
#लचरागढ़ #भारतीय_नववर्ष_उत्सव : विद्यालय में परंपरा और उत्साह के साथ नवसंवत्सर मनाया गया।
झारखंड के सिमडेगा जिला अंतर्गत लचरागढ़ में विवेकानंद शिशु विद्या मंदिर उच्च विद्यालय द्वारा विक्रम संवत 2083 के अवसर पर भव्य नववर्ष उत्सव आयोजित किया गया। इस दौरान विद्यार्थियों, शिक्षकों और नगरवासियों ने शोभायात्रा और सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के माध्यम से भारतीय परंपरा का प्रदर्शन किया। कार्यक्रम में विभिन्न झांकियां और देशभक्ति नारों ने माहौल को उत्साहपूर्ण बना दिया। यह आयोजन भारतीय संस्कृति और सामाजिक सहभागिता का सशक्त उदाहरण बना।
- लचरागढ़ के विवेकानंद शिशु विद्या मंदिर में विक्रम संवत 2083 का आयोजन।
- विद्यार्थियों द्वारा मां दुर्गा, महाकाली, नवदुर्गा, लव-कुश और हनुमान की झांकियां प्रस्तुत।
- शोभायात्रा में गूंजे भारत माता की जय और जय श्रीराम के नारे।
- प्रिंस चौक से कुम्हार टोली तक भव्य शोभायात्रा का आयोजन।
- नगर के संतोष महतो, अग्रवाल परिवार और अन्य गणमान्य द्वारा स्वागत।
- कार्यक्रम में विद्यालय के प्रधानाचार्य राजेन्द्र साहू सहित कई पदाधिकारी रहे उपस्थित।
लचरागढ़ में भारतीय नववर्ष विक्रम संवत 2083 के अवसर पर एक भव्य और सांस्कृतिक रूप से समृद्ध आयोजन देखने को मिला। सिमडेगा जिले के विवेकानंद शिशु विद्या मंदिर उच्च विद्यालय में आयोजित इस कार्यक्रम में विद्यार्थियों, शिक्षकों और नगरवासियों की सक्रिय भागीदारी रही। पारंपरिक विधि-विधान से प्रारंभ हुए इस आयोजन में शोभायात्रा, झांकियां और सांस्कृतिक प्रस्तुतियां प्रमुख आकर्षण का केंद्र बनीं। पूरे नगर में उत्साह, उल्लास और सांस्कृतिक जागरूकता का माहौल देखने को मिला।
शोभायात्रा में झलकती भारतीय संस्कृति और परंपरा
कार्यक्रम का शुभारंभ विद्यालय परिसर से पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ हुआ। विद्यालय की छात्राओं ने सिर पर सुसज्जित कलश धारण कर अनुशासित पंक्तियों में शोभायात्रा की अगुवाई की। इस दौरान चारों दलों द्वारा प्रस्तुत झांकियां विशेष आकर्षण का केंद्र बनीं।
देवी-देवताओं की जीवंत झांकियां बनीं आकर्षण का केंद्र
झांकियों में मां दुर्गा के विभिन्न स्वरूपों का अत्यंत प्रभावशाली प्रदर्शन किया गया। विशेष रूप से महाकाली के रौद्र रूप और नवदुर्गा की आकर्षक छवियों ने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। इसके साथ ही लव-कुश की झांकी ने रामायण काल की स्मृतियों को जीवंत कर दिया।
हनुमान जी के बाल स्वरूप में सजे विद्यार्थियों ने अपने अद्भुत अभिनय और ऊर्जा से सभी का ध्यान आकर्षित किया। गदा धारण किए इन बाल कलाकारों ने भक्ति, साहस और समर्पण का अनूठा संदेश दिया।
नारों से गूंजा पूरा लचरागढ़
शोभायात्रा के दौरान “भारत माता की जय”, “दुर्गा माता की जय”, “जय श्रीराम” और “जय श्रीराम का नारा है, नववर्ष हमारा है” जैसे नारों से पूरा वातावरण गूंज उठा। भगवा ध्वज लहराते हुए विद्यार्थी कदम से कदम मिलाकर आगे बढ़ रहे थे, जिससे पूरे नगर में उत्साह का संचार हुआ।
