
#डुमरी #आध्यात्मिक_आयोजन : दुर्गा मंदिर प्रांगण में शिवगुरु परिचर्चा से जागी धार्मिक चेतना।
गुमला जिले के डुमरी स्थित दुर्गा मंदिर प्रांगण में रविवार को शिवगुरु परिचर्चा का भव्य आयोजन किया गया। इस आध्यात्मिक कार्यक्रम में रांची से आए प्रसिद्ध शिवगुरु अनुयायी संतोष पंडित मुख्य वक्ता के रूप में शामिल हुए। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में गुरुभाई, गुरुबहीनें और स्थानीय श्रद्धालु उपस्थित रहे। परिचर्चा का उद्देश्य शिवगुरु के सिद्धांतों के माध्यम से समाज में सकारात्मक सोच और सद्भाव को बढ़ावा देना रहा।
- डुमरी दुर्गा मंदिर प्रांगण में रविवार को शिवगुरु परिचर्चा का आयोजन।
- संतोष पंडित, रांची, मुख्य वक्ता के रूप में रहे उपस्थित।
- कार्यक्रम से पूर्व बाबा टांगीनाथ धाम में विधिवत पूजा-अर्चना।
- शिवगुरु की महिमा और गुरु की भूमिका पर विस्तृत विचार साझा।
- महिला, पुरुष और युवा वर्ग की व्यापक भागीदारी।
- शांति पाठ और प्रसाद वितरण के साथ कार्यक्रम का समापन।
गुमला जिले के डुमरी प्रखंड में आध्यात्मिक वातावरण उस समय जीवंत हो उठा, जब दुर्गा मंदिर प्रांगण में शिवगुरु परिचर्चा का आयोजन किया गया। रविवार को आयोजित इस कार्यक्रम में क्षेत्र के श्रद्धालुओं ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। आयोजन को लेकर पूरे इलाके में विशेष उत्साह देखा गया। कार्यक्रम का उद्देश्य शिवगुरु के विचारों और उनके बताए मार्ग को जन-जन तक पहुंचाना रहा।
कार्यक्रम से पूर्व बाबा टांगीनाथ धाम में पूजा
शिवगुरु परिचर्चा से पूर्व सभी अतिथि और शिवगुरु अनुयायी बाबा टांगीनाथ धाम पहुंचे, जहां उन्होंने विधिवत पूजा-अर्चना की। पूजा के बाद सभी गुरुजन और श्रद्धालु डुमरी स्थित दुर्गा मंदिर प्रांगण पहुंचे। यहां पारंपरिक विधि-विधान के साथ कार्यक्रम का शुभारंभ किया गया, जिससे वातावरण पूरी तरह भक्तिमय हो गया।
स्थानीय लोगों के अनुसार, बाबा टांगीनाथ धाम में पूजा के साथ कार्यक्रम की शुरुआत करना आध्यात्मिक दृष्टि से विशेष महत्व रखता है और इससे श्रद्धालुओं में ऊर्जा और आस्था का संचार होता है।
शिवगुरु परिचर्चा का विधिवत शुभारंभ
दुर्गा मंदिर प्रांगण में जैसे ही शिवगुरु परिचर्चा आरंभ हुई, पूरा परिसर श्रद्धा और शांति के भाव से भर गया। कार्यक्रम में रांची से पधारे प्रसिद्ध शिवगुरु अनुयायी और मुख्य वक्ता संतोष पंडित का श्रद्धालुओं ने गर्मजोशी से स्वागत किया। उनके साथ अनेक गुरुभाई और गुरुबहीनों की गरिमामयी उपस्थिति ने कार्यक्रम को विशेष बना दिया।
परिचर्चा के दौरान शिवगुरु परंपरा से जुड़े भजन, विचार और अनुभव साझा किए गए, जिसे उपस्थित श्रद्धालुओं ने ध्यानपूर्वक सुना।
शिवगुरु की महिमा और गुरु की भूमिका पर संदेश
मुख्य वक्ता संतोष पंडित ने अपने संबोधन में शिवगुरु की महिमा, उनके सिद्धांतों और मानव जीवन में गुरु की भूमिका पर विस्तार से प्रकाश डाला।
संतोष पंडित ने कहा: “शिवगुरु का मार्ग सत्य, सेवा और सद्भाव का मार्ग है। यदि हम इस मार्ग को अपनाएं, तो समाज में सकारात्मक परिवर्तन निश्चित रूप से संभव है।”
उन्होंने कहा कि गुरु केवल आध्यात्मिक मार्गदर्शक ही नहीं, बल्कि जीवन को सही दिशा देने वाला स्तंभ होता है। शिवगुरु की शिक्षाएं व्यक्ति को नैतिक मूल्यों से जोड़ती हैं और समाज में भाईचारे की भावना को मजबूत करती हैं।
