
#बरवाडीह #लातेहार #स्वास्थ्य_व्यवस्था : बंध्याकरण कार्यक्रम में भारी लापरवाही, ठंड में बाहर सुलाए गए मरीज
- बरवाडीह सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में परिवार नियोजन पखवाड़ा के तहत बंध्याकरण कार्यक्रम।
- क्षमता 17 मरीजों की, ऑपरेशन 33 का, नियमों की खुलेआम अनदेखी।
- कड़ाके की ठंड में मरीज बिना कंबल-बेडशीट अस्पताल परिसर के बाहर सोने को मजबूर।
- ऑपरेशन रूम में गंदगी, संक्रमण का गंभीर खतरा।
- सांसद प्रतिनिधि डॉ. चंदन कुमार और प्रमुख सुशीला देवी का औचक निरीक्षण, प्रभारी चिकित्सा अधिकारी को कड़ी फटकार।
बरवाडीह (लातेहार)। बरवाडीह सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में स्वास्थ्य सेवाओं की बदहाली उस समय पूरी तरह उजागर हो गई, जब परिवार नियोजन पखवाड़ा के तहत आयोजित बंध्याकरण कार्यक्रम का सांसद प्रतिनिधि डॉ. चंदन कुमार एवं प्रखंड प्रमुख सुशीला देवी ने बुधवार देर रात औचक निरीक्षण किया। रात करीब 9 बजे हुए इस निरीक्षण में जो तस्वीर सामने आई, उसने स्वास्थ्य विभाग की कार्यशैली और जिम्मेदारी पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए।
क्षमता से दोगुना मरीजों का बंध्याकरण, नियम ताक पर
निरीक्षण के दौरान यह चौंकाने वाला तथ्य सामने आया कि सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में जहां केवल 17 मरीजों की क्षमता के अनुरूप व्यवस्था थी, वहीं नियमों को दरकिनार करते हुए 33 मरीजों का बंध्याकरण ऑपरेशन कर दिया गया। यह न सिर्फ स्वास्थ्य मानकों का उल्लंघन है, बल्कि मरीजों की जान को भी जोखिम में डालने जैसा कदम माना जा रहा है।
स्थिति इतनी गंभीर थी कि आधा दर्जन से अधिक मरीजों को अस्पताल परिसर के बाहर बेड लगाकर सुलाया गया। ठंड के इस मौसम में मरीज खुले में पड़े रहे, लेकिन उन्हें न तो बेडशीट उपलब्ध कराई गई और न ही कंबल।
ठंड और अव्यवस्था के बीच तड़पते मरीज
कड़ाके की ठंड के बावजूद स्वास्थ्य केंद्र प्रबंधन की ओर से मरीजों की बुनियादी जरूरतों की अनदेखी की गई। कई मरीज ऑपरेशन के बाद ठिठुरते हुए नजर आए। यह दृश्य देखकर जनप्रतिनिधि भड़क उठे। मरीजों की स्थिति देखकर साफ था कि यदि समय रहते हस्तक्षेप नहीं होता, तो कोई बड़ा हादसा भी हो सकता था।
ऑपरेशन रूम की गंदगी ने बढ़ाई चिंता
मामला यहीं तक सीमित नहीं रहा। निरीक्षण के दौरान ऑपरेशन रूम में भी साफ-सफाई का घोर अभाव पाया गया। चारों ओर गंदगी फैली हुई थी, जिससे संक्रमण फैलने का गंभीर खतरा बना हुआ था। बंध्याकरण जैसे संवेदनशील ऑपरेशन के लिए जिस स्तर की स्वच्छता आवश्यक होती है, वह पूरी तरह नदारद दिखी।
सांसद प्रतिनिधि डॉ. चंदन कुमार ने इसे सीधे तौर पर मरीजों की जान से खिलवाड़ बताया और स्वास्थ्य विभाग की लापरवाही पर कड़ा ऐतराज जताया।
प्रभारी चिकित्सा अधिकारी पर भड़के जनप्रतिनिधि
इस गंभीर स्थिति को देखते हुए सांसद प्रतिनिधि एवं प्रखंड प्रमुख ने मौके पर ही प्रभारी चिकित्सा अधिकारी को तलब किया और स्वास्थ्य सेवाओं की बदहाल स्थिति को लेकर कड़ी फटकार लगाई। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि सरकारी अस्पतालों में गरीब और ग्रामीण जनता इलाज की उम्मीद लेकर आती है, लेकिन यहां तो उन्हें अमानवीय हालात में रखा जा रहा है।
जनप्रतिनिधियों ने चेतावनी दी कि यदि इस तरह की लापरवाही दोबारा सामने आई, तो वे इसे उच्च स्तर तक उठाएंगे और जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग करेंगे।
हस्तक्षेप के बाद हुई तात्कालिक व्यवस्था
जनप्रतिनिधियों के हस्तक्षेप के बाद स्वास्थ्य केंद्र प्रशासन हरकत में आया। आनन-फानन में मरीजों के लिए बेडशीट और कंबल की व्यवस्था कराई गई। हालांकि सवाल यह उठता है कि यदि निरीक्षण नहीं होता, तो क्या मरीज इसी तरह ठंड में पड़े रहते?
एनजीओ की भूमिका पर भी सवाल
बंध्याकरण कार्यक्रम की जिम्मेदारी जिस एनजीओ को सौंपी गई थी, उसकी भूमिका भी संदेह के घेरे में आ गई है। बताया गया कि एनजीओ ने केवल औपचारिकता निभाते हुए ऑपरेशन कराए और इसके बाद मौके से रवाना हो गया। मरीजों की देखभाल, ठहराव और बुनियादी सुविधाओं की कोई व्यवस्था नहीं की गई।
इतनी बड़ी संख्या में मरीजों के बावजूद सुविधाओं की अनदेखी ने यह साबित कर दिया कि कार्यक्रम सिर्फ लक्ष्य पूरा करने तक सीमित रह गया था, मरीजों की सुरक्षा और सुविधा प्राथमिकता में नहीं थी।
सिस्टम पर खड़े हुए गंभीर सवाल
इस पूरे मामले ने स्वास्थ्य विभाग की निगरानी व्यवस्था और जवाबदेही पर गंभीर प्रश्नचिह्न लगा दिया है। ग्रामीण क्षेत्रों में पहले से ही स्वास्थ्य सुविधाओं की कमी से जूझ रहे लोगों के लिए इस तरह की लापरवाही बेहद चिंताजनक है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि जनप्रतिनिधि समय पर नहीं पहुंचते, तो मरीजों की स्थिति और भी गंभीर हो सकती थी।
मौके पर मौजूद रहे जनप्रतिनिधि
निरीक्षण के दौरान भाजपा मंडल अध्यक्ष मनोज प्रसाद एवं पूर्वी पंचायत समिति सदस्य प्रवीण कुमार भी मौजूद थे। सभी ने एक स्वर में स्वास्थ्य केंद्र की बदहाली पर नाराजगी जताई और सुधार की मांग की।
न्यूज़ देखो: स्वास्थ्य व्यवस्था की सच्चाई
बरवाडीह सीएचसी की यह तस्वीर बताती है कि योजनाएं कागजों में बेहतर दिख सकती हैं, लेकिन जमीनी हकीकत अलग है। जब तक जवाबदेही तय नहीं होगी, तब तक ऐसे हालात बदलना मुश्किल है। हर खबर पर रहेगी हमारी नजर।
मरीज नहीं, इंसान समझिए
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