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बानो के एलिस शैक्षणिक संस्थान में राष्ट्रीय विज्ञान दिवस पर जल विद्युत और गुरुत्वाकर्षण पर विशेष संगोष्ठी आयोजित

#बानो #सिमडेगा #विज्ञान_दिवस : विद्यार्थियों को जल विद्युत और गुरुत्वाकर्षण की वैज्ञानिक समझ दी गई।

सिमडेगा जिले के बानो प्रखंड स्थित एलिस शैक्षणिक संस्थान में राष्ट्रीय विज्ञान दिवस मनाया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ निदेशक बिमल कुमार ने किया। इस अवसर पर जल विद्युत निर्माण और गुरुत्वाकर्षण बल जैसे विषयों पर विस्तृत जानकारी दी गई। छात्र-छात्राओं ने वैज्ञानिक सिद्धांतों को उदाहरणों के माध्यम से समझा।

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  • एलिस शैक्षणिक संस्थान, बानो में विज्ञान दिवस का आयोजन।
  • कार्यक्रम का शुभारंभ निदेशक बिमल कुमार ने किया।
  • जल विद्युत निर्माण पर विस्तृत प्रस्तुति।
  • काउंसलर सुष्मिता सिंह ने गुरुत्वाकर्षण बल समझाया।
  • छात्र-छात्राओं की सक्रिय भागीदारी और वैज्ञानिक प्रदर्शन।

सिमडेगा जिले के बानो प्रखंड स्थित एलिस शैक्षणिक संस्थान में राष्ट्रीय विज्ञान दिवस उत्साह और जागरूकता के साथ मनाया गया। कार्यक्रम की शुरुआत संस्थान के निदेशक बिमल कुमार द्वारा दीप प्रज्वलन कर की गई। इस अवसर पर विज्ञान से संबंधित महत्वपूर्ण विषयों पर विद्यार्थियों को व्यावहारिक और सैद्धांतिक जानकारी दी गई। आयोजन का मुख्य उद्देश्य छात्रों में वैज्ञानिक सोच विकसित करना और उन्हें प्राकृतिक सिद्धांतों को सरल भाषा में समझाना था।

कार्यक्रम का शुभारंभ और उद्देश्य

कार्यक्रम का शुभारंभ निदेशक बिमल कुमार ने किया। उन्होंने अपने संबोधन में विज्ञान की भूमिका पर प्रकाश डालते हुए कहा कि आधुनिक युग में वैज्ञानिक दृष्टिकोण ही प्रगति का आधार है।
उन्होंने छात्रों को प्रोत्साहित करते हुए कहा:

बिमल कुमार ने कहा: “विज्ञान केवल किताबों तक सीमित विषय नहीं है, बल्कि यह हमारे दैनिक जीवन से जुड़ा हुआ व्यावहारिक ज्ञान है।”

इस अवसर पर विज्ञान दिवस के महत्व पर चर्चा की गई और बताया गया कि यह दिन वैज्ञानिक खोजों और नवाचारों को सम्मान देने के लिए मनाया जाता है।

जल विद्युत निर्माण पर विस्तृत जानकारी

कार्यक्रम के दौरान जल विद्युत निर्माण (Hydropower Generation) विषय पर विशेष जानकारी दी गई। निदेशक बिमल कुमार ने समझाया कि जल विद्युत निर्माण बहते पानी की गतिज ऊर्जा का उपयोग कर टर्बाइनों को घुमाने और जनरेटर के माध्यम से बिजली उत्पन्न करने की प्रक्रिया है।
उन्होंने बताया कि यह एक टिकाऊ, नवीकरणीय और पर्यावरण के अनुकूल ऊर्जा स्रोत है। भारत में पहली जल विद्युत परियोजना 1897 में दार्जिलिंग के सिद्रापोंग में स्थापित की गई थी।
छात्रों को चित्रात्मक उदाहरणों के माध्यम से यह भी बताया गया कि कैसे पानी की ऊंचाई और प्रवाह की गति बिजली उत्पादन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।

गुरुत्वाकर्षण बल का सरल और प्रभावी उदाहरण

संस्थान की काउंसलर सुष्मिता सिंह ने गुरुत्वाकर्षण बल के सिद्धांत को सरल भाषा में समझाया। उन्होंने विद्यार्थियों को बताया कि गुरुत्वाकर्षण वह प्राकृतिक बल है, जो वस्तुओं को पृथ्वी की ओर आकर्षित करता है।

सुष्मिता सिंह ने कहा: “जब हम किसी गेंद को हवा में ऊपर फेंकते हैं, तो वह वापस जमीन पर गिरती है क्योंकि पृथ्वी का गुरुत्वाकर्षण बल उसे अपने केंद्र की ओर खींचता है।”

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उन्होंने व्यावहारिक उदाहरणों के माध्यम से छात्रों को समझाया कि यही बल हमारे ग्रह पर जीवन को संतुलित बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
कार्यक्रम के दौरान विज्ञान से जुड़े कई हैरतअंगेज तथ्यों और प्रयोगों की जानकारी भी दी गई, जिससे विद्यार्थियों की जिज्ञासा और उत्साह बढ़ा।

विद्यार्थियों की भागीदारी और उपस्थित गणमान्य

इस आयोजन में छात्र-छात्राओं ने सक्रिय भागीदारी निभाई। कार्यक्रम में वाणी कुमारी, नित्या सोनी, आरव कुमार और अनिरुद्ध रेयान सहित कई विद्यार्थियों ने उपस्थित रहकर वैज्ञानिक विषयों को समझा।
संस्थान के शिक्षकों और स्टाफ सदस्यों में बिमल कुमार, सुष्मिता सिंह और सोनाली मर्की विशेष रूप से उपस्थित रहे।
कार्यक्रम का वातावरण उत्साहपूर्ण और ज्ञानवर्धक रहा, जहां विद्यार्थियों को प्रश्न पूछने और अपने विचार साझा करने का अवसर भी दिया गया।

विज्ञान के प्रति जागरूकता का संदेश

विज्ञान दिवस के आयोजन का उद्देश्य केवल जानकारी देना नहीं, बल्कि छात्रों के भीतर वैज्ञानिक दृष्टिकोण विकसित करना था। संस्थान ने यह संदेश दिया कि विज्ञान का ज्ञान समाज के विकास और पर्यावरण संरक्षण दोनों के लिए आवश्यक है।
इस प्रकार के आयोजनों से विद्यार्थियों में अनुसंधान और नवाचार के प्रति रुचि उत्पन्न होती है, जो भविष्य में उन्हें नई खोजों और उपलब्धियों की ओर प्रेरित कर सकती है।

न्यूज़ देखो: ग्रामीण क्षेत्र में वैज्ञानिक सोच को बढ़ावा

बानो जैसे प्रखंड में विज्ञान दिवस का यह आयोजन इस बात का संकेत है कि ग्रामीण क्षेत्रों में भी वैज्ञानिक चेतना को बढ़ावा दिया जा रहा है। संस्थान द्वारा जल विद्युत और गुरुत्वाकर्षण जैसे विषयों को सरल उदाहरणों से समझाना सराहनीय पहल है। यदि ऐसे कार्यक्रम निरंतर आयोजित होते रहें, तो छात्रों में वैज्ञानिक दृष्टिकोण और मजबूत होगा। हर खबर पर रहेगी हमारी नजर।

विज्ञान की रोशनी से भविष्य को करें उज्ज्वल

विज्ञान केवल प्रयोगशाला तक सीमित नहीं, बल्कि हमारे जीवन का अभिन्न हिस्सा है।
छात्रों में जिज्ञासा और खोज की भावना विकसित करना समय की आवश्यकता है।
ऐसे कार्यक्रम नई पीढ़ी को नवाचार और अनुसंधान की दिशा में प्रेरित करते हैं।
आइए हम सब मिलकर वैज्ञानिक सोच को बढ़ावा दें और बच्चों को प्रश्न पूछने के लिए प्रोत्साहित करें।
आप अपनी राय कमेंट में साझा करें, इस खबर को आगे बढ़ाएं और शिक्षा व विज्ञान के महत्व को जन-जन तक पहुंचाएं।

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Shivnandan Baraik

बानो, सिमडेगा

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