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लेसलीगंज में अनजान शाह दाता के 91वें उर्स पर कव्वाली का भव्य आयोजन, हजारों अकीदतमंद हुए शामिल

#लेसलीगंज #पलामू #धार्मिक_आयोजन : उर्स के मौके पर कव्वाली, चादरपोशी और अमन-शांति की दुआओं से गूंजा मजार परिसर।

पलामू जिले के लेसलीगंज स्थित हज़रत अनजान शाह दाता रहमतुल्लाह अलैह की मजार शरीफ पर 91वें सलाना उर्स के अवसर पर भव्य कव्वाली कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का उद्घाटन समाजसेवियों द्वारा फीता काटकर किया गया। उर्स के दौरान चादरपोशी, दुआ और कव्वाली के जरिए अमन, भाईचारे और आपसी सौहार्द का संदेश दिया गया। दूर-दराज से आए हजारों अकीदतमंदों की मौजूदगी ने आयोजन को ऐतिहासिक बना दिया।

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  • हज़रत अनजान शाह दाता की मजार पर 91वां सलाना उर्स आयोजित।
  • समाजसेवी गौतम सिंह उर्फ डब्लू सिंह, आयुष तिर्की उर्फ राजू तिर्कीमोहम्मद शाहिद ने किया उद्घाटन।
  • मजार शरीफ कमिटी सदर हफीजुल हसन ने अतिथियों का किया स्वागत।
  • चादरपोशी कर अमन-शांति व भाईचारे की दुआ।
  • लेसलीगंज व आसपास से हजारों अकीदतमंदों की उमड़ी भीड़।

लेसलीगंज प्रखंड में स्थित हज़रत अनजान शाह दाता रहमतुल्लाह अलैह की मजार शरीफ पर आयोजित 91वें सलाना उर्स ने एक बार फिर धार्मिक आस्था, सामाजिक सौहार्द और सांस्कृतिक विरासत को जीवंत कर दिया। उर्स के अवसर पर आयोजित कव्वाली कार्यक्रम ने मजार परिसर को भक्तिमय माहौल से सराबोर कर दिया, जहां हर उम्र के लोग बाबा की दरगाह पर हाजिरी लगाने पहुंचे।

फीता काटकर हुआ कव्वाली कार्यक्रम का शुभारंभ

उर्स के मुख्य कार्यक्रम कव्वाली का उद्घाटन जिले के जाने-माने समाजसेवी गौतम सिंह उर्फ डब्लू सिंह, आयुष तिर्की उर्फ राजू तिर्की और युवाओं के लोकप्रिय समाजसेवी मोहम्मद शाहिद ने संयुक्त रूप से फीता काटकर किया। उद्घाटन के बाद मजार परिसर तालियों और दुआओं की गूंज से भर उठा। आयोजन की शुरुआत के साथ ही श्रद्धालुओं में विशेष उत्साह देखने को मिला।

मजार कमिटी ने किया अतिथियों का सम्मान

आयोजनकर्ता मजार शरीफ कमिटी के सदर हफीजुल हसन ने सभी मुख्य अतिथियों का फूल माला और शॉल भेंट कर सम्मानपूर्वक स्वागत किया। उन्होंने कहा कि यह उर्स केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि समाज को जोड़ने वाला एक मंच है, जहां हर वर्ग और समुदाय के लोग एक साथ बाबा की दरगाह पर माथा टेकते हैं।

चादरपोशी और दुआ से मांगी गई अमन-शांति

उद्घाटन के पश्चात अतिथियों और श्रद्धालुओं ने मजार शरीफ पर चादरपोशी की। इस दौरान क्षेत्र में अमन-शांति, भाईचारे, खुशहाली और आपसी सौहार्द के लिए विशेष दुआ मांगी गई। मजार परिसर में मौजूद लोगों ने हाथ उठाकर देश और समाज की सलामती की कामना की, जिससे माहौल पूरी तरह आध्यात्मिक हो गया।

