
#पालकोट #कानूनी_जागरूकता : डालसा गुमला के तत्वावधान में ग्रामीणों को कानून और साइबर सुरक्षा की जानकारी दी गई।
गुमला जिले के पालकोट प्रखंड स्थित सेंटर कॉलोनी बस्ती पंचायत में 16 जनवरी 2026 को बाल विवाह निषेध और साइबर ठगी से बचाव को लेकर जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया। यह कार्यक्रम नालसा नई दिल्ली और झालसा रांची के निर्देश पर जिला विधिक सेवा प्राधिकार गुमला द्वारा किया गया। ग्रामीणों को कानून के प्रावधानों, दंड और बचाव उपायों की विस्तृत जानकारी दी गई। कार्यक्रम का उद्देश्य सामाजिक कुरीतियों और बढ़ती साइबर ठगी पर प्रभावी नियंत्रण को लेकर जन-जागरूकता बढ़ाना रहा।
- पालकोट प्रखंड के सेंटर कॉलोनी बस्ती में जागरूकता कार्यक्रम।
- बाल विवाह निषेध अधिनियम 2006 की विस्तृत जानकारी।
- साइबर ठगी से बचाव को लेकर आवश्यक सुझाव।
- डालसा गुमला की निशुल्क कानूनी सहायता पर जानकारी।
- ग्रामीणों की बड़ी भागीदारी।
गुमला जिले के पालकोट प्रखंड अंतर्गत बाघिमा पंचायत की सेंटर कॉलोनी बस्ती में सामाजिक और कानूनी जागरूकता को लेकर एक महत्वपूर्ण पहल की गई। दिनांक 16 जनवरी 2026 (शुक्रवार) को आयोजित इस कार्यक्रम में ग्रामीणों को बाल विवाह जैसी सामाजिक कुरीति और बढ़ती साइबर ठगी के खतरों से अवगत कराया गया। कार्यक्रम में ग्रामीणों की सक्रिय भागीदारी देखने को मिली, जिससे यह स्पष्ट हुआ कि कानून संबंधी जानकारी को लेकर लोगों में जागरूकता की आवश्यकता और रुचि दोनों मौजूद हैं।
यह जागरूकता कार्यक्रम नालसा, नई दिल्ली एवं झालसा, रांची के दिशा-निर्देशन में जिला विधिक सेवा प्राधिकार (डालसा), गुमला के तत्वावधान में संपन्न हुआ। पूरे कार्यक्रम का संचालन पीएलवी (पैरालीगल वॉलंटियर) राजू साहू द्वारा किया गया।
डालसा गुमला के मार्गदर्शन में आयोजन
यह कार्यक्रम डालसा गुमला के अध्यक्ष माननीय श्री ध्रुव चंद्र मिश्रा एवं सचिव श्री रामकुमार लाल गुप्ता के मार्गदर्शन में आयोजित किया गया। कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों में कानून की जानकारी को सरल भाषा में पहुंचाना और लोगों को उनके अधिकारों व कर्तव्यों के प्रति सजग बनाना था।
आयोजकों ने बताया कि ग्रामीण इलाकों में आज भी बाल विवाह और साइबर ठगी जैसी समस्याएं गंभीर चुनौती बनी हुई हैं, जिन्हें रोकने के लिए जागरूकता सबसे प्रभावी हथियार है।
बाल विवाह निषेध अधिनियम 2006 की जानकारी
कार्यक्रम के दौरान ग्रामीणों को बाल विवाह निषेध अधिनियम, 2006 के बारे में विस्तार से बताया गया। उपस्थित लोगों को जानकारी दी गई कि कानून के अनुसार:
- बालिका की न्यूनतम वैवाहिक आयु 18 वर्ष
- बालक की न्यूनतम वैवाहिक आयु 21 वर्ष
ग्रामीणों को यह भी स्पष्ट किया गया कि यदि कोई व्यक्ति बाल विवाह कराता है या इसमें किसी भी प्रकार से शामिल होता है, तो वह कानूनन अपराधी माना जाएगा।
