News dekho specials
Chatra

जोगियारा बाबा कुटी मेले में उमड़ा आस्था का जनसैलाब, मकर संक्रांति पर श्रद्धा और संस्कृति का जीवंत उत्सव

#कुंदा #चतरा #मकरसंक्रांति : बाबा कुटी मेले में श्रद्धालुओं ने पूजा-अर्चना कर सुख-समृद्धि की कामना की।

चतरा जिले के कुंदा प्रखंड अंतर्गत जोगियारा पंचायत में मकर संक्रांति के अवसर पर बाबा कुटी मेले का भव्य आयोजन किया गया। अहले सुबह से ही बड़ी संख्या में श्रद्धालु बाबा कुटी स्थित समाधि स्थल पर पूजा-अर्चना के लिए पहुंचे। धार्मिक अनुष्ठानों के साथ सांस्कृतिक और मनोरंजन गतिविधियों ने मेले को खास बनाया। यह मेला आस्था, परंपरा और सामाजिक समरसता का प्रतीक बनकर उभरा।

Join News देखो WhatsApp Channel
  • जोगियारा बाबा कुटी स्थल पर मकर संक्रांति के अवसर पर वार्षिक मेला आयोजित।
  • दूर-दराज से श्रद्धालुओं की भारी भीड़ पूजा-अर्चना के लिए पहुंची।
  • बाबा कुटी में सिद्ध साधु बाबा की समाधि से जुड़ी गहरी आस्था।
  • श्रद्धालुओं के लिए खिचड़ी प्रसाद और लंगर की व्यवस्था।
  • मेले में झूले, खेल-खिलौने और सांस्कृतिक कार्यक्रम रहे आकर्षण।

मकर संक्रांति के पावन अवसर पर चतरा जिले के प्रतापपुर प्रखंड अंतर्गत जोगियारा पंचायत के जोगियारा गांव के समीप स्थित बाबा कुटी स्थल एक बार फिर आस्था और उत्सव का केंद्र बन गया। कुंदा जाने वाली पक्की सड़क के किनारे स्थित इस प्रसिद्ध धार्मिक स्थल पर हर वर्ष की भांति इस वर्ष भी भव्य मेले का आयोजन किया गया। अहले सुबह से ही श्रद्धालुओं की लंबी कतारें देखने को मिलीं, जिससे पूरा क्षेत्र भक्तिमय माहौल में डूब गया।

बाबा कुटी से जुड़ी आस्था और मान्यताएं

स्थानीय मान्यताओं के अनुसार प्राचीन काल में बाबा कुटी स्थल पर एक सिद्ध साधु बाबा का वास था। तप, साधना और सेवा के लिए प्रसिद्ध इस बाबा की समाधि आज भी लोगों की गहरी आस्था का केंद्र है। मान्यता है कि सच्चे मन से बाबा कुटी में पूजा-अर्चना करने से मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं और परिवार में सुख-शांति बनी रहती है। इसी विश्वास के चलते मकर संक्रांति के दिन आसपास के गांवों के अलावा दूर-दराज के इलाकों से भी श्रद्धालु यहां पहुंचते हैं।

अहले सुबह से शुरू हुई पूजा-अर्चना

मकर संक्रांति की सुबह से ही श्रद्धालु बाबा कुटी स्थित समाधि स्थल पर पहुंचे और विधिवत पूजा-अर्चना की। लोगों ने तिल, चूड़ा, गुड़ और खिचड़ी अर्पित कर परिवार की खुशहाली और अच्छे स्वास्थ्य की कामना की। पूरे परिसर में “जय बाबा” और धार्मिक मंत्रोच्चार की गूंज सुनाई देती रही। श्रद्धालुओं का मानना है कि इस दिन बाबा कुटी में की गई पूजा विशेष फलदायी होती है।

लंगर और प्रसाद से झलकी सेवा भावना

मेले के दौरान श्रद्धालुओं के लिए खिचड़ी प्रसाद रूपी लंगर का भी आयोजन किया गया। बड़ी संख्या में लोगों ने पंक्तिबद्ध होकर श्रद्धा भाव से प्रसाद ग्रहण किया। आयोजन समिति और स्थानीय ग्रामीणों द्वारा की गई यह सेवा भावना मेले की एक अहम विशेषता रही। लंगर व्यवस्था ने आपसी भाईचारे और सामाजिक समरसता का संदेश दिया।

