
#गढ़वा #रुद्र_महायज्ञ : बंडा पहाड़ मंदिर परिसर में श्रीराम कथा और झांकी से भक्तिमय हुआ माहौल
गढ़वा जिला मुख्यालय के ग्राम जोबरईया स्थित बंडा पहाड़ के नीलकंठ महादेव मंदिर परिसर में चल रहे विराट श्री रूद्र महायज्ञ के तहत छठे दिन आयोजित श्रीराम कथा में भगवान राम और माता सीता के पावन विवाह प्रसंग का भावपूर्ण वर्णन किया गया। कथा सुनने के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे।
- बंडा पहाड़ स्थित नीलकंठ महादेव मंदिर में 8 मार्च से चल रहा विराट श्री रूद्र महायज्ञ।
- अवध धाम से आए आचार्य पंकज शांडिल्य जी महाराज ने सुनाया भगवान राम–सीता विवाह प्रसंग।
- विवाह को बताया पवित्र संस्कार, दहेज और दिखावे से बचने का दिया संदेश।
- वृंदावन के कलाकारों ने प्रस्तुत की विवाह झांकी और मयूर नृत्य, भक्त हुए भाव-विभोर।
- यज्ञ समिति के सहयोगियों और मंदिर परिसर के विकास में योगदान देने वालों को किया गया सम्मानित।
गढ़वा जिला मुख्यालय के ग्राम जोबरईया स्थित बंडा पहाड़ के नीलकंठ महादेव मंदिर परिसर में 8 मार्च 2026 से प्रारंभ हुए विराट श्री रूद्र महायज्ञ के अंतर्गत प्रतिदिन संध्याकाल 6 बजे से पावन श्रीराम कथा का आयोजन किया जा रहा है। महायज्ञ 16 मार्च से आगे 26 मार्च तक विभिन्न धार्मिक कार्यक्रमों के साथ जारी रहेगा।
महायज्ञ के छठे दिन आयोजित श्रीराम कथा में अवध धाम से पधारे आचार्य पंकज शांडिल्य जी महाराज ने भगवान श्रीराम और माता सीता के पावन विवाह प्रसंग का भावपूर्ण वर्णन किया। कथा के दौरान पूरा कथा मंडपम भक्ति और श्रद्धा के वातावरण से सराबोर हो गया।
विवाह को बताया पवित्र संस्कार
आचार्य पंकज शांडिल्य जी महाराज ने कथा के दौरान कहा कि विवाह एक पवित्र बंधन है, जहां दो विचारों का मिलन होता है और एक नया संस्कार जन्म लेता है। उन्होंने कहा कि आज के समय में विवाह समारोहों में दहेज और दिखावे की प्रवृत्ति बढ़ती जा रही है, जो सनातन परंपरा के अनुरूप नहीं है।
उन्होंने श्रद्धालुओं से आह्वान किया कि भगवान श्रीराम के आदर्शों से प्रेरणा लेते हुए विवाह संस्कार सादगीपूर्ण और वैदिक परंपरा के अनुसार संपन्न करना चाहिए।
कथा में उन्होंने बताया कि जब भगवान श्रीराम और माता सीता का जयमाल संस्कार संपन्न हुआ, तब महाराज दशरथ को इसकी सूचना मिली। अयोध्या से आई बारात के साथ ही चारों भाइयों का विवाह संस्कार एक साथ संपन्न हुआ, जो सनातन संस्कृति का अद्भुत उदाहरण है।
विवाह झांकी और मयूर नृत्य ने बांधा समा
कथा के समापन के बाद वृंदावन से आए कलाकारों द्वारा भगवान श्रीराम और माता सीता के विवाह की सुंदर झांकी प्रस्तुत की गई। इसके साथ ही कलाकारों ने मनमोहक मयूर नृत्य प्रस्तुत कर श्रद्धालुओं को मंत्रमुग्ध कर दिया।
पूज्य महाराज जी के साथ आए संगीतकारों ने भी अपने भक्ति गीतों से माहौल को भक्तिमय बना दिया। कथा मंडप में मौजूद श्रद्धालु देर तक भक्ति रस में डूबे रहे।
