#बरवाडीह #क्षतिग्रस्त_पुल : कुटमू–सरईडीह मुख्य मार्ग के जर्जर पुल पर वाहन अनियंत्रित होने से हादसा टला, ग्रामीणों ने की अविलंब मरम्मत की मांग
लातेहार जिले के बरवाडीह प्रखंड अंतर्गत कुटमू–सरईडीह मुख्य मार्ग स्थित बड़का पुल पर शनिवार को एक बड़ा हादसा टल गया, जब एक कार क्षतिग्रस्त पुल पार करते समय अनियंत्रित हो गई। चालक की सूझबूझ से सभी सवार सुरक्षित बच गए, लेकिन घटना के बाद मार्ग पर जाम और लोगों में आक्रोश का माहौल बन गया।
- कुटमू–सरईडीह मुख्य मार्ग के बड़का पुल पर बड़ा हादसा टला।
- जर्जर पुल पार करते समय कार हुई अनियंत्रित, चालक की सूझबूझ से टली दुर्घटना।
- घटना के बाद मौके पर स्थानीय लोगों की भीड़, मार्ग पर लगा जाम।
- 28 जून की भारी बारिश में क्षतिग्रस्त हुआ था पुल, अब तक नहीं हुई मरम्मत।
- ग्रामीणों ने प्रशासन से अविलंब मरम्मत या पुनर्निर्माण की उठाई मांग।
लातेहार जिले के बरवाडीह प्रखंड क्षेत्र के कुटमू–सरईडीह मुख्य मार्ग स्थित कुटमू के समीप बड़का पुल पर शनिवार को उस समय अफरा-तफरी का माहौल बन गया, जब एक कार पुल पार करने के दौरान दुर्घटना का शिकार होने से बाल-बाल बच गई। जानकारी के अनुसार सरईडीह गांव से अपने घर लौट रहे कार सवार जैसे ही जर्जर पुल पर पहुंचे, वाहन अचानक अनियंत्रित हो गया और पलटने की स्थिति में पहुंच गया। हालांकि चालक की सूझबूझ और सतर्कता के कारण बड़ा हादसा टल गया और सभी यात्री सुरक्षित बच निकले।
घटना की सूचना मिलते ही आसपास के ग्रामीण बड़ी संख्या में मौके पर जुट गए। क्षतिग्रस्त पुल और संभावित खतरे को देखने के लिए लोगों की भीड़ उमड़ पड़ी, जिससे कुछ समय के लिए उस मार्ग पर आवागमन पूरी तरह बाधित हो गया और सड़क जाम की स्थिति बन गई।
लंबे समय से जर्जर है बड़का पुल
स्थानीय लोगों के अनुसार पोखरी कलां–सरईडीह मार्ग पर शिव मंदिर के समीप स्थित यह पुल पिछले वर्ष 28 जून को हुई भारी बारिश के दौरान गंभीर रूप से क्षतिग्रस्त हो गया था। बारिश के कारण पुल में दरारें पड़ गईं और कई हिस्सों में धंसाव भी हो गया। इसके बावजूद अब तक पुल की स्थायी मरम्मत नहीं कराई गई है।
ग्रामीणों का कहना है कि प्रशासन की ओर से बीच-बीच में मिट्टी भरकर आवागमन चालू रखने का प्रयास किया गया, लेकिन हाल की बारिश में वह मिट्टी भी बह गई, जिससे पुल और अधिक खतरनाक हो गया है। वर्तमान स्थिति में पुल पर बड़े वाहन तो दूर, छोटे वाहन और बाइक चालकों के लिए भी गुजरना जोखिम भरा हो गया है।
चालक की सतर्कता से बची कई जिंदगियां
प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, कार पुल पार करते समय अचानक झटका खाकर असंतुलित हो गई थी। पुल की टूटी सतह और धंसे हिस्से के कारण वाहन पलट सकता था, लेकिन चालक ने संयम और समझदारी दिखाते हुए वाहन को नियंत्रित कर लिया। यदि थोड़ी भी लापरवाही होती तो एक बड़ा हादसा हो सकता था।
इस घटना के बाद वाहन सवारों में दहशत का माहौल देखा गया, जबकि आसपास मौजूद लोगों ने राहत की सांस ली कि कोई जनहानि नहीं हुई।