पीएलवी राजू साहू ने कहा: “बाल विवाह सिर्फ सामाजिक अपराध नहीं, बल्कि गंभीर कानूनी अपराध है। विवाह कराने वाले, माता-पिता, रिश्तेदार और आयोजन में शामिल सभी लोग दोषी माने जाते हैं।”
उन्होंने बताया कि बाल विवाह के मामलों में 2 वर्ष तक का कारावास और एक लाख रुपये तक के जुर्माने का प्रावधान है। इस जानकारी को सुनकर कई ग्रामीणों ने स्वीकार किया कि उन्हें पहले इन दंडात्मक प्रावधानों की पूरी जानकारी नहीं थी।
साइबर ठगी से बचाव पर विशेष सत्र
कार्यक्रम का दूसरा महत्वपूर्ण विषय साइबर ठगी से बचाव रहा। ग्रामीणों को बताया गया कि वर्तमान समय में साइबर अपराध तेजी से बढ़ रहे हैं और ग्रामीण क्षेत्र भी इससे अछूते नहीं हैं।
ग्रामीणों को सावधान करते हुए कहा गया कि:
- किसी अनजान फोन कॉल पर भरोसा न करें
- सोशल मीडिया संदेशों में आए लिंक या कॉल से सतर्क रहें
- बैंक खाता विवरण, ओटीपी, एटीएम पिन किसी के साथ साझा न करें
जागरूकता सत्र में बताया गया: “यदि किसी प्रकार की साइबर ठगी होती है, तो घबराने के बजाय तुरंत राष्ट्रीय साइबर हेल्पलाइन नंबर 1930 पर शिकायत दर्ज कराएं।”
इस जानकारी को लेकर ग्रामीणों ने कई सवाल पूछे, जिनका सरल भाषा में समाधान किया गया।
निशुल्क कानूनी सहायता की जानकारी
कार्यक्रम में यह भी बताया गया कि डालसा, गुमला के माध्यम से जरूरतमंद और पात्र लोगों को निशुल्क कानूनी सहायता उपलब्ध कराई जाती है। इसमें निर्धन, असहाय, महिलाएं, बच्चे, दिव्यांग और अन्य पात्र वर्ग शामिल हैं।
ग्रामीणों को बताया गया कि यदि किसी को कानूनी मदद की आवश्यकता हो, तो वे सीधे डालसा गुमला से संपर्क कर सकते हैं और बिना किसी शुल्क के कानूनी सलाह और सहायता प्राप्त कर सकते हैं।
ग्रामीणों की सक्रिय भागीदारी
इस जागरूकता कार्यक्रम में बड़ी संख्या में ग्रामीण महिला-पुरुष उपस्थित रहे। ग्रामीणों ने कार्यक्रम को उपयोगी और ज्ञानवर्धक बताया। कई लोगों ने कहा कि इस तरह के कार्यक्रम गांव-गांव में आयोजित होने चाहिए ताकि कानून की सही जानकारी समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंच सके।
कार्यक्रम के अंत में उपस्थित ग्रामीणों ने बाल विवाह जैसी कुरीतियों को रोकने और साइबर ठगी से सतर्क रहने का संकल्प लिया।
न्यूज़ देखो: जागरूकता से ही बदलेगा सामाजिक परिदृश्य
पालकोट की सेंटर कॉलोनी बस्ती में आयोजित यह कार्यक्रम साबित करता है कि कानून की सही जानकारी समाज में सकारात्मक बदलाव ला सकती है। बाल विवाह और साइबर ठगी जैसी समस्याओं पर नियंत्रण तभी संभव है जब लोग जागरूक हों। अब जरूरत है कि ऐसे कार्यक्रमों की निरंतरता बनी रहे और प्रशासन इसकी प्रभावशीलता पर नजर रखे। हर खबर पर रहेगी हमारी नजर।
कानून जानिए, समाज को सुरक्षित बनाइए
कानून की जानकारी सिर्फ किताबों तक सीमित न रहे, बल्कि जीवन का हिस्सा बने। इस तरह की जागरूकता पहल को आगे बढ़ाने में सहयोग करें। अपनी राय साझा करें, खबर को दूसरों तक पहुंचाएं और समाज को सुरक्षित व जागरूक बनाने में भूमिका निभाएं।





