मकर संक्रांति पर गोरयाडीपा में सामाजिक समरसता का भव्य संदेश, विहिप व बजरंग दल के तत्वावधान में आयोजन

मकर संक्रांति पर गोरयाडीपा में सामाजिक समरसता का भव्य संदेश, विहिप व बजरंग दल के तत्वावधान में आयोजन

author Aditya Kumar
130 Views Download E-Paper (33)
#जारीप्रखंड #मकरसंक्रांति : गोरयाडीपा में कलश यात्रा, धर्मसभा और लोक कला के साथ सामाजिक समरसता दिवस संपन्न।

जारी प्रखंड अंतर्गत जरडा पंचायत के गोरयाडीपा गांव में मकर संक्रांति के अवसर पर विश्व हिन्दू परिषद, बजरंग दल, मातृशक्ति एवं दुर्गावाहिनी के संयुक्त तत्वावधान में सामाजिक समरसता दिवस कार्यक्रम भव्य रूप से आयोजित किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य सनातन संस्कृति, सामाजिक एकता और धार्मिक परंपराओं को सुदृढ़ करना रहा। कलश यात्रा से लेकर धर्मसभा, लोक कला और भंडारा तक पूरे आयोजन में श्रद्धा और उल्लास का वातावरण देखने को मिला। आयोजन में जिले व अन्य प्रखंडों से आए अतिथियों की सहभागिता ने कार्यक्रम को विशेष बना दिया।

Join WhatsApp
  • जरडा पंचायत के गोरयाडीपा में सामाजिक समरसता दिवस का आयोजन।
  • कलश यात्रा के साथ कार्यक्रम का हुआ शुभारंभ।
  • चीड़रा नदी से जल लाकर लिखापत्थर धाम में जलाभिषेक।
  • धर्मसभा में धर्म व संस्कृति संरक्षण पर दिया गया संदेश।
  • लोक कला व नागपुरी गीतों पर झूमे श्रद्धालु।
  • अंत में भंडारा का आयोजन, सैकड़ों सनातनी रहे उपस्थित।

जारी। मकर संक्रांति के पावन अवसर पर जारी प्रखंड अंतर्गत जरडा पंचायत के गोरयाडीपा गांव में प्रत्येक वर्ष की भांति इस वर्ष भी सामाजिक समरसता दिवस कार्यक्रम श्रद्धा और उत्साह के साथ मनाया गया। कार्यक्रम का आयोजन विश्व हिन्दू परिषद, बजरंग दल, मातृशक्ति एवं दुर्गावाहिनी के संयुक्त तत्वावधान में किया गया, जिसमें आसपास के गांवों के साथ-साथ जिले एवं अन्य प्रखंडों से बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल हुए।

कलश यात्रा और जलाभिषेक से हुई शुरुआत

कार्यक्रम का शुभारंभ प्रातः कलश यात्रा से हुआ। कलश यात्री चीड़रा नदी से पवित्र जल लेकर गोरयाडीपा स्थित लिखापत्थर धाम पहुंचे, जहां विधिवत जलाभिषेक एवं पूजा-पाठ किया गया।
धार्मिक मंत्रोच्चार और जयकारों से पूरा क्षेत्र भक्तिमय वातावरण में डूबा नजर आया।

भजन-कीर्तन और अतिथियों का स्वागत

पूजा-पाठ के पश्चात श्रद्धालुओं द्वारा भजन-कीर्तन का आयोजन किया गया। इसके बाद जिले एवं अन्य प्रखंडों से आए अतिथियों का पारंपरिक तरीके से भव्य स्वागत किया गया।
आयोजकों ने कहा कि ऐसे कार्यक्रम समाज को जोड़ने और आपसी भाईचारे को मजबूत करने में अहम भूमिका निभाते हैं।

धर्मसभा में संस्कृति संरक्षण का आह्वान

कार्यक्रम के मुख्य चरण में धर्मसभा का आयोजन किया गया, जिसमें उपस्थित अतिथियों ने सनातन धर्म और संस्कृति को बचाए रखने की आवश्यकता पर जोर दिया।
वक्ताओं ने कहा कि सामाजिक समरसता ही किसी भी समाज की सबसे बड़ी ताकत है और पर्व-त्योहारों के माध्यम से इसे और सुदृढ़ किया जा सकता है।