मनोरंजन और दुकानों से सजा मेला परिसर

धार्मिक आस्था के साथ-साथ बाबा कुटी मेले में मनोरंजन की भी भरपूर व्यवस्था देखने को मिली। मेला परिसर में झूले, ब्रेक डांस, खेल-खिलौने और रंग-बिरंगी दुकानों की कतारें सजी रहीं। बच्चों के लिए खिलौनों और झूलों ने विशेष आकर्षण पैदा किया, वहीं युवाओं और बुजुर्गों ने भी मेले का भरपूर आनंद लिया। मिठाइयों, चाट-पकौड़ी और स्थानीय व्यंजनों की दुकानों पर भी काफी भीड़ रही।

सांस्कृतिक कार्यक्रमों ने बढ़ाया आकर्षण

मेले के दौरान आयोजित सांस्कृतिक कार्यक्रमों ने पूरे वातावरण को और अधिक जीवंत बना दिया। ढोलक और हारमोनियम की मधुर धुनों पर कलाकारों की प्रस्तुतियों ने श्रद्धालुओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। भजन-कीर्तन और लोकगीतों की गूंज दूर-दूर तक सुनाई देती रही, जिससे मेला परिसर पूरी तरह भक्तिमय हो उठा। इन सांस्कृतिक प्रस्तुतियों ने क्षेत्र की पारंपरिक विरासत को भी उजागर किया।

सामाजिक समरसता का प्रतीक बना मेला

बाबा कुटी मेला केवल धार्मिक आयोजन तक सीमित नहीं रहा, बल्कि यह सामाजिक समरसता और सांस्कृतिक एकता का भी प्रतीक बना। विभिन्न जाति, वर्ग और समुदाय के लोग एक साथ पूजा-अर्चना और उत्सव में शामिल हुए। यह दृश्य ग्रामीण समाज में आपसी भाईचारे और सांझी संस्कृति को मजबूती देने वाला रहा।

News dekho specials

क्षेत्र के लिए विशेष महत्व

जोगियारा का बाबा कुटी मेला वर्षों से क्षेत्र की धार्मिक और सांस्कृतिक पहचान बना हुआ है। मकर संक्रांति के अवसर पर लगने वाला यह मेला न केवल आस्था को जीवित रखता है, बल्कि स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी गति देता है। दुकानदारों, कारीगरों और छोटे व्यापारियों के लिए यह मेला आजीविका का भी एक महत्वपूर्ण माध्यम बनता है।

न्यूज़ देखो: परंपरा से जुड़ाव की मजबूत कड़ी

बाबा कुटी मेला यह दर्शाता है कि ग्रामीण भारत में आज भी आस्था और परंपरा सामाजिक जीवन की मजबूत नींव हैं। ऐसे आयोजन सांस्कृतिक विरासत को जीवित रखते हुए समाज को जोड़ने का कार्य करते हैं। प्रशासन और जनप्रतिनिधियों को चाहिए कि वे इन पारंपरिक मेलों की सुविधाओं और सुरक्षा व्यवस्था को और बेहतर बनाएं। हर खबर पर रहेगी हमारी नजर।

आस्था के साथ संस्कृति को भी सहेजें

धार्मिक मेले केवल पूजा का अवसर नहीं, बल्कि सामाजिक एकता और सांस्कृतिक पहचान को मजबूत करने का माध्यम होते हैं। बाबा कुटी मेला इसकी जीवंत मिसाल है। ऐसे आयोजनों में सहभागिता कर हम अपनी परंपराओं को आगे बढ़ा सकते हैं।
आप भी अपनी राय साझा करें, इस खबर को आगे बढ़ाएं और क्षेत्रीय संस्कृति के संरक्षण के लिए जागरूकता फैलाएं।

📥 Download E-Paper

यह खबर आपके लिए कितनी महत्वपूर्ण थी?

रेटिंग देने के लिए किसी एक स्टार पर क्लिक करें!

इस खबर की औसत रेटिंग: 0 / 5. कुल वोट: 0

अभी तक कोई वोट नहीं! इस खबर को रेट करने वाले पहले व्यक्ति बनें।

चूंकि आपने इस खबर को उपयोगी पाया...

हमें सोशल मीडिया पर फॉलो करें!



IMG-20250723-WA0070
IMG-20251223-WA0009

नीचे दिए बटन पर क्लिक करके हमें सोशल मीडिया पर फॉलो करें


Binod Kumar

लावालोंग, चतरा

Related News

Back to top button
error: