
#हुसैनाबाद #दिव्यांग_अधिकार : थानों में सुगम व्यवस्था और संवेदनशील व्यवहार को लेकर एसडीपीओ को सौंपा गया आवेदन।
हुसैनाबाद अनुमंडल में निवासरत दिव्यांगजनों को पुलिस एवं न्यायिक प्रक्रियाओं के दौरान हो रही कठिनाइयों को लेकर एक महत्वपूर्ण पहल सामने आई है। पलामू जिला दिव्यांग संघ के नेतृत्व में दिव्यांगजनों ने एसडीपीओ को आवेदन सौंपकर थाना परिसरों को दिव्यांगजन अनुकूल बनाने की मांग की। आवेदन में दिव्यांगजन अधिकार अधिनियम 2016 के तहत सुगम, सम्मानजनक और संवेदनशील व्यवस्था लागू करने पर जोर दिया गया। यह पहल दिव्यांगजनों की गरिमा, न्याय और समान अधिकार सुनिश्चित करने की दिशा में अहम मानी जा रही है।
- हुसैनाबाद अनुमंडल में दिव्यांगजनों ने पुलिस व्यवस्था पर उठाए सवाल।
- एसडीपीओ एस. मोहम्मद याक़ूब को सौंपा गया मांग पत्र।
- पलामू जिला दिव्यांग संघ के अध्यक्ष उमेश कुमार मेहता ने किया नेतृत्व।
- थाना परिसरों में रैम्प, व्हीलचेयर और सहायता डेस्क की मांग।
- दिव्यांगजन अधिकार अधिनियम 2016 की धाराओं के पालन पर जोर।
हुसैनाबाद अनुमंडल क्षेत्र में रहने वाले दिव्यांगजनों को थानों एवं पुलिस कार्यालयों में न्यायिक कार्यों के दौरान होने वाली समस्याओं को लेकर अब संगठित आवाज उठाई गई है। इसी क्रम में पलामू जिला दिव्यांग संघ के अध्यक्ष उमेश कुमार मेहता एवं हुसैनाबाद प्रखंड अध्यक्ष विंध्याचल सिंह के नेतृत्व में एक प्रतिनिधिमंडल ने हुसैनाबाद के एसडीपीओ एस. मोहम्मद याक़ूब को एक विस्तृत और तथ्यात्मक आवेदन सौंपा।
आवेदन के माध्यम से दिव्यांगजनों ने पुलिस प्रशासन का ध्यान उन व्यावहारिक कठिनाइयों की ओर आकृष्ट कराया, जिनका सामना उन्हें रोजमर्रा के मामलों में करना पड़ता है। उनका कहना है कि न्याय पाने की प्रक्रिया में शारीरिक अक्षमता किसी भी नागरिक के अधिकारों में बाधा नहीं बननी चाहिए, लेकिन वर्तमान व्यवस्थाएं इस कसौटी पर खरी नहीं उतर पा रही हैं।
थाना परिसरों में सुगम व्यवस्था का अभाव
आवेदन में स्पष्ट रूप से उल्लेख किया गया है कि दिव्यांगजन शिकायत दर्ज कराने, प्राथमिकी लिखवाने, सत्यापन, पुलिस जांच या अन्य आवश्यक कार्यों के लिए थानों में पहुंचते हैं। लेकिन अधिकतर थाना परिसरों में रैम्प, व्हीलचेयर की सुविधा, सहायक स्टाफ, संकेत भाषा जानने वाले कर्मी, ब्रेल या सरल संचार व्यवस्था का अभाव है।
इस कारण दिव्यांगजनों को न केवल शारीरिक बल्कि मानसिक रूप से भी परेशानी झेलनी पड़ती है। कई बार उन्हें घंटों इंतजार करना पड़ता है या दूसरों पर निर्भर रहना पड़ता है, जिससे उनकी गरिमा और आत्मसम्मान को ठेस पहुंचती है। आवेदन में कहा गया है कि यह स्थिति न्याय की समान पहुंच के सिद्धांत के विपरीत है।
दिव्यांगजन अधिकार अधिनियम 2016 का हवाला
दिव्यांग संघ द्वारा दिए गए आवेदन में दिव्यांगजन अधिकार अधिनियम 2016 की प्रमुख धाराओं का स्पष्ट उल्लेख किया गया है। इसमें विशेष रूप से धारा 40, 41, 42 और 44 का हवाला देते हुए सभी सार्वजनिक भवनों, विशेषकर थाना परिसरों को दिव्यांगजन अनुकूल बनाने की मांग की गई है।