रुद्राभिषेक और हवन से हुई दिन की शुरुआत
महायज्ञ के छठे दिन का कार्यक्रम सुबह भगवान भोलेनाथ के रुद्राभिषेक से प्रारंभ हुआ। इसके बाद यज्ञशाला में दैनिक हवन और पूजन संपन्न किया गया।
संध्या काल में यज्ञशाला के समीप निर्मित भाव कथा मंडपम में व्यासपीठ पूजन के साथ श्रीराम कथा अमृत प्रवचन का शुभारंभ हुआ, जिसमें सभी यजमानों ने भाग लिया।
आज की कथा के विशेष अतिथि नवादा ग्राम निवासी भारतीय सेना के जवान अकिलदेव पाल रहे। उन्होंने ठाकुर जी, कथा व्यास और यज्ञाधीश महाराज को माल्यार्पण कर उनका अभिनंदन किया।
सहयोगियों को किया गया सम्मानित
कार्यक्रम के दौरान महायज्ञ के आयोजन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले यज्ञ समिति के सदस्यों धनंजय चंद्रवंशी, उदय पाल, दसई पाल और सुविंदर राम को सम्मानित किया गया।
इसके साथ ही नीलकंठ महादेव मंदिर परिसर की सीढ़ियों और शेड में टाइल्स एवं मार्बल लगाकर मंदिर को सुंदर और व्यवस्थित बनाने में योगदान देने वाले पिंडरा और सुखवाना निवासी सिद्धनाथ हलवाई के पुत्र जयप्रकाश हलवाई और विजय प्रसाद हलवाई को भी यज्ञाधीश महाराज, प्रधान संयोजक और मुख्य यजमान द्वारा सम्मानित किया गया।
सुबह से उमड़ रही श्रद्धालुओं की भीड़
महायज्ञ के दौरान प्रतिदिन सुबह 6 बजे से ही श्रद्धालुओं की भारी भीड़ मंदिर परिसर में पहुंचने लगती है। भक्तगण “ॐ नमः शिवाय” और “हर हर महादेव” के जयकारों के साथ यज्ञशाला की परिक्रमा करते हैं, जो दोपहर तक जारी रहती है।
मेला परिसर में पूजा-प्रसाद सामग्री की दुकानें, श्रृंगार स्टोर, मिठाई की दुकानें, खिलौनों की दुकानें और झूले लोगों के आकर्षण का केंद्र बने हुए हैं।
स्वच्छता और व्यवस्था बनाए रखने की अपील
श्री रूद्र महायज्ञ के प्रधान संयोजक राकेश कुमार पाल ने आयोजन समिति के सदस्यों को संबोधित करते हुए कहा कि महायज्ञ के दौरान पूरे क्षेत्र में साफ-सफाई और स्वच्छता बनाए रखना आवश्यक है।
उन्होंने कहा कि भंडारा में प्रयुक्त गिलास और पत्तल का प्रतिदिन उचित निपटारा किया जाए तथा मेला परिसर में रखे गए पानी के टैंकरों में हमेशा पानी की निर्बाध आपूर्ति सुनिश्चित की जाए।
कार्यक्रम में सुखबीर पाल, रमेश पाल, गढ़वा प्रखंड की पूर्व प्रमुख तेतरी देवी, राम प्रसाद राम, शिक्षक रमाशंकर देव, बलराम, विजय कुमार, अमित कुमार चौबे, हिमांशु पाठक तथा जिला प्रशासन की ओर से प्रतिनियुक्त दंडाधिकारी विनोद कुमार गुप्ता सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित थे।
न्यूज़ देखो : धार्मिक आयोजनों से मजबूत होती है सामाजिक एकता
ऐसे धार्मिक और सांस्कृतिक आयोजन न केवल आस्था को मजबूत करते हैं बल्कि समाज में आपसी सहयोग, संस्कृति और परंपराओं को भी जीवंत बनाए रखते हैं। महायज्ञ जैसे आयोजनों में हजारों लोगों की भागीदारी सामाजिक समरसता का भी प्रतीक बनती है।
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