एक माँ की पुकार कोई तो बचा लो मेरे राम की जान: मासूम के गले में फंसा सिक्का, दो घंटे तक नहीं मिली एम्बुलेंस

एक माँ की पुकार कोई तो बचा लो मेरे राम की जान: मासूम के गले में फंसा सिक्का, दो घंटे तक नहीं मिली एम्बुलेंस

author Saroj Verma
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#दुमका #स्वास्थ्यव्यवस्था : चार वर्षीय मासूम की जान पर बनी, बस से ले जाना पड़ा अस्पताल
  • चार वर्षीय राम मड़ैया के गले में सिक्का फंस गया।
  • गोपीकांदर सीएचसी में भर्ती कर डॉक्टर ने रेफर किया।
  • दो घंटे इंतजार के बाद भी एम्बुलेंस नहीं मिली।
  • मजबूरी में परिवार ने यात्री बस से दुमका अस्पताल पहुंचाया।
  • मासूम की हालत अब भी नाजुक बनी हुई है।

दुमका जिले के गोपीकांदर प्रखंड में मंगलवार को एक दिल दहला देने वाली घटना सामने आई। खेलते-खेलते चार वर्षीय मासूम राम मड़ैया के गले में सिक्का फंस गया, जिससे उसकी सांसें थमने लगीं। घबराए परिजन उसे तुरंत गोपीकांदर सीएचसी लेकर पहुंचे, जहां प्राथमिक इलाज के बाद डॉक्टरों ने उसे दुमका मेडिकल कॉलेज रेफर कर दिया।

एम्बुलेंस का इंतजार और माँ की बेबसी

परिजन ने तुरंत एम्बुलेंस की मांग की, लेकिन लगातार दो घंटे इंतजार करने के बाद भी एम्बुलेंस नहीं पहुंची। इस दौरान बच्चे की माँ बार-बार रोते हुए गुहार लगाती रही – “कोई तो मेरे राम को बचा लो!” लेकिन प्रशासनिक उदासीनता के कारण परिवार को मजबूरी में यात्री बस से बच्चे को दुमका मेडिकल कॉलेज ले जाना पड़ा।

यात्री बस से पहुँचा अस्पताल

बच्चे को बस से ले जाने के दौरान परिजन और सहयात्रियों ने उसे संभाले रखा। आखिरकार दुमका मेडिकल कॉलेज पहुंचने के बाद उसका इलाज शुरू किया गया, लेकिन उसकी हालत अब भी गंभीर बनी हुई है।

स्वास्थ्य व्यवस्था पर सवाल

यह घटना स्वास्थ्य व्यवस्था की बड़ी लापरवाही को उजागर करती है। जहां समय पर एम्बुलेंस नहीं मिलने से मासूम की जान पर बन आई। स्थानीय लोग कह रहे हैं कि अगर समय पर एम्बुलेंस उपलब्ध होती, तो स्थिति इतनी बिगड़ती नहीं।

न्यूज़ देखो: एम्बुलेंस का इंतजार या जिंदगी का सवाल

मासूम राम की घटना यह सवाल खड़ा करती है कि ग्रामीण स्वास्थ्य व्यवस्था कब सुधरेगी? एम्बुलेंस सेवा जैसी बुनियादी सुविधा पर लापरवाही का खामियाजा आम जनता और निर्दोष बच्चों को भुगतना पड़ रहा है। सरकार और प्रशासन को अब इस पर तत्काल कदम उठाना होगा।

हर खबर पर रहेगी हमारी नजर।

अब नहीं चलेगी लापरवाही

यह घटना बताती है कि स्वास्थ्य व्यवस्था की लापरवाही सीधे जिंदगी और मौत का सवाल बन जाती है। अब समय है कि हम सब मिलकर इस आवाज़ को उठाएं ताकि हर जरूरतमंद मरीज को समय पर इलाज मिल सके।
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Written by

दुमका/देवघर

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