बरवाडीह में जंगल बचाने और किसानों की आय बढ़ाने की नई पहल, महुआ पेड़ों के नीचे लग रही जाली

बरवाडीह में जंगल बचाने और किसानों की आय बढ़ाने की नई पहल, महुआ पेड़ों के नीचे लग रही जाली

author Akram Ansari
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#बरवाडीह #वन_पहल : महुआ संग्रह की नई व्यवस्था—जंगल आग से बचेंगे और किसानों की आमदनी बढ़ेगी।

लातेहार के बरवाडीह में वन विभाग ने महुआ पेड़ों के नीचे जाली लगाने की पहल शुरू की है। इसका उद्देश्य जंगलों को आग से बचाना और किसानों की आय बढ़ाना है। इस व्यवस्था से महुआ सुरक्षित रहेगा और आग लगाने की परंपरा पर रोक लगेगी। विभाग ने बाजार उपलब्ध कराने की भी व्यवस्था की है।

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  • महुआ पेड़ों के नीचे जाली लगाने की नई पहल शुरू
  • जंगलों में आग की घटनाओं पर लगेगी रोक
  • किसानों को 70 रुपये प्रति किलो तक मिलेगा मूल्य
  • वन विभाग और कंपनी के बीच खरीद समझौता
  • पहल को पूरे पीटीआर क्षेत्र में लागू करने की योजना

लातेहार जिले के बरवाडीह प्रखंड अंतर्गत छिपादोहर वन क्षेत्र में जंगलों को आग से बचाने और ग्रामीणों की आय बढ़ाने के लिए वन विभाग ने एक अनूठी पहल शुरू की है। इस पहल के तहत महुआ के पेड़ों के नीचे जाली लगाई जा रही है, जिससे महुआ के फूल सीधे जाली में गिरेंगे और खराब होने से बचेंगे।

यह पहल डिप्टी डायरेक्टर प्रजेषकांत जेना के निर्देश पर शुरू की गई है और छिपादोहर पूर्वी एवं पश्चिमी वन क्षेत्र के कई गांवों में तेजी से लागू की जा रही है।

महुआ संग्रह की नई व्यवस्था

अब तक महुआ के फूल जमीन पर गिरकर खराब हो जाते थे, जिससे किसानों को नुकसान होता था। लेकिन जाली लगने के बाद फूल सीधे उसमें एकत्रित होंगे।

रेंजर अजय टोप्पो ने कहा: “इससे महुआ सुरक्षित रहेगा और किसानों को बेहतर मूल्य मिलेगा।”

जंगल में आग की घटनाओं पर रोक

वन विभाग के अनुसार, इस पहल का सबसे बड़ा लाभ यह होगा कि महुआ चुनने के लिए पेड़ों के नीचे आग लगाने की परंपरा खत्म होगी।

पहले ग्रामीण जमीन साफ करने के लिए आग लगा देते थे, जो कई बार जंगल में फैलकर बड़े नुकसान का कारण बनती थी।

अब जाली लगने से यह आवश्यकता समाप्त हो जाएगी।

किसानों की आय में वृद्धि

महुआ की बिक्री को लेकर भी विभाग ने ठोस कदम उठाए हैं। एक कंपनी के साथ करार किया गया है, जो फिलहाल 70 रुपये प्रति किलो की दर से महुआ खरीदेगी।

इससे किसानों को सीधा लाभ मिलेगा और उनकी आय बढ़ेगी।

स्वच्छता और भंडारण पर जोर

प्रभारी वनपाल नवीन प्रसाद, शशांक पांडेय और राम कश्यप ने बताया कि महुआ को सुखाने के लिए पेड़ों के पास मचान बनाए जाएंगे।

भंडारण के लिए विशेष बैग भी उपलब्ध कराए जाएंगे, ताकि महुआ को साफ और सुरक्षित रखा जा सके।

अधिकारियों ने कहा: “महुआ को हाइजीनिक रखने पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।”

वन्य जीवों की सुरक्षा

इस पहल से न केवल जंगलों को आग से बचाया जा सकेगा, बल्कि वन्य जीवों को भी होने वाले नुकसान को कम किया जा सकेगा।

पूरे क्षेत्र में विस्तार की योजना

वन विभाग ने बताया कि यदि यह प्रयोग सफल रहता है, तो इसे पूरे पीटीआर क्षेत्र में लागू किया जाएगा।

किसानों ने किया स्वागत

स्थानीय किसानों ने इस पहल का खुले दिल से स्वागत किया और इसे अपने लिए लाभकारी बताया।

एक किसान ने कहा: “इससे हमारी मेहनत का सही मूल्य मिलेगा।”

पर्यावरण और आजीविका का संतुलन

यह पहल पर्यावरण संरक्षण और ग्रामीण आजीविका के बीच संतुलन बनाने का एक सफल उदाहरण बनकर सामने आई है।

न्यूज़ देखो: पर्यावरण और आय का संतुलन

बरवाडीह की यह पहल दिखाती है कि यदि सही सोच के साथ योजना बनाई जाए, तो जंगल और लोगों दोनों का फायदा हो सकता है। यह मॉडल अन्य क्षेत्रों के लिए भी प्रेरणादायक बन सकता है। हर खबर पर रहेगी हमारी नजर।

प्रकृति बचाएं, भविष्य संवारें

जंगल हमारी सबसे बड़ी धरोहर हैं।
जरूरी है कि हम उन्हें सुरक्षित रखें।
छोटे-छोटे प्रयास भी बड़ा बदलाव ला सकते हैं।
आइए, हम प्रकृति और आजीविका दोनों को बचाने का संकल्प लें।

इस सकारात्मक पहल को शेयर करें और दूसरों को भी जागरूक करें।
अपनी राय कमेंट में जरूर बताएं।

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Written by

बरवाडीह, लातेहार

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