भाईचारे और नैतिक मूल्यों का आह्वान
अपने संबोधन में संतोष पंडित ने आपसी भाईचारे, सामाजिक सद्भाव और नैतिक मूल्यों को जीवन में अपनाने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि आज के समय में आध्यात्मिक जागरूकता अत्यंत आवश्यक है, ताकि व्यक्ति भौतिकता के साथ-साथ मानवीय मूल्यों को भी महत्व दे सके।
उन्होंने यह भी कहा कि शिवगुरु की परंपरा केवल पूजा-पाठ तक सीमित नहीं है, बल्कि यह सेवा, सहयोग और समाज के प्रति उत्तरदायित्व की भावना को मजबूत करती है।
अन्य गुरुभाई और गुरुबहीनों के विचार
परिचर्चा के दौरान अन्य गुरुभाई और गुरुबहीनों ने भी अपने अनुभव और विचार साझा किए। उन्होंने शिवगुरु परंपरा से जुड़े अपने व्यक्तिगत अनुभवों को श्रद्धालुओं के समक्ष रखा और बताया कि किस प्रकार इस मार्ग ने उनके जीवन में सकारात्मक बदलाव लाए हैं।
इन अनुभवों ने उपस्थित लोगों को गहराई से प्रभावित किया और कई श्रद्धालुओं ने इसे प्रेरणादायक बताया।
बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं की उपस्थिति
कार्यक्रम में स्थानीय श्रद्धालुओं की बड़ी संख्या देखने को मिली। महिला, पुरुष और युवा वर्ग ने पूरे श्रद्धाभाव से प्रवचनों को सुना। दुर्गा मंदिर प्रांगण में अनुशासन और शांति का माहौल बना रहा, जिससे कार्यक्रम की गरिमा और बढ़ गई।
कार्यक्रम में प्रमुख रूप से रुक्मणि देवी, जुली देवी, लक्ष्मी देवी, शंकर प्रसाद, उदय गुप्ता, संजय साहू, संजीव केशरी, संतोष कुमार भगत, जया देवी, सुनीता देवी, अंजू देवी, कलावती देवी, ज्योति देवी, लतिका देवी, रीता देवी, गीता देवी, किरण देवी, मीना देवी, मीला देवी, विमला देवी, विद्या देवी सहित कई अन्य श्रद्धालु उपस्थित थे।
शांति पाठ और प्रसाद वितरण के साथ समापन
परिचर्चा कार्यक्रम का समापन शांति पाठ के साथ किया गया। इसके बाद सभी उपस्थित श्रद्धालुओं के बीच प्रसाद का वितरण किया गया। आयोजन को सफल बनाने में स्थानीय शिवगुरु अनुयायियों और दुर्गा मंदिर समिति का महत्वपूर्ण योगदान रहा।
स्थानीय लोगों ने आयोजन की सराहना करते हुए कहा कि ऐसे आध्यात्मिक कार्यक्रम समाज में सकारात्मक ऊर्जा का संचार करते हैं।
न्यूज़ देखो: आध्यात्मिक आयोजनों से मजबूत होता सामाजिक ताना-बाना
डुमरी में आयोजित शिवगुरु परिचर्चा यह दर्शाती है कि आध्यात्मिक आयोजन आज भी समाज को जोड़ने की महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। शिवगुरु के सिद्धांतों पर आधारित ऐसे कार्यक्रम नैतिक मूल्यों और भाईचारे को बढ़ावा देते हैं। स्थानीय सहभागिता यह बताती है कि लोग आध्यात्मिक जागरूकता की ओर अग्रसर हैं। भविष्य में ऐसे आयोजनों की निरंतरता समाज के लिए लाभकारी साबित हो सकती है। हर खबर पर रहेगी हमारी नजर।
आध्यात्मिक चेतना से सकारात्मक समाज की ओर
जब समाज आध्यात्मिक मूल्यों से जुड़ता है, तो आपसी विश्वास और सद्भाव स्वतः मजबूत होता है। शिवगुरु परिचर्चा जैसे आयोजन लोगों को आत्मचिंतन और सेवा के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देते हैं। ऐसे प्रयासों से सामाजिक समरसता को नई दिशा मिलती है।





