Simdega

नववर्ष पर संस्कारों की अनूठी शुरुआत, सिमडेगा में तुलसी पूजन और मातृ–पितृ पूजन समारोह आयोजित

#सिमडेगा #संस्कार_उत्सव : सरना मंदिर परिसर में श्रद्धा और परंपरा के साथ नववर्ष का शुभारंभ।

सिमडेगा स्थित सरना मंदिर परिसर में नववर्ष के अवसर पर तुलसी पूजन एवं मातृ–पितृ पूजन समारोह का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम में बच्चों, अभिभावकों और श्रद्धालुओं ने बड़ी संख्या में भाग लिया। भारतीय संस्कृति के मूल मूल्यों को सहेजने के उद्देश्य से आयोजित इस आयोजन में प्रकृति पूजन और माता–पिता के सम्मान का भाव प्रमुख रहा। कार्यक्रम ने समाज को संस्कार, कृतज्ञता और पारिवारिक मूल्यों का संदेश दिया।

Join News देखो WhatsApp Channel
  • सरना मंदिर परिसर सिमडेगा में नववर्ष विशेष आयोजन।
  • तुलसी पूजन के माध्यम से प्रकृति संरक्षण का संदेश।
  • मातृ–पितृ पूजन में बच्चों ने माता–पिता से लिया आशीर्वाद।
  • कार्यक्रम में अभिभावक एवं बच्चों की सक्रिय भागीदारी
  • वक्ताओं ने संस्कार और संस्कृति के महत्व पर दिया जोर।

सिमडेगा जिले में नववर्ष के शुभ अवसर पर भारतीय संस्कृति और पारंपरिक मूल्यों को सजीव करने वाला एक प्रेरक आयोजन देखने को मिला। सिमडेगा स्थित पावन सरना मंदिर परिसर में श्रद्धा, भक्ति और संस्कारमय वातावरण के बीच तुलसी पूजन एवं मातृ–पितृ पूजन समारोह का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य नववर्ष का आरंभ पश्चिमी दिखावे से हटकर भारतीय परंपरा, प्रकृति पूजन और माता–पिता के सम्मान के साथ करना था।

कार्यक्रम में उपस्थित श्रद्धालुओं ने इसे केवल धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि सामाजिक और नैतिक चेतना से जुड़ा प्रयास बताया। पूरे परिसर में शांति, भक्ति और आत्मीयता का वातावरण व्याप्त रहा।

तुलसी पूजन से प्रकृति के प्रति कृतज्ञता का भाव

कार्यक्रम की शुरुआत तुलसी माता के विधिवत पूजन से की गई। श्रद्धालुओं ने तुलसी के पौधे को जल अर्पित किया, दीप प्रज्वलित कर आरती की और परिवार, समाज व राष्ट्र की सुख-समृद्धि की कामना की। तुलसी पूजन के माध्यम से पर्यावरण संरक्षण, सात्विक जीवनशैली और प्रकृति के प्रति कृतज्ञता का संदेश दिया गया।

वक्ताओं ने कहा कि तुलसी केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक नहीं, बल्कि आयुर्वेदिक और पर्यावरणीय दृष्टि से भी अत्यंत महत्वपूर्ण पौधा है। इसके संरक्षण से स्वास्थ्य और पर्यावरण दोनों को लाभ मिलता है।

मातृ–पितृ पूजन ने भावुक किया माहौल

तुलसी पूजन के बाद मातृ–पितृ पूजन समारोह आयोजित किया गया, जिसने पूरे कार्यक्रम को भावनात्मक ऊंचाई प्रदान की। बच्चों ने अपने माता–पिता के चरण धोए, तिलक लगाया, पुष्प अर्पित किए और उनका आशीर्वाद लिया। यह दृश्य उपस्थित सभी लोगों के लिए अत्यंत भावुक और प्रेरणादायक रहा।

इस अवसर पर कई माता–पिता की आंखें भावुकता से नम हो गईं। बच्चों द्वारा किए गए इस सम्मान ने यह संदेश दिया कि आधुनिक समय में भी पारिवारिक संस्कारों को जीवित रखा जा सकता है।

