दुमका में रामनवमी पर निकला भव्य जुलूस, अखाड़ों में पारंपरिक युद्ध कला ने मोहा मन

दुमका में रामनवमी पर निकला भव्य जुलूस, अखाड़ों में पारंपरिक युद्ध कला ने मोहा मन

author Saroj Verma
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#दुमका #रामनवमी_जुलूस : शहर में 18 अखाड़ों ने निकाला भव्य जुलूस — पारंपरिक युद्ध कला का प्रदर्शन आकर्षण बना।

दुमका में रामनवमी के अवसर पर 18 अखाड़ों द्वारा भव्य जुलूस निकाला गया, जिसमें पारंपरिक युद्ध कला का प्रदर्शन किया गया। जुलूस विभिन्न इलाकों से होते हुए टीन बाजार चौक पहुंचा, जहां आकर्षक करतब दिखाए गए। सुरक्षा के कड़े इंतजाम के बीच प्रशासनिक अधिकारी मौके पर मौजूद रहे। आयोजन में हजारों श्रद्धालुओं की भागीदारी रही और भक्ति व उत्साह का माहौल बना रहा।

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  • दुमका शहर में 18 अखाड़ों द्वारा भव्य रामनवमी जुलूस निकाला गया।
  • ढोल, बैण्ड-बाजा और ढाक की धुन पर युवाओं ने किया प्रदर्शन।
  • टीन बाजार चौक पर पारंपरिक युद्ध कला के आकर्षक करतब।
  • लाठी, तलवार, फरसा के साथ युवाओं का जोश देखने लायक।
  • प्रशासन की मनाही के बावजूद एयर गन और नकली पिस्टल जब्त
  • सुरक्षा के लिए एसपी, एसडीओ सहित अधिकारी तैनात रहे।

रामनवमी के पावन अवसर पर दुमका शहर में भक्ति, परंपरा और उत्साह का अद्भुत संगम देखने को मिला। शहर के विभिन्न हिस्सों से 18 अखाड़ों ने भव्य जुलूस निकाला, जिसमें पारंपरिक युद्ध कला का प्रदर्शन किया गया। हजारों की संख्या में श्रद्धालु इस जुलूस में शामिल हुए और पूरे शहर में जय श्रीराम के नारों से वातावरण गूंज उठा।

18 अखाड़ों का भव्य प्रदर्शन

दुमका के विभिन्न अखाड़ों ने जुलूस में बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। ढोल, बैण्ड-बाजा और ढाक की मधुर धुन पर युवाओं ने पारंपरिक अस्त्र-शस्त्रों के साथ शानदार प्रदर्शन किया। लाठी, तलवार और फरसा के साथ किए गए करतबों ने लोगों को मंत्रमुग्ध कर दिया।

टीन बाजार चौक बना आकर्षण का केंद्र

जुलूस शहर के विभिन्न इलाकों से होते हुए टीन बाजार चौक पहुंचा, जहां सबसे अधिक भीड़ देखने को मिली। यहां युवाओं ने अपने हुनर का प्रदर्शन करते हुए आकर्षक युद्ध कला के करतब दिखाए। टीन बाजार का जुलूस सबसे खास रहा, जहां महिलाओं ने भी ढाक बजाकर अपनी भागीदारी दर्ज कराई।

महिलाओं और बच्चों की भी रही भागीदारी

इस आयोजन में केवल युवा ही नहीं, बल्कि महिलाएं, बच्चे और बुजुर्ग भी शामिल हुए। महिलाओं द्वारा ढाक बजाना और बच्चों का उत्साह इस आयोजन को और खास बना गया। इससे सामाजिक एकता और सांस्कृतिक विरासत का सुंदर संदेश मिला।

झांकियों ने खींचा ध्यान

भव्य रथ पर भगवान श्रीराम, माता सीता, लक्ष्मण और बजरंगबली की झांकी लोगों के आकर्षण का मुख्य केंद्र रही। श्रद्धालुओं ने इन झांकियों का दर्शन कर आशीर्वाद लिया और पूरे आयोजन में भक्ति का माहौल बना रहा।

प्रशासन की सख्ती और सुरक्षा व्यवस्था

रामनवमी के दौरान सुरक्षा को लेकर प्रशासन पूरी तरह सतर्क नजर आया। टीन बाजार चौक पर एसपी, एसडीओ सहित कई अधिकारी कैंप कर निगरानी करते रहे। शहर के विभिन्न स्थानों पर मजिस्ट्रेट और अर्धसैनिक बल की तैनाती की गई थी।

हालांकि प्रशासन की मनाही के बावजूद कुछ युवाओं द्वारा एयर गन और नकली पिस्टल का प्रदर्शन किया गया, जिसे पुलिस ने तत्परता से जब्त कर लिया।

सेवा समिति ने की व्यवस्था

जुलूस में शामिल श्रद्धालुओं के लिए जय माता दी सेवा समिति द्वारा शर्बत, फल और पेयजल की व्यवस्था की गई थी। इससे लोगों को राहत मिली और आयोजन सुचारू रूप से संपन्न हुआ।

न्यूज़ देखो: परंपरा और अनुशासन का संतुलन जरूरी

दुमका का यह आयोजन एक ओर जहां सांस्कृतिक विरासत और आस्था का प्रतीक है, वहीं दूसरी ओर सुरक्षा और अनुशासन की अहमियत भी दिखाता है। प्रशासन की सतर्कता और समिति की सेवा भावना सराहनीय रही, लेकिन नियमों की अनदेखी जैसे मामले चिंता का विषय हैं। अब सवाल यह है कि भविष्य में ऐसे आयोजनों में नियमों का पालन और बेहतर कैसे सुनिश्चित किया जाए। हर खबर पर रहेगी हमारी नजर।

परंपरा के साथ जिम्मेदारी भी निभाएं

त्योहार हमारी संस्कृति और पहचान का हिस्सा हैं, लेकिन इन्हें सुरक्षित और जिम्मेदार तरीके से मनाना हमारी जिम्मेदारी है। पारंपरिक कला और उत्साह के साथ-साथ अनुशासन और नियमों का पालन भी जरूरी है।

आइए, हम सभी मिलकर यह सुनिश्चित करें कि हमारे त्योहार खुशियों और शांति का संदेश दें, न कि किसी प्रकार की अव्यवस्था या खतरे का कारण बनें।

अपनी राय जरूर साझा करें, इस खबर को ज्यादा से ज्यादा लोगों तक पहुंचाएं और सुरक्षित व सांस्कृतिक उत्सव की दिशा में कदम बढ़ाएं।

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Written by

दुमका/देवघर

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