पिंडारकोम में ग्रामीणों की ऐतिहासिक महापंचायत, सौरभ श्रीवास्तव बोले — ग्रामसभा की अनुमति बिना नहीं होगा कोयला उठाव

पिंडारकोम में ग्रामीणों की ऐतिहासिक महापंचायत, सौरभ श्रीवास्तव बोले — ग्रामसभा की अनुमति बिना नहीं होगा कोयला उठाव

author Ravikant Kumar Thakur
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#लातेहार #ग्रामसभा_आंदोलन : पिंडारकोम में ग्रामीणों ने जल-जंगल-जमीन और रोजगार अधिकारों को लेकर एकजुटता दिखाई।

बालूमाथ प्रखंड के पिंडारकोम गांव में रविवार को NTPC, CCL और PNM कंपनी के खिलाफ ग्रामीणों ने बड़ी ग्रामसभा आयोजित कर स्थानीय अधिकारों की आवाज बुलंद की। ग्रामसभा में रोजगार, मुआवजा, हाईवा परिचालन और जमीन अधिग्रहण को लेकर ग्रामीणों ने कंपनियों पर गंभीर आरोप लगाए। झामुमो नेता सौरभ श्रीवास्तव ने ग्रामीणों के समर्थन में खुलकर आवाज उठाते हुए कहा कि ग्रामसभा की अनदेखी कर एक ढेला कोयला भी नहीं उठाया जा सकेगा। बैठक में ग्रामीणों ने जल-जंगल-जमीन की रक्षा के लिए अंतिम दम तक संघर्ष करने का संकल्प लिया।

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  • पिंडारकोम गांव में NTPC, CCL और PNM के खिलाफ बड़ी ग्रामसभा आयोजित हुई।
  • ग्रामीणों ने स्थानीय ट्रकों को काम देने और हाईवा परिचालन बंद करने की मांग उठाई।
  • सौरभ श्रीवास्तव ने कहा — “ग्रामीणों के हक पर डाका किसी कीमत पर बर्दाश्त नहीं होगा।”
  • ग्रामीणों ने 1962 से लंबित मुआवजा और रोजगार नहीं मिलने का आरोप लगाया।
  • ग्रामसभा में 14 सूत्री प्रस्ताव पारित कर CCL प्रबंधन से पुरानी व्यवस्था बहाल करने की मांग की गई।
  • बैठक में मुखिया बिमला देवी, ग्राम प्रधान रामकुमार यादव सहित सैकड़ों ग्रामीण मौजूद रहे।

लातेहार जिले के बालूमाथ प्रखंड अंतर्गत पिंडारकोम गांव रविवार को ग्रामीण एकजुटता और अधिकारों की आवाज का केंद्र बन गया। NTPC, CCL एवं PNM कंपनी के खिलाफ आयोजित ग्रामसभा में सैकड़ों ग्रामीण शामिल हुए और स्थानीय हितों की अनदेखी को लेकर खुलकर नाराजगी जताई। ग्रामीणों ने रोजगार, मुआवजा, जमीन अधिग्रहण और हाईवा परिचालन के मुद्दे पर कंपनियों के खिलाफ संघर्ष जारी रखने का संकल्प लिया। बैठक के दौरान पूरे क्षेत्र में ग्रामीणों की एकता और आक्रोश साफ दिखाई दिया।

ग्रामसभा में उठी रोजगार और अधिकारों की आवाज

ग्रामसभा की अध्यक्षता ग्राम प्रधान रामकुमार यादव ने की, जबकि बसिया पंचायत की मुखिया बिमला देवी विशेष रूप से मौजूद रहीं। कार्यक्रम का संचालन गंगेश्वर यादव ने किया। बैठक में मुख्य अतिथि के रूप में झारखंड मुक्ति मोर्चा के नेता सौरभ श्रीवास्तव उपस्थित रहे।

ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि NTPC, CCL और PNM कंपनियां स्थानीय लोगों को रोजगार देने के बजाय बाहरी लोगों और हाईवा वाहनों को प्राथमिकता दे रही हैं। ग्रामीणों का कहना था कि उनके पास स्वयं के ट्रक होने के बावजूद स्थानीय युवाओं और वाहन मालिकों को नजरअंदाज किया जा रहा है।

ग्रामीणों ने कहा कि इससे सैकड़ों परिवारों के सामने रोजी-रोटी का संकट खड़ा हो गया है और स्थानीय अर्थव्यवस्था प्रभावित हो रही है।

1962 से अधिग्रहित जमीन का नहीं मिला पूरा मुआवजा

बैठक के दौरान ग्रामीणों ने वर्ष 1962 में CCL द्वारा अधिग्रहित जमीन का मुद्दा भी जोरदार तरीके से उठाया। ग्रामीणों का आरोप था कि दशकों बीत जाने के बावजूद प्रभावित परिवारों को आज तक उचित मुआवजा और रोजगार नहीं मिला।

ग्रामीणों ने यह भी कहा कि सेक्शन-9 लागू कर ग्रामीणों की जमीनों पर नियंत्रण किया गया, लेकिन विस्थापित परिवारों के पुनर्वास और रोजगार को लेकर कोई ठोस पहल नहीं की गई।

ग्राम प्रधान रामकुमार यादव ने कहा: “जमीन हमारी गई, लेकिन बदले में न रोजगार मिला और न न्याय। अब ग्रामीण पूरी तरह एकजुट होकर अपने अधिकार की लड़ाई लड़ेंगे।”

हाईवा परिचालन को लेकर ग्रामीणों में भारी नाराजगी

ग्रामसभा में हाईवा परिचालन को लेकर ग्रामीणों ने गहरा आक्रोश व्यक्त किया। ग्रामीणों का कहना था कि तेज गति से चलने वाले हाईवा वाहनों के कारण सड़क दुर्घटनाओं का खतरा लगातार बढ़ता जा रहा है।

ग्रामीणों ने बताया कि गांव के बच्चे स्कूल आने-जाने के दौरान खतरे में रहते हैं। साथ ही हाईवा से उड़ने वाली धूल के कारण लोगों में सांस और अन्य स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं बढ़ रही हैं।

ग्रामीणों ने एक स्वर में कहा कि गांव में हाईवा परिचालन किसी भी स्थिति में स्वीकार नहीं किया जाएगा और स्थानीय ट्रकों को प्राथमिकता देनी होगी।

सौरभ श्रीवास्तव ने कंपनियों को दी चेतावनी

ग्रामसभा में पहुंचे झामुमो नेता सौरभ श्रीवास्तव ने ग्रामीणों की मांगों का समर्थन करते हुए कंपनियों और प्रशासन को स्पष्ट संदेश दिया।

सौरभ श्रीवास्तव ने कहा: “ग्रामीणों के हक पर डाका किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। ग्रामसभा और स्थानीय लोगों की अनदेखी कर एक ढेला कोयला भी नहीं उठाया जा सकता।”

उन्होंने आगे कहा कि जल-जंगल-जमीन की लड़ाई में वे अंतिम पड़ाव तक ग्रामीणों के साथ खड़े रहेंगे और विस्थापित परिवारों को न्याय दिलाने के लिए हर स्तर पर आवाज उठाई जाएगी।

उन्होंने कंपनियों से स्थानीय हितों का सम्मान करने और रोजगार में स्थानीय युवाओं को प्राथमिकता देने की मांग की।

ग्रामसभा में पारित हुआ 14 सूत्री प्रस्ताव

बैठक के दौरान ग्रामीणों ने हाथ उठाकर भगवान और धरती माता को साक्षी मानते हुए अपने अधिकारों की रक्षा का संकल्प लिया। ग्रामसभा में स्थानीय हितों को ध्यान में रखते हुए 14 सूत्री प्रस्ताव पारित किया गया।

इन प्रस्तावों में प्रमुख रूप से बंद पड़ी कोलियरी को पूर्व व्यवस्था के तहत चालू करने, स्थानीय ट्रकों को प्राथमिकता देने, विस्थापितों को रोजगार देने और ग्रामीणों की सहमति के बिना किसी भी नई व्यवस्था को लागू नहीं करने की मांग शामिल रही।

मुखिया बिमला देवी ने कहा: “गांव की सहमति के बिना कोई भी कंपनी यहां काम नहीं कर सकती। जल-जंगल-जमीन हमारी पहचान है और इसकी रक्षा हर हाल में की जाएगी।”

पूरे क्षेत्र में चर्चा का विषय बनी ग्रामसभा

पिंडारकोम में आयोजित इस महापंचायत और ग्रामीणों की एकजुटता की चर्चा पूरे बालूमाथ और तेतरियाखांड़ क्षेत्र में तेज हो गई है। ग्रामीणों के बढ़ते विरोध और एकजुटता को देखते हुए क्षेत्र में कंपनियों पर दबाव बढ़ता दिखाई दे रहा है।

स्थानीय लोगों का मानना है कि यदि ग्रामीण इसी तरह एकजुट रहे तो आने वाले समय में कंपनियों को स्थानीय मांगों पर गंभीरता से विचार करना पड़ेगा।

बैठक में बिमला देवी, रामकुमार यादव, गंगेश्वर यादव और सौरभ श्रीवास्तव के अलावा बड़ी संख्या में ग्रामीण एवं स्थानीय प्रतिनिधि उपस्थित रहे।

न्यूज़ देखो: पिंडारकोम की आवाज अब सिर्फ गांव तक सीमित नहीं

पिंडारकोम की ग्रामसभा ने यह स्पष्ट कर दिया है कि अब ग्रामीण अपने अधिकारों को लेकर पहले से अधिक जागरूक और संगठित हैं। जल-जंगल-जमीन, रोजगार और स्थानीय भागीदारी जैसे मुद्दे अब सिर्फ गांव की समस्या नहीं बल्कि पूरे क्षेत्र की बड़ी सामाजिक और आर्थिक बहस बन चुके हैं।

यदि वर्षों से लंबित मुआवजा, रोजगार और विस्थापन जैसे मामलों का समाधान समय पर किया जाता तो शायद आज यह आक्रोश देखने को नहीं मिलता। प्रशासन और कंपनियों दोनों के लिए यह संकेत है कि स्थानीय लोगों की सहमति और भागीदारी के बिना विकास परियोजनाओं को आगे बढ़ाना आसान नहीं होगा।

अब नजर इस बात पर रहेगी कि कंपनियां और प्रशासन ग्रामीणों की मांगों पर क्या रुख अपनाते हैं और क्या संवाद के जरिए समाधान निकालने की दिशा में ठोस पहल होती है।

हर खबर पर रहेगी हमारी नजर।

अपने अधिकारों के प्रति जागरूक बनें, गांव और समाज की आवाज को मजबूत करें

लोकतंत्र में ग्रामसभा सिर्फ एक बैठक नहीं बल्कि ग्रामीणों की सबसे बड़ी ताकत होती है। जब लोग एकजुट होकर अपने हक और भविष्य के लिए आवाज उठाते हैं, तभी बदलाव की राह बनती है।

स्थानीय रोजगार, सुरक्षित पर्यावरण और सम्मानजनक जीवन हर नागरिक का अधिकार है। जरूरत है जागरूकता, एकता और शांतिपूर्ण संघर्ष की।

यदि आपके क्षेत्र में भी ऐसी समस्याएं हैं तो उन्हें सामने लाएं, प्रशासन तक पहुंचाएं और लोकतांत्रिक तरीके से अपनी बात रखें।

अपनी राय कमेंट में जरूर दें, खबर को ज्यादा से ज्यादा लोगों तक साझा करें और अपने क्षेत्र की आवाज को मजबूत बनाने में भागीदार बनें।

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Written by

चंदवा, लातेहार

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