मुख्य संपर्क मार्ग होने से बढ़ा खतरा
ग्रामीणों ने बताया कि यह पुल क्षेत्र के लिए एक प्रमुख संपर्क मार्ग है, जो घनी आबादी वाले कई गांवों को जोड़ता है। इस मार्ग से प्रतिदिन सैकड़ों छोटे-बड़े वाहन, स्कूल वाहन, बाइक सवार और पैदल यात्री गुजरते हैं। पुल की खराब स्थिति के कारण हर समय दुर्घटना की आशंका बनी रहती है।
पुल में लगातार बढ़ती दरारें, धंसाव और असमतल सतह के कारण विशेषकर रात के समय आवागमन बेहद खतरनाक हो जाता है। कई बार छोटे वाहन फंसने और फिसलने की घटनाएं भी सामने आ चुकी हैं।
कई बार दी गई सूचना, फिर भी नहीं हुई कार्रवाई
स्थानीय ग्रामीणों का आरोप है कि पुल की जर्जर स्थिति को लेकर कई बार विभागीय अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों को सूचना दी गई, लेकिन अब तक कोई ठोस पहल नहीं की गई है। अस्थायी मरम्मत के नाम पर केवल मिट्टी डालकर औपचारिकता पूरी की गई, जिससे समस्या का स्थायी समाधान नहीं हो सका।
ग्रामीणों का कहना है कि यदि समय रहते पुल की मरम्मत या पुनर्निर्माण नहीं किया गया तो भविष्य में कोई बड़ा हादसा हो सकता है, जिसकी जिम्मेदारी प्रशासन की होगी।
जाम से प्रभावित हुआ आवागमन
घटना के बाद पुल की स्थिति देखने के लिए लोगों की भीड़ लग गई, जिससे मार्ग पर वाहनों की लंबी कतार लग गई और सड़क जाम की स्थिति उत्पन्न हो गई। कई वाहन चालकों को वैकल्पिक मार्ग की तलाश करनी पड़ी, जबकि कुछ लोग घंटों तक जाम में फंसे रहे।
स्कूल जाने वाले बच्चों, मरीजों और दैनिक यात्रियों को भी इस जाम के कारण काफी परेशानी का सामना करना पड़ा।
ग्रामीणों की प्रशासन से अविलंब कार्रवाई की मांग
स्थानीय ग्रामीणों ने प्रशासन से अविलंब पुल की मरम्मत या पुनर्निर्माण कराने की मांग की है। उनका कहना है कि यह पुल केवल एक मार्ग नहीं बल्कि क्षेत्र की जीवनरेखा है और इसकी अनदेखी किसी बड़े हादसे को न्योता देने के समान है। ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द ठोस कदम नहीं उठाए गए तो वे आंदोलन करने को बाध्य होंगे।
न्यूज़ देखो: लापरवाही बन सकती है बड़े हादसे की वजह
बरवाडीह क्षेत्र का यह जर्जर पुल प्रशासनिक उदासीनता की गंभीर तस्वीर पेश करता है। आठ माह से अधिक समय बीत जाने के बावजूद स्थायी मरम्मत नहीं होना चिंताजनक है। यदि समय रहते संरचनात्मक जांच और पुनर्निर्माण नहीं किया गया, तो भविष्य में बड़ी दुर्घटना की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता। हर खबर पर रहेगी हमारी नजर।
सुरक्षित सड़कों के लिए जागरूकता और जिम्मेदारी दोनों जरूरी
सड़क और पुल केवल ढांचा नहीं, लोगों की सुरक्षा से जुड़ा जीवन का आधार हैं।
समय पर मरम्मत से अनगिनत जिंदगियां बचाई जा सकती हैं।
प्रशासन और जनप्रतिनिधियों को जनसुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देनी चाहिए।
आप भी अपने क्षेत्र की समस्याओं को आवाज दें और जागरूक नागरिक बनें।
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