अभिभावकों और बच्चों की गरिमामयी सहभागिता

कार्यक्रम में अभिभावकगण विद्या देवी, निराला देवी, आरती देवी, संतोषी देवी, पुतुल देवी, सुगंति देवी, बेलावती, शिवानी, दिनेश भारती, प्रदीप, सहदेव, सुरेश गोप, मंगल बड़ाइक, विनय शंकर नन्द, कृष्ण पाठक एवं राहुल कुमार की गरिमामयी उपस्थिति रही।

वहीं बच्चों वैभव, ओम, अतुलित एवं भूमि ने पूरे उत्साह और श्रद्धा के साथ पूजन में भाग लिया। बच्चों की सहभागिता ने यह साबित किया कि यदि सही मार्गदर्शन मिले, तो नई पीढ़ी भी संस्कारों को आत्मसात कर सकती है।

वक्ताओं ने संस्कारों की आवश्यकता पर दिया जोर

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए वक्ताओं ने कहा कि मातृ–पितृ पूजन बच्चों में कृतज्ञता, अनुशासन और नैतिक मूल्यों का विकास करता है। माता–पिता ही जीवन के प्रथम गुरु होते हैं और उनके आशीर्वाद से जीवन की हर कठिन राह सरल हो जाती है।

वक्ताओं ने यह भी कहा कि आज के भौतिकवादी युग में जब परिवार और समाज के रिश्ते कमजोर पड़ते जा रहे हैं, ऐसे आयोजनों की भूमिका और भी महत्वपूर्ण हो जाती है। इससे बच्चों को अपनी जड़ों, संस्कृति और परंपराओं से जुड़ने का अवसर मिलता है।

संस्कारमय वातावरण में हुआ प्रसाद वितरण

कार्यक्रम के समापन पर सभी उपस्थित श्रद्धालुओं के बीच प्रसाद वितरण किया गया। श्रद्धालुओं ने इसे नववर्ष की सकारात्मक और शुभ शुरुआत बताया। पूरे आयोजन ने यह संदेश दिया कि यदि नववर्ष की शुरुआत माता–पिता के आशीर्वाद और प्रकृति पूजन से की जाए, तो वर्ष भर जीवन में शांति, सकारात्मकता और सफलता बनी रहती है।

न्यूज़ देखो: संस्कृति से जुड़ाव का प्रेरक उदाहरण

सिमडेगा का यह आयोजन दर्शाता है कि सामाजिक और सांस्कृतिक मूल्यों को बचाने की जिम्मेदारी सामूहिक प्रयास से ही संभव है। तुलसी पूजन और मातृ–पितृ पूजन जैसे कार्यक्रम नई पीढ़ी को संस्कारों से जोड़ने का सशक्त माध्यम हैं। ऐसे आयोजनों से समाज में नैतिक चेतना और पारिवारिक रिश्तों की मजबूती दिखाई देती है। हर खबर पर रहेगी हमारी नजर।

नववर्ष को बनाएं संस्कारों से समृद्ध

नया साल केवल उत्सव नहीं, आत्ममंथन और मूल्यों को अपनाने का अवसर भी है।
अपने घर और समाज में माता–पिता के सम्मान और प्रकृति संरक्षण को प्राथमिकता दें।
ऐसे आयोजनों से प्रेरणा लें और इन्हें अपने आसपास भी शुरू करें।
इस खबर को साझा करें, अपनी राय कमेंट में बताएं और संस्कारों का संदेश आगे बढ़ाएं।

📥 Download E-Paper

यह खबर आपके लिए कितनी महत्वपूर्ण थी?

रेटिंग देने के लिए किसी एक स्टार पर क्लिक करें!

इस खबर की औसत रेटिंग: 0 / 5. कुल वोट: 0

अभी तक कोई वोट नहीं! इस खबर को रेट करने वाले पहले व्यक्ति बनें।

चूंकि आपने इस खबर को उपयोगी पाया...

हमें सोशल मीडिया पर फॉलो करें!

IMG-20251223-WA0009
1000264265
IMG-20250723-WA0070
आगे पढ़िए...

नीचे दिए बटन पर क्लिक करके हमें सोशल मीडिया पर फॉलो करें


Satyam Kumar Keshri

सिमडेगा नगर क्षेत्र

Related News

ये खबर आपको कैसी लगी, अपनी प्रतिक्रिया दें

Back to top button
error: