
#लचरागढ़ #अभिभावक_संगोष्ठी : 100% उपस्थिति वाले विद्यार्थियों का सम्मान—माताओं को भी मिला विशेष आदर।
सिमडेगा के लचरागढ़ स्थित विवेकानंद शिशु विद्या मंदिर में अभिभावक संगोष्ठी का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में शिक्षा, संस्कार और अनुशासन पर जोर देते हुए छात्रों और उनके अभिभावकों को सम्मानित किया गया। 100% उपस्थिति वाले विद्यार्थियों और उनकी माताओं को विशेष सम्मान दिया गया। इस आयोजन ने शिक्षा और सामाजिक सहभागिता का प्रेरणादायी संदेश दिया।
- विवेकानंद शिशु विद्या मंदिर, लचरागढ़ में संगोष्ठी आयोजित।
- गोपाल साहू, जीरेन मड़की, विश्वनाथ बड़ाइक मुख्य रूप से उपस्थित।
- 100% उपस्थिति वाले छात्रों को सम्मान और ₹1100 पुरस्कार।
- माताओं को शॉल ओढ़ाकर सम्मानित किया गया।
- अभिभावकों की सक्रिय भागीदारी और उत्साहपूर्ण उपस्थिति।
सिमडेगा जिले के लचरागढ़ स्थित विवेकानंद शिशु विद्या मंदिर उच्च विद्यालय में एक प्रेरणादायी अभिभावक संगोष्ठी का आयोजन किया गया। यह कार्यक्रम शिक्षा, संस्कार और सामाजिक सहभागिता के महत्व को उजागर करने वाला एक महत्वपूर्ण अवसर बनकर सामने आया।
कार्यक्रम की अध्यक्षता गोपाल साहू ने की, जबकि मुख्य अतिथि के रूप में जीरेन मड़की (मुखिया, लचरागढ़) और विशिष्ट अतिथि विश्वनाथ बड़ाइक (मुखिया, बानो) उपस्थित रहे। कार्यक्रम की शुरुआत दीप प्रज्वलन और पुष्पार्चन के साथ हुई।
शिक्षा के साथ संस्कार पर जोर
प्रधानाचार्य राजेंद्र साहू ने अपने संबोधन में कहा—
“सच्ची शिक्षा वही है जो व्यक्ति को आत्मनिर्भर, चरित्रवान और समाजोपयोगी बनाती है।”
उन्होंने विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास के लिए शिक्षा और संस्कार दोनों को आवश्यक बताया।
100% उपस्थिति वाले छात्रों का सम्मान
कार्यक्रम का सबसे भावुक और प्रेरणादायी क्षण तब आया जब 100% उपस्थिति दर्ज करने वाले विद्यार्थियों को सम्मानित किया गया। इनमें—
- विनोद सिंह
- पूजा कुमारी
- चंद्रपाल सिंह
- महेंद्र सिंह
- अनुष्का बागड़ी
शामिल रहे।
इन विद्यार्थियों को ट्रॉफी और ₹1100 की सम्मान राशि प्रदान की गई।
माताओं को भी मिला सम्मान
इन छात्रों की सफलता के पीछे उनके परिवार, विशेषकर माताओं के योगदान को सराहते हुए उन्हें शॉल ओढ़ाकर सम्मानित किया गया।
उपस्थित लोगों ने कहा: “मां का त्याग और समर्पण ही बच्चों की सफलता की असली नींव है।”
यह क्षण सभी के लिए भावुक और प्रेरणादायी रहा।
मुख्य अतिथियों का संदेश
मुख्य अतिथि जीरेन मड़की ने अभिभावकों से अपील करते हुए कहा—
“बच्चों को नियमित रूप से विद्यालय भेजें, यही भविष्य निर्माण का आधार है।”
वहीं विशिष्ट अतिथि विश्वनाथ बड़ाइक ने कहा—
“संस्कार ही जीवन की सच्ची नींव हैं, जो भविष्य को मजबूत बनाते हैं।”
अध्यक्ष का प्रेरणादायी संबोधन
कार्यक्रम के अध्यक्ष गोपाल साहू ने कहा—
“जो जितना तपता है, वह उतना ही निखरकर समाज के सामने आता है।”
उन्होंने शिक्षा को जीवन का सबसे महत्वपूर्ण आधार बताया।
शिक्षकों और अभिभावकों की भागीदारी
इस संगोष्ठी में कक्षा अष्टम और नवम के अभिभावकों की बड़ी संख्या में उपस्थिति रही। कार्यक्रम में प्रमोद पाणिग्राही, अर्जुन महतो, गणेश सिंह, जागेश्वर सिंह, भागीरथी सिंह, शिविरचंद नायक, लक्ष्मी देवी, दशरथी देवी, बिमला कुमारी, बसंती बड़ाइक, सुषमा कुमारी, प्रगति सिंह, यमुना कुमारी, दीक्षित कुमारी, रजनी बड़ाइक, सुनीति कुमारी, गंगोत्री देवी सहित सभी आचार्य-आचार्याएं उपस्थित रहे।
कार्यक्रम का संचालन प्रमोद पाणिग्राही ने किया, जबकि अंत में प्रधानाचार्य ने धन्यवाद ज्ञापन प्रस्तुत किया।
शिक्षा और समाज का मजबूत संबंध
यह आयोजन केवल एक संगोष्ठी नहीं, बल्कि शिक्षा और समाज के बीच मजबूत संबंध का उदाहरण बना। इससे यह स्पष्ट हुआ कि बच्चों के विकास में अभिभावकों की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है।

न्यूज़ देखो: शिक्षा में अभिभावकों की भूमिका अहम
लचरागढ़ का यह आयोजन यह दर्शाता है कि शिक्षा केवल स्कूल की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि अभिभावकों और समाज की भी समान भागीदारी जरूरी है। ऐसे कार्यक्रम बच्चों के भविष्य को मजबूत बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। हर खबर पर रहेगी हमारी नजर।
मिलकर बनाएं बच्चों का उज्ज्वल भविष्य
हर बच्चे की सफलता उसके परिवार और समाज का योगदान होती है।
जरूरी है कि हम बच्चों की शिक्षा और संस्कार पर बराबर ध्यान दें।
अभिभावकों और शिक्षकों का सहयोग ही सफलता की कुंजी है।
आइए, हम सभी मिलकर बच्चों के उज्ज्वल भविष्य का निर्माण करें।
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