गिरिडीह के पारसनाथ पहाड़ी क्षेत्र में पुलिस-सीआरपीएफ का संयुक्त अभियान, नक्सलियों का छिपाया गया सामान बरामद

गिरिडीह के पारसनाथ पहाड़ी क्षेत्र में पुलिस-सीआरपीएफ का संयुक्त अभियान, नक्सलियों का छिपाया गया सामान बरामद

author Surendra Verma
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#गिरिडीह #नक्सलअभियान : पारसनाथ पहाड़ी इलाके में दो दिवसीय सर्च ऑपरेशन, बरामद हुई नक्सली सामग्रियां
  • गिरिडीह पुलिस, सीआरपीएफ 154 बटालियन और कोबरा 203 बटालियन ने संयुक्त अभियान चलाया।
  • 1 और 2 नवम्बर 2025 को मधुबन थाना क्षेत्र के पारसनाथ पहाड़ी इलाके में अभियान संचालित हुआ।
  • जिरिओबेरा और सतकटिया गांवों के आसपास जंगल में नक्सलियों द्वारा छिपाई गई सामग्रियां बरामद की गईं।
  • बरामद सामग्री में सेफ्टी फ्यूज़ 170 मीटर, इग्निटर सेट 261 अद्द, नक्सली झंडे और दस्तावेज शामिल हैं।
  • पुलिस ने बताया — नक्सली इस क्षेत्र में दोबारा सक्रिय होने की कोशिश में थे, जिसे नाकाम किया गया।

गिरिडीह जिले में पुलिस अधीक्षक को मिली गुप्त सूचना के आधार पर जिला पुलिस, सीआरपीएफ 154 बटालियन और कोबरा 203 बटालियन की संयुक्त टीम ने 1 और 2 नवम्बर 2025 को मधुबन थाना क्षेत्र के पारसनाथ पहाड़ी इलाके में सघन छापेमारी अभियान चलाया। यह क्षेत्र लंबे समय से नक्सली गतिविधियों के लिए संवेदनशील माना जाता है। अभियान का उद्देश्य नक्सलियों के संभावित ठिकानों की खोज और उनके संगठन की गतिविधियों को कमजोर करना था।

दो दिवसीय अभियान में जंगलों की खाक छानी गई

दो दिनों तक चले इस संयुक्त अभियान के दौरान सुरक्षा बलों ने जिरिओबेरा और सतकटिया गांवों के आसपास के घने जंगलों में गहन तलाशी ली। पहाड़ी और कठिन भौगोलिक परिस्थितियों के बावजूद जवानों ने इलाके की हर संभावित जगह को खंगाला। तलाशी के दौरान कई स्थानों पर संदिग्ध वस्तुएं मिलने पर सुरक्षाकर्मियों ने सावधानीपूर्वक जांच की।

बरामद हुई नक्सली सामग्रियों की सूची

छापेमारी के दौरान सुरक्षाबलों को कई प्रतिबंधित वस्तुएं और नक्सली प्रचार सामग्री बरामद हुईं। इनमें सेफ्टी फ्यूज़ 170 मीटर, इग्निटर सेट स्लीव 261 अद्द, खाली खोखा (8 एमएम) 3 अद्द, नक्सली झंडा 2 अद्द, तथा नक्सली साहित्य एवं दस्तावेज शामिल हैं। ये सभी वस्तुएं गहरे जंगल में मिट्टी और पत्थरों से ढके स्थान पर छिपाकर रखी गई थीं।

पुलिस सूत्रों के अनुसार: “बरामद सामग्री इस बात का प्रमाण है कि नक्सली संगठन इस इलाके में फिर से सक्रियता बढ़ाने की कोशिश कर रहे थे। सुरक्षा बलों की सतर्कता के कारण उनकी योजना समय रहते नाकाम कर दी गई।”

नक्सल गतिविधियों पर सुरक्षा बलों का बढ़ता दबाव

पुलिस अधीक्षक के नेतृत्व में चलाए जा रहे इस अभियान का उद्देश्य नक्सलियों की जमीनी पकड़ को खत्म करना और इलाके में शांति बनाए रखना है। पिछले कुछ महीनों में गिरिडीह और आसपास के क्षेत्रों में कई छोटे-बड़े अभियान चलाए गए हैं, जिनसे नक्सलियों की गतिविधियों में कमी आई है।

स्थानीय लोगों के अनुसार, पारसनाथ पहाड़ी के आसपास के कई गांवों में अब ग्रामीण सामान्य जीवन में लौटने लगे हैं। सुरक्षा बलों की लगातार उपस्थिति से क्षेत्र में विश्वास और सुरक्षा की भावना मजबूत हुई है।

सुरक्षाबलों की भूमिका सराहनीय

सीआरपीएफ 154 बटालियन और कोबरा 203 बटालियन के जवानों ने इस अभियान में अभूतपूर्व समर्पण दिखाया। कठिन पहाड़ी इलाकों में 48 घंटे तक लगातार सर्च ऑपरेशन चलाना किसी चुनौती से कम नहीं था। पुलिस अधिकारियों ने बताया कि इलाके में आगे भी सघन गश्त और छापेमारी जारी रहेगी ताकि नक्सल संगठन दोबारा सक्रिय न हो सकें।

बरामद दस्तावेजों से मिल सकते हैं बड़े सुराग

बरामद नक्सली दस्तावेजों में संगठन की गतिविधियों, संभावित ठिकानों और सदस्य सूची से जुड़ी जानकारी मिलने की संभावना है। पुलिस इन दस्तावेजों का बारीकी से विश्लेषण कर रही है। इससे नक्सलियों के नेटवर्क, आपूर्ति स्रोत और संपर्क चैनलों पर भी नई जानकारी मिलने की उम्मीद है।

अभियान का असर और जनता की प्रतिक्रिया

गिरिडीह में सुरक्षा बलों के इस कदम का स्थानीय लोगों ने स्वागत किया है। ग्रामीणों का कहना है कि हाल के वर्षों में पुलिस की तत्परता और अभियान ने इलाके को अधिक सुरक्षित बनाया है। कई गांवों में अब लोग बिना भय के खेती-किसानी और अपने सामान्य जीवन में जुट गए हैं।

एक ग्रामीण ने कहा: “पहले रात में डर का माहौल रहता था, अब पुलिस की मौजूदगी से शांति है। हमें उम्मीद है कि यह स्थिति कायम रहेगी।”

न्यूज़ देखो: गिरिडीह की धरती पर सुरक्षा बलों की बड़ी उपलब्धि

इस अभियान ने यह साबित कर दिया कि गिरिडीह पुलिस और केंद्रीय बल नक्सल उन्मूलन के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध हैं। नक्सलियों के छिपाए गए विस्फोटक और दस्तावेज़ बरामद होना सुरक्षा व्यवस्था की प्रभावी निगरानी का संकेत है। इस कार्रवाई से न केवल नक्सली संगठन की योजना विफल हुई, बल्कि क्षेत्र में आम नागरिकों का विश्वास भी और अधिक मजबूत हुआ।

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नक्सल प्रभावित इलाकों में शांति बनाए रखना केवल पुलिस की नहीं, बल्कि हर नागरिक की जिम्मेदारी है। हमें सहयोग, सतर्कता और संवाद के जरिए समाज में स्थिरता लानी होगी। अगर आप ऐसे किसी संदिग्ध गतिविधि को देखते हैं, तो तुरंत प्रशासन को सूचित करें।
आइए मिलकर झारखंड को भयमुक्त और विकासशील बनाएं।
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Written by

डुमरी, गिरिडीह

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