नगरवासियों ने किया भव्य स्वागत
शोभायात्रा विद्यालय से निकलकर प्रिंस चौक होते हुए कुम्हार टोली तक पहुंची और पुनः विद्यालय में आकर संपन्न हुई। रास्ते भर विभिन्न सामाजिक संगठनों और गणमान्य व्यक्तियों ने शोभायात्रा का स्वागत किया।
संतोष महतो ने शीतल पेयजल की व्यवस्था की। वहीं नंदकिशोर अग्रवाल, राजेश अग्रवाल और गौतम अग्रवाल ने बिस्किट वितरण किया। रिक्की अग्रवाल द्वारा टॉफी वितरित की गई।
प्रिंस चौक पर संजय द्विवेदी और उनके साथियों ने शीतल पेय और बिस्किट से स्वागत किया। बजरंग दल लचरागढ़ के सदस्यों ने हनुमान मंदिर के पास शर्बत और पानी की व्यवस्था की। सुरेन्द्र सिंह बानो द्वारा फ्रूटी, पेप्सी, मैंगो और मिरांडा जैसे पेय पदार्थ उपलब्ध कराए गए।
प्रधानाचार्य का प्रेरणादायक संबोधन
कार्यक्रम के समापन पर विद्यालय के प्रधानाचार्य राजेन्द्र साहू ने कहा:
राजेन्द्र साहू ने कहा: “भारतीय नववर्ष केवल कैलेंडर परिवर्तन नहीं, बल्कि हमारी सनातन संस्कृति और गौरवशाली इतिहास का प्रतीक है।”
उन्होंने आगे कहा:
“विक्रम संवत हमें आत्मसम्मान, साहस और धर्मनिष्ठा का संदेश देता है तथा हमें नए संकल्प लेने के लिए प्रेरित करता है।”
विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा:
“आप सभी इस राष्ट्र के उज्ज्वल भविष्य हैं, और ऐसे आयोजन हमें अपनी संस्कृति से जोड़ते हैं।”
कार्यक्रम में प्रमुख लोगों की उपस्थिति
इस भव्य आयोजन में विद्यालय के सचिव राजेश अग्रवाल, सह सचिव रिक्की अग्रवाल, कोषाध्यक्ष आनंद कोठारी, प्रधानाचार्य राजेन्द्र साहू, आचार्य प्रमोद पाणिग्रही, गणेश सिंह, जगेश्वर सिंह, भागीरथी सिंह, शिवीरचंद नायक, अर्जुन महतो, यमुना कुमारी, बसंती बड़ाईक, रजनी बड़ाईक, सुनीति कुमारी, लक्ष्मी देवी, दसरथी, सुषमा कुमारी, दीक्षित कुमारी, प्रगति कुमारी, बिमला कुमारी सहित अन्य लोग उपस्थित रहे।

न्यूज़ देखो: संस्कृति से जुड़ाव और सामाजिक एकता का मजबूत संदेश
लचरागढ़ में आयोजित यह कार्यक्रम केवल एक उत्सव नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति के प्रति गहरी आस्था और जुड़ाव का प्रतीक है। इस आयोजन ने यह दिखाया कि विद्यालय और समाज मिलकर किस प्रकार परंपराओं को जीवित रख सकते हैं। प्रशासन और सामाजिक संगठनों की सहभागिता सराहनीय रही, लेकिन ऐसे आयोजनों को और व्यापक स्तर पर ले जाने की आवश्यकता है। क्या भविष्य में ऐसे कार्यक्रम और बड़े स्तर पर आयोजित होंगे, यह देखना महत्वपूर्ण होगा। हर खबर पर रहेगी हमारी नजर।
नई पीढ़ी को संस्कारों से जोड़ने का संकल्प लें
ऐसे आयोजन हमें अपनी जड़ों से जोड़ने और संस्कृति को आगे बढ़ाने की प्रेरणा देते हैं। समाज और विद्यालय मिलकर जब इस तरह के कार्यक्रम करते हैं, तो आने वाली पीढ़ी में संस्कार और जागरूकता बढ़ती है।
अब समय है कि हम भी अपनी परंपराओं को समझें और उन्हें अपने जीवन में अपनाएं। अपने बच्चों को ऐसे आयोजनों में भाग लेने के लिए प्रेरित करें और समाज में सकारात्मक ऊर्जा फैलाएं।
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