इन धाराओं के अंतर्गत यह प्रावधान है कि सरकारी कार्यालयों में दिव्यांगजनों के लिए सुगम पहुंच, सुविधाजनक ढांचा और सहायक व्यवस्था सुनिश्चित की जाए। आवेदनकर्ताओं का कहना है कि इन कानूनी प्रावधानों का जमीनी स्तर पर अनुपालन बेहद जरूरी है।
दंडात्मक धाराओं के प्रभावी उपयोग की मांग
आवेदन में केवल सुविधाओं तक ही बात सीमित नहीं रखी गई, बल्कि दिव्यांगजनों के साथ होने वाले भेदभाव, अपमान, हिंसा, शोषण या मज़ाक जैसी घटनाओं पर भी गंभीर चिंता जताई गई है। प्रतिनिधिमंडल ने मांग की है कि ऐसे मामलों में प्राथमिकी दर्ज करते समय अधिनियम की दंडात्मक धाराएं—धारा 3, 7, 89, 90, 92 तथा 93-94 का स्पष्ट उल्लेख किया जाए।
उनका कहना है कि यदि कानून की इन धाराओं का सख्ती से पालन किया जाए, तो दिव्यांगजनों के खिलाफ होने वाले अपराधों पर प्रभावी रोक लगाई जा सकती है और समाज में एक मजबूत संदेश जाएगा।
थाना प्रभारियों के लिए स्पष्ट दिशा-निर्देश की मांग
दिव्यांग संघ ने पुलिस प्रशासन से यह भी आग्रह किया है कि सभी थाना प्रभारियों को स्पष्ट और लिखित दिशा-निर्देश जारी किए जाएं। इन निर्देशों में दिव्यांगजनों को प्राथमिकता सेवा, सहायता डेस्क की व्यवस्था और संवेदनशील व्यवहार को अनिवार्य रूप से शामिल किया जाए।
आवेदनकर्ताओं का मानना है कि यदि पुलिसकर्मी दिव्यांगजनों की समस्याओं के प्रति संवेदनशील होंगे और उन्हें प्राथमिकता देंगे, तो इससे न केवल व्यवस्था सुधरेगी बल्कि पुलिस और समाज के बीच विश्वास भी मजबूत होगा।
दिव्यांगजनों में बढ़ेगा सुरक्षा और सम्मान का भाव
पलामू जिला दिव्यांग संघ के नेताओं ने कहा कि यदि यह पहल लागू होती है, तो इससे पूरे जिले के दिव्यांगजनों में न्याय, सुरक्षा और सम्मान की भावना और अधिक मजबूत होगी। यह कदम दिव्यांगजनों को मुख्यधारा से जोड़ने और उन्हें समान नागरिक अधिकार दिलाने की दिशा में एक सकारात्मक प्रयास साबित हो सकता है।
उन्होंने उम्मीद जताई कि पुलिस प्रशासन इस आवेदन को गंभीरता से लेते हुए आवश्यक कदम उठाएगा और हुसैनाबाद अनुमंडल दिव्यांगजन अनुकूल प्रशासन की दिशा में एक उदाहरण बनेगा।
न्यूज़ देखो: कानून और संवेदनशीलता का संतुलन जरूरी
हुसैनाबाद में दिव्यांगजनों द्वारा उठाई गई यह मांग सिर्फ सुविधाओं की नहीं, बल्कि सम्मान और समान अधिकार की है। कानून पहले से मौजूद है, जरूरत है उसके प्रभावी क्रियान्वयन की। यदि पुलिस प्रशासन इस दिशा में ठोस कदम उठाता है, तो यह पूरे जिले के लिए मिसाल बन सकता है। अब देखना यह है कि आवेदन के बाद व्यवस्था में कितना और कब तक बदलाव आता है। हर खबर पर रहेगी हमारी नजर।
समान अधिकारों की ओर एक जरूरी कदम
दिव्यांगजन समाज का अभिन्न हिस्सा हैं और उन्हें भी न्याय व सुरक्षा तक समान पहुंच का अधिकार है।
यदि आप भी मानते हैं कि सार्वजनिक व्यवस्थाएं सभी के लिए सुलभ होनी चाहिए, तो इस मुद्दे पर अपनी राय रखें। खबर को साझा करें, चर्चा को आगे बढ़ाएं और एक संवेदनशील समाज के निर्माण में अपनी भूमिका निभाएं।





