यास समिति के अध्यक्ष सुकरा केरकेट्टा ने बताया कि महाशिवरात्रि के उपलक्ष्य में 15 फरवरी से 24 घंटे का अखंड कीर्तन आयोजित किया गया है।
सुकरा केरकेट्टा ने कहा:
“महाशिवरात्रि के पावन अवसर पर कलश यात्रा और अखंड कीर्तन से पूरा क्षेत्र शिवमय हो गया है। दूर-दराज से भी श्रद्धालुओं के आने की संभावना है।”
उन्होंने यह भी बताया कि न्यास समिति की ओर से भक्ति जागरण कार्यक्रम का आयोजन किया गया है, जिसमें प्रतिदिन विभिन्न भक्ति गीतों की प्रस्तुति होगी।
कार्यक्रम को सफल बनाने में संरक्षक दिलमोहन सिंह, उपाध्यक्ष संतु सिंह एवं बिलकु महतो, महासचिव ओम प्रकाश साहू, उपसचिव दिलीप पंडा तथा मंदिर पुजारी प्रदीप गोस्वामी सहित कई गणमान्य लोग सक्रिय रूप से सहयोग कर रहे हैं।
क्षेत्र में उमंग और आस्था का संगम
तीन दिवसीय महाशिवरात्रि उत्सव को लेकर पूरे क्षेत्र में उत्साह का माहौल है। श्रद्धालु “भोले बाबा” के जयकारों के साथ भक्ति में लीन दिखाई दिए। मंदिर परिसर में श्रद्धा, संस्कृति और सामुदायिक सहभागिता का सुंदर संगम देखने को मिला। समापन कार्यक्रम भी श्रद्धा एवं उमंग के साथ संपन्न हुआ।

न्यूज़ देखो: आस्था से जुड़ता है समाज
केतुंगाधाम में आयोजित यह भव्य आयोजन दर्शाता है कि ग्रामीण क्षेत्रों में आज भी धार्मिक परंपराएं सामाजिक एकता का आधार हैं। कलश यात्रा और अखंड कीर्तन जैसे आयोजन लोगों को जोड़ने का कार्य करते हैं। प्रशासन और न्यास समिति यदि व्यवस्थाओं को और सुदृढ़ करें तो यह स्थल धार्मिक पर्यटन के रूप में भी विकसित हो सकता है। हर खबर पर रहेगी हमारी नजर।
आस्था के साथ जिम्मेदारी भी निभाएं
धार्मिक आयोजन केवल परंपरा नहीं, सामाजिक समरसता का अवसर भी हैं।
मेला और उत्सव में स्वच्छता और अनुशासन बनाए रखना हम सभी की जिम्मेदारी है।
बच्चों को भी संस्कृति और आस्था से जोड़ना समय की जरूरत है।
ऐसे आयोजनों में बढ़-चढ़कर भाग लें और सहयोग करें।
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