समाजसेवियों ने दिया सौहार्द का संदेश

इस अवसर पर समाजसेवी गौतम सिंह उर्फ डब्लू सिंह ने कहा:

गौतम सिंह उर्फ डब्लू सिंह ने कहा: “हज़रत अनजान शाह दाता का सलाना उर्स प्रेम, एकता और भाईचारे का संदेश देता है। बाबा की दरगाह पर आने वाले हर अकीदतमंद की मुराद पूरी होती है।”

उन्होंने आयोजन समिति को सफल आयोजन के लिए बधाई दी और भविष्य में भी इस तरह के धार्मिक व सांस्कृतिक आयोजनों में हर संभव सहयोग देने का भरोसा दिलाया।

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कव्वाली ने बांधा समां

उर्स के मौके पर आयोजित कव्वाली कार्यक्रम आकर्षण का केंद्र रहा। कव्वालों ने सूफियाना कलाम और हम्द-नात पेश कर श्रद्धालुओं को भावविभोर कर दिया। “दमादम मस्त कलंदर” और बाबा की शान में पेश की गई कव्वालियों पर अकीदतमंद झूमते नजर आए। देर रात तक कव्वाली का सिलसिला चलता रहा और पूरा मजार परिसर रौशनियों से जगमगाता रहा।

हजारों अकीदतमंदों की उमड़ी भीड़

91वें सलाना उर्स के अवसर पर लेसलीगंज के साथ-साथ आसपास के गांवों और दूर-दराज के इलाकों से हजारों की संख्या में अकीदतमंद पहुंचे। श्रद्धालुओं की भारी भीड़ को देखते हुए आयोजन समिति द्वारा सुरक्षा, पेयजल और अन्य व्यवस्थाएं की गई थीं। स्वयंसेवकों ने पूरी मुस्तैदी से व्यवस्था संभाली, जिससे कार्यक्रम शांतिपूर्ण और सफलतापूर्वक संपन्न हुआ।

धार्मिक आयोजन के साथ सामाजिक समरसता

अनजान शाह दाता की मजार पर होने वाला यह उर्स वर्षों से धार्मिक एकता का प्रतीक रहा है। यहां हिंदू, मुस्लिम, सिख और अन्य समुदायों के लोग समान श्रद्धा के साथ बाबा की दरगाह पर हाजिरी लगाते हैं। उर्स के दौरान यह दृश्य फिर देखने को मिला, जब सभी धर्मों के लोग एक साथ दुआ करते नजर आए।

स्थानीय लोगों में उत्साह

उर्स को लेकर स्थानीय लोगों में भी खासा उत्साह देखा गया। दुकानदारों, स्वयंसेवकों और युवाओं ने आयोजन को सफल बनाने में सक्रिय भूमिका निभाई। मजार परिसर और आसपास के क्षेत्रों में मेले जैसा माहौल रहा, जिससे स्थानीय व्यापार को भी बढ़ावा मिला।

न्यूज़ देखो: धार्मिक आयोजनों से मजबूत होता सामाजिक ताना-बाना

लेसलीगंज में अनजान शाह दाता का सलाना उर्स यह दिखाता है कि धार्मिक आयोजन केवल आस्था तक सीमित नहीं होते, बल्कि समाज में आपसी विश्वास, भाईचारे और सांस्कृतिक एकता को भी मजबूत करते हैं। ऐसे आयोजन सामाजिक समरसता की मिसाल पेश करते हैं। हर खबर पर रहेगी हमारी नजर।

प्रेम, एकता और अमन का संदेश

धार्मिक आयोजन जब समाज को जोड़ने का माध्यम बनें, तो उनकी सार्थकता और बढ़ जाती है।
अनजान शाह दाता का उर्स प्रेम और भाईचारे का जीवंत उदाहरण है।
ऐसे आयोजनों से जुड़ी सकारात्मक खबरों को आगे बढ़ाएं।
अपनी राय कमेंट करें, खबर साझा करें और सामाजिक सौहार्द का संदेश फैलाएं।

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