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बीस हजार रुपये की मांग से इनकार पर मोटरसाइकिल का चालान, गरीब महिला ने पुलिस पर लगाया गंभीर आरोप

#चतरा #पुलिस_आरोप : लावालौंग थाना क्षेत्र में गरीब महिला ने एसआई और कंप्यूटर ऑपरेटर पर अवैध वसूली का आरोप लगाया।

चतरा जिले के लावालौंग थाना क्षेत्र से पुलिस के कार्यशैली पर सवाल खड़े करने वाला मामला सामने आया है। रिमी पंचायत की एक गरीब महिला ने थाना के एसआई और कंप्यूटर ऑपरेटर पर मोटरसाइकिल छोड़ने के बदले बीस हजार रुपये मांगने का आरोप लगाया है। महिला का कहना है कि रकम नहीं देने पर मोटरसाइकिल का चालान कर दिया गया। मामला सामने आने के बाद स्थानीय जनप्रतिनिधियों ने भी पुलिस रवैये पर नाराजगी जताई है।

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  • लावालौंग थाना क्षेत्र के झरदाग गांव का मामला।
  • मालती देवी ने एसआई नवीन कुमार और ऑपरेटर विक्रम कुमार पर लगाया आरोप।
  • मोटरसाइकिल छोड़ने के बदले 20 हजार रुपये मांगने का दावा।
  • पैसा नहीं देने पर मोटरसाइकिल का चालान किए जाने का आरोप।
  • पुलिस ने आरोपों को बेबुनियाद बताया।

लावालौंग थाना क्षेत्र के रिमी पंचायत अंतर्गत झरदाग गांव निवासी मालती देवी ने पुलिस पर गंभीर आरोप लगाते हुए बताया कि आर्थिक तंगी के बावजूद उनसे अवैध रूप से पैसे की मांग की गई। मालती देवी के अनुसार उनके पति संजय यादव लावालौंग में एक सीमेंट दुकान में दैनिक मजदूरी करते हैं। गांव से बाजार आने-जाने में कठिनाई के कारण उन्होंने करीब दस माह पूर्व फाइनेंस पर एक मोटरसाइकिल खरीदी थी।

पारिवारिक संकट के कारण नहीं हो सका रजिस्ट्रेशन

मालती देवी ने बताया कि मोटरसाइकिल खरीदने के कुछ समय बाद ही उनके जमाई की तबीयत गंभीर रूप से खराब हो गई, जिसका इलाज परिवार ने अपने सीमित साधनों से कराया। सात महीने तक बीमारी से जूझने के बाद जमाई की मृत्यु हो गई। इसके बाद उनकी पुत्री का पुनः विवाह कराना पड़ा, जिससे परिवार पर भारी कर्ज चढ़ गया। इसी आर्थिक संकट के चलते मोटरसाइकिल का रजिस्ट्रेशन नहीं कराया जा सका।

थाना के बाहर रोकी गई मोटरसाइकिल

महिला के अनुसार एक सप्ताह पूर्व उनके पति मोटरसाइकिल से दूध पहुंचाने के लिए बाजार टांड़ जा रहे थे। इसी दौरान लावालौंग थाना के बाहर एसआई नवीन कुमार और कंप्यूटर ऑपरेटर विक्रम कुमार ने उन्हें रोक लिया। आरोप है कि पुलिसकर्मियों ने कहा कि मोटरसाइकिल पर नंबर प्लेट और रजिस्ट्रेशन नहीं है, इसलिए यह चोरी की हो सकती है।

अनुनय-विनय के बावजूद धमकी का आरोप

मालती देवी ने बताया कि सूचना मिलने पर वह स्वयं थाना पहुंचीं और अपनी आर्थिक व पारिवारिक स्थिति बताते हुए जांच करने की गुहार लगाई। इसके बावजूद पुलिसकर्मियों ने उन्हें धमकाते हुए पोस्ता तस्करी में फंसाने और जेल भेजने की बात कही। महिला का आरोप है कि जब उन्होंने मोटरसाइकिल के कागजात दिखाने की बात कही, तो उन्हें डांटकर थाना से बाहर निकाल दिया गया।

बीस हजार रुपये की मांग का दावा

पीड़िता के अनुसार बाद में पुनः थाना जाने पर कंप्यूटर ऑपरेटर विक्रम कुमार ने मोटरसाइकिल छोड़ने के बदले 20 हजार रुपये देने की बात कही और कहा कि यह आदेश एसआई नवीन कुमार का है। महिला का कहना है कि जब उन्होंने स्वयं एसआई से बात की, तो उन्होंने भी यही कहा कि पैसा देना पड़ेगा, नहीं तो 20 हजार रुपये का चालान कर दिया जाएगा।

पैसा नहीं देने पर चालान

मालती देवी ने बताया कि पैसों की व्यवस्था के लिए वह दो दिन तक इधर-उधर भटकती रहीं। जब शुक्रवार को पुनः थाना पहुंचीं, तो उन्हें कहा गया कि इतना इंतजार नहीं किया जा सकता और मोटरसाइकिल का चालान कर दिया गया है। उन्होंने कहा कि पुलिस द्वारा उनकी स्थिति को नजरअंदाज कर केवल पैसों के आधार पर कार्रवाई करना उन्हें और उनके पति को मानसिक रूप से आहत कर गया है।

जनप्रतिनिधियों ने जताया रोष

मामले पर प्रतिक्रिया देते हुए विधायक एवं सांसद प्रतिनिधि जितेंद्र ठाकुर ने कहा कि गरीबों को पैसों के लिए नाहक परेशान करना गलत है। उन्होंने कहा कि इस तरह की कार्यशैली पुलिस की आपराधिक सोच को दर्शाती है और पुलिस को अपने व्यवहार में सुधार करना चाहिए।

पुलिस का पक्ष

वहीं इस संबंध में जब एसआई नवीन कुमार से पूछा गया, तो उन्होंने आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए कहा कि मोटरसाइकिल का रजिस्ट्रेशन नहीं होने के कारण चालान किया गया है। उन्होंने पैसों की मांग से जुड़े आरोपों को बेबुनियाद बताया।

न्यूज़ देखो: गरीब बनाम व्यवस्था की सख्ती

यह मामला एक बार फिर पुलिस और आम नागरिकों के बीच भरोसे के संकट को उजागर करता है। जहां कानून का पालन जरूरी है, वहीं मानवीय दृष्टिकोण और संवेदनशीलता भी उतनी ही आवश्यक है। अब देखना होगा कि प्रशासन इस आरोप की निष्पक्ष जांच करता है या नहीं। हर खबर पर रहेगी हमारी नजर।

न्याय और संवेदनशीलता की जरूरत

कानून का उद्देश्य केवल दंड देना नहीं, बल्कि न्याय सुनिश्चित करना है। जब गरीब और कमजोर वर्ग व्यवस्था से भयभीत हों, तो यह गंभीर चिंता का विषय है।
आपका क्या मानना है—क्या ऐसे मामलों की उच्चस्तरीय जांच होनी चाहिए? अपनी राय कमेंट में लिखें, खबर साझा करें और जवाबदेही की आवाज को मजबूत करें।

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