लोक कला और नागपुरी गीतों पर झूमे लोग

धर्मसभा के बाद लोक कला की प्रस्तुति की गई। कलाकारों ने ठेठ नागपुरी गीतों पर शानदार प्रस्तुति दी, जिस पर लोग झूमते नजर आए।
ग्रामीणों और युवाओं की सक्रिय भागीदारी से पूरा कार्यक्रम उत्सव में बदल गया।

भंडारे के साथ हुआ समापन

कार्यक्रम के अंत में भंडारा का आयोजन किया गया, जिसमें सैकड़ों की संख्या में उपस्थित सनातनियों ने प्रसाद ग्रहण किया। आयोजकों ने इसे सामाजिक एकता और सेवा भाव का प्रतीक बताया।

कार्यक्रम में उपस्थित प्रमुख लोग

इस अवसर पर मुख्य रूप से विश्व हिन्दू परिषद जिला सह मंत्री सकलदीपनाथ शाहदेव, धर्म रक्षक भीखेश्वर नागमणी, डुमरी प्रखंड अध्यक्ष सह टांगीनाथ धाम विकास समिति के उपाध्यक्ष संजय साहू, टांगीनाथ धाम विकास समिति के संरक्षक गोविंद सिंह, विहिप उपाध्यक्ष डुमरी ब्रजेंद्र पांडे, टांगीनाथ धाम विकास समिति के कोषाध्यक्ष वीरेंद्र जायसवाल, जारी प्रखंड अध्यक्ष विहिप धनी नगेसिया, बजरंग दल संयोजक सुधराम लोहरा, सह संयोजक गुड्डू नगेसिया, सह संयोजक बजरंग कवर, सह मंत्री सुधराम नगेसिया, बुधराम लोहरा, जितेन्द्र कवर, जतरू लोहरा, अरुण कुम्हार, आनंद कुम्हार, सुरेंद्र इंदवार, बंधना कोरवा, धरमू कोरवा, सर्पनाथ कवर, सुखनाथ कवर, लीलावती कुमारी, सुखमईत देवी, प्रियंका कुमारी, रश्मि कुमारी सहित सैकड़ों सनातनी उपस्थित रहे।

न्यूज़ देखो: सामाजिक एकता और संस्कृति का जीवंत उदाहरण

गोरयाडीपा में आयोजित यह कार्यक्रम बताता है कि जब समाज संगठित होकर अपनी परंपराओं को निभाता है, तो सामाजिक समरसता स्वतः मजबूत होती है। मकर संक्रांति जैसे पर्वों के माध्यम से धर्म, संस्कृति और लोक कला को जीवित रखने का यह प्रयास सराहनीय है। ऐसे आयोजन नई पीढ़ी को अपनी जड़ों से जोड़ने का कार्य करते हैं।
हर खबर पर रहेगी हमारी नजर।

जब पर्व बनें एकता का माध्यम

मकर संक्रांति केवल पर्व नहीं, बल्कि सामाजिक एकता और सांस्कृतिक चेतना का संदेश है।
ऐसे आयोजनों से समाज में सहयोग, सेवा और समरसता की भावना मजबूत होती है।
अपनी राय साझा करें, इस खबर को आगे बढ़ाएं और सांस्कृतिक विरासत को सहेजने में सहभागी बनें।

📥 Download E-Paper

यह खबर आपके लिए कितनी महत्वपूर्ण थी?

रेटिंग देने के लिए किसी एक स्टार पर क्लिक करें!

इस खबर की औसत रेटिंग: 1 / 5. कुल वोट: 1

अभी तक कोई वोट नहीं! इस खबर को रेट करने वाले पहले व्यक्ति बनें।

चूंकि आपने इस खबर को उपयोगी पाया...

हमें सोशल मीडिया पर फॉलो करें!

Written by

डुमरी, गुमला

🔔

Notification Preferences

error: