गढ़वा कृषि महाविद्यालय में मशरूम उत्पादन का नया अध्याय — छात्र बन रहे आत्मनिर्भरता और उद्यमिता के प्रेरक उदाहरण

गढ़वा कृषि महाविद्यालय में मशरूम उत्पादन का नया अध्याय — छात्र बन रहे आत्मनिर्भरता और उद्यमिता के प्रेरक उदाहरण

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#गढ़वा #कृषि_शिक्षा : बी.एससी. (ऑनर्स) कृषि के छात्रों द्वारा अनुभवात्मक अधिगम कार्यक्रम में चार माह से चल रहे मशरूम प्रशिक्षण ने उन्हें व्यावहारिक कृषि उद्यमिता की ओर अग्रसर किया।
  • कृषि महाविद्यालय, गढ़वा में बी.एससी. (ऑनर्स) कृषि के अंतिम वर्ष के 13 छात्र पिछले चार महीनों से मशरूम उत्पादन प्रशिक्षण में व्यस्त हैं।
  • प्रशिक्षण कार्यक्रम अनुभवात्मक अधिगम कार्यक्रम (Experiential Learning Programme) के अंतर्गत संचालित किया जा रहा है।
  • छात्रों को स्पॉन उत्पादन, कंपोस्ट तैयारी, स्पॉनिंग, फ्रूटिंग और कटाई की पूरी प्रक्रिया का व्यावहारिक एवं सैद्धांतिक प्रशिक्षण दिया जा रहा है।
  • छात्र स्वयं प्रयोगशाला में स्पॉन तैयार कर और वैज्ञानिक पद्धति से कंपोस्ट बनाकर मशरूम की सफल खेती कर रहे हैं।
  • प्रशिक्षण में छात्रों को लाभ-लागत विश्लेषण और उत्पादन लागत पर भी कार्य कराया जा रहा है, जिससे वे कृषि उद्यमिता की समझ विकसित कर रहे हैं।
  • कार्यक्रम का संचालन डॉ. राहुल कुमार और श्री हरी पदा मुर्मू के मार्गदर्शन में किया जा रहा है।

कृषि महाविद्यालय, गढ़वा में बी.एससी. (ऑनर्स) कृषि के अंतिम वर्ष के छात्रों ने पिछले चार माह से मशरूम उत्पादन के क्षेत्र में अपनी प्रगति दर्ज की है। यह प्रशिक्षण अनुभवात्मक अधिगम कार्यक्रम के अंतर्गत संचालित हो रहा है, जिसका उद्देश्य छात्रों को व्यावहारिक कृषि प्रशिक्षण प्रदान करना और उन्हें आत्मनिर्भर बनने के लिए प्रेरित करना है।

व्यावहारिक अनुभव से तकनीकी दक्षता

प्रशिक्षण में छात्र स्पॉन उत्पादन, कंपोस्ट तैयार करना, स्पॉवनिंग, फ्रूटिंग और कटाई जैसी प्रक्रियाओं का प्रशिक्षण ले रहे हैं। प्रयोगशाला में छात्र स्वयं स्पॉन तैयार कर रहे हैं और वैज्ञानिक विधि से कंपोस्ट बनाकर सफल मशरूम उत्पादन कर रहे हैं। इससे उन्हें न केवल तकनीकी ज्ञान मिल रहा है, बल्कि वास्तविक कृषि व्यवसाय में काम करने की क्षमता भी विकसित हो रही है।

आर्थिक गणना और लाभ-हानि विश्लेषण

छात्र मशरूम उत्पादन की उत्पादन लागत, कुल खेती लागत और लाभ-लागत अनुपात की गणना कर रहे हैं। इससे उन्हें कृषि व्यवसाय के आर्थिक पक्ष की समझ मिल रही है और भविष्य में सफल कृषि उद्यमी बनने की नींव मजबूत हो रही है।

मार्गदर्शन और प्रेरणा

कार्यक्रम का संचालन डॉ. राहुल कुमार और श्री हरी पदा मुर्मू कर रहे हैं। दोनों प्राध्यापक छात्रों को तकनीकी दक्षता देने के साथ-साथ उन्हें सफल कृषि उद्यमी बनने के लिए प्रेरित भी कर रहे हैं।

डॉ. राहुल कुमार ने कहा: “हमारा उद्देश्य है कि छात्र न केवल कृषि की तकनीक सीखें, बल्कि आत्मनिर्भर बने और भविष्य में रोजगार सृजन में योगदान दें।”

युवाओं के लिए रोजगार और उद्यमिता के द्वार

यह प्रशिक्षण कार्यक्रम छात्रों के साथ-साथ समाज के अन्य युवाओं के लिए भी रोजगार और उद्यमिता के नए अवसर खोल रहा है। मशरूम उत्पादन कम लागत में अधिक लाभ देने वाला व्यवसाय है, और गढ़वा के छात्र इसे अपनाकर आत्मनिर्भर बनने की दिशा में अग्रसर हैं।

न्यूज़ देखो: शिक्षा से आत्मनिर्भरता की ओर गढ़वा के युवाओं का कदम

गढ़वा के कृषि महाविद्यालय में चल रहे मशरूम उत्पादन प्रशिक्षण कार्यक्रम यह साबित करता है कि व्यावहारिक शिक्षा और मार्गदर्शन से छात्र आत्मनिर्भर और सक्षम बन सकते हैं। यह कार्यक्रम न केवल युवाओं को रोजगार प्रदान कर रहा है, बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था में नए अवसर भी सृजित कर रहा है।
हर खबर पर रहेगी हमारी नजर।

आत्मनिर्भर भारत की दिशा में गढ़वा के युवा

गढ़वा के छात्र आज केवल शिक्षा नहीं ले रहे, बल्कि आत्मनिर्भरता और उद्यमिता के क्षेत्र में प्रेरक उदाहरण पेश कर रहे हैं। ऐसे कार्यक्रम युवाओं को अपने हुनर और मेहनत के माध्यम से नए अवसर खोजने की दिशा दिखाते हैं।
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