#बिश्रामपुर #कलशयात्रा : कोयल-तहले संगम से पवित्र जल लाकर श्रद्धालुओं ने मंदिर में किया स्थापित।
पलामू जिले के बिश्रामपुर प्रखंड अंतर्गत तोलरा गांव स्थित भगवान विष्णु मंदिर के तृतीय वार्षिकोत्सव पर शनिवार को भव्य कलशयात्रा निकाली गई। हजारों श्रद्धालु हाथों में कलश और धार्मिक ध्वज लेकर शोखा बाबा मंदिर पहुंचे तथा कोयल और तहले नदी संगम से पवित्र जल लेकर मंदिर में स्थापित किया। वाराणसी से आए विद्वान पुरोहितों ने वैदिक मंत्रोच्चारण के साथ पूजा-अर्चना संपन्न कराई। आयोजन के दौरान भक्ति, श्रद्धा और धार्मिक उत्साह का अद्भुत माहौल देखने को मिला।
- तोलरा गांव स्थित भगवान विष्णु मंदिर के तृतीय वार्षिकोत्सव पर निकली भव्य कलशयात्रा में हजारों श्रद्धालु शामिल हुए।
- श्रद्धालुओं ने कोयल और तहले नदी के संगम से पवित्र जल भरकर मंदिर में स्थापित किया।
- धनंजय पांडेय पुरोहित एवं वाराणसी से आए विद्वान पुरोहितों ने वैदिक मंत्रोच्चारण के साथ पूजा संपन्न कराई।
- यजमान के रूप में आलोक तिवारी ने सपत्नीक विधि-विधान से पूजा-अर्चना की।
- दिन में विष्णु सहस्र नाम जाप और रात में भंडारा व भक्ति जागरण का आयोजन होगा।
- कार्यक्रम में सच्चिदानंद तिवारी, बीरेंद्र तिवारी, संतोष चौबे, बीपी शुक्ला सहित सैकड़ों श्रद्धालु मौजूद रहे।
बिश्रामपुर प्रखंड क्षेत्र के तोलरा गांव में शनिवार को धार्मिक आस्था और भक्ति का अद्भुत संगम देखने को मिला। भगवान विष्णु मंदिर के तृतीय वार्षिकोत्सव के अवसर पर आयोजित कलशयात्रा में हजारों श्रद्धालु पूरे उत्साह और श्रद्धा के साथ शामिल हुए। हाथों में कलश, धार्मिक ध्वज और बैंड-बाजे के साथ निकली शोभायात्रा ने पूरे क्षेत्र को भक्तिमय माहौल में बदल दिया। श्रद्धालुओं ने मंदिर परिसर से यात्रा शुरू कर प्राचीन शोखा बाबा मंदिर में मत्था टेका और फिर कोयल एवं तहले नदी संगम से पवित्र जल लेकर वापस मंदिर पहुंचे। आयोजन के दौरान पूरे गांव में उत्सव जैसा माहौल बना रहा।
आस्था और श्रद्धा के साथ निकली भव्य कलशयात्रा
तोलरा गांव स्थित भगवान विष्णु मंदिर से सुबह कलशयात्रा की शुरुआत हुई। बड़ी संख्या में महिला श्रद्धालु सिर पर कलश लेकर यात्रा में शामिल हुईं, जबकि पुरुष श्रद्धालु हाथों में ध्वज और धार्मिक प्रतीक लिए आगे बढ़ते रहे। यात्रा के दौरान जयकारों और भक्ति गीतों से पूरा वातावरण गूंज उठा।
श्रद्धालुओं ने सबसे पहले प्राचीन शोखा बाबा मंदिर पहुंचकर पूजा-अर्चना की और आशीर्वाद लिया। इसके बाद सभी श्रद्धालु कोयल और तहले नदी के संगम स्थल पहुंचे, जहां वैदिक मंत्रोच्चारण के बीच कलश में पवित्र जल भरा गया। इसके बाद जल को भगवान विष्णु मंदिर में विधिवत स्थापित किया गया।
वैदिक मंत्रोच्चारण के साथ संपन्न हुई पूजा-अर्चना
मंदिर परिसर में वाराणसी से आए विद्वान पुरोहितों एवं धनंजय पांडेय पुरोहित द्वारा वैदिक रीति-रिवाजों के साथ पूजा-पाठ संपन्न कराया गया। यजमान के रूप में आलोक तिवारी ने सपत्नीक पूजा-अर्चना कर भगवान विष्णु से क्षेत्र की सुख-समृद्धि और शांति की कामना की।
धनंजय पांडेय पुरोहित ने कहा: “वैदिक परंपराओं के अनुसार आयोजित धार्मिक अनुष्ठान समाज में सकारात्मक ऊर्जा और आध्यात्मिक वातावरण का निर्माण करते हैं।”
पूजा के दौरान श्रद्धालुओं ने पूरे श्रद्धाभाव के साथ मंत्रोच्चारण में भाग लिया। मंदिर परिसर में धार्मिक अनुशासन और भक्ति का अनूठा दृश्य देखने को मिला।
श्रद्धालुओं के लिए की गई विशेष व्यवस्था
विष्णु मंदिर संचालन कमिटी द्वारा श्रद्धालुओं के लिए शुद्ध पेयजल, शर्बत और नाश्ते की विशेष व्यवस्था की गई थी। आयोजन समिति के सदस्यों ने पूरे कार्यक्रम को व्यवस्थित और शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न कराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
समिति के सदस्यों ने बताया कि दिन में विष्णु सहस्र नाम का जाप आयोजित किया जाएगा, जबकि रात्रि में भव्य भंडारा एवं गढ़वा से आए कलाकारों द्वारा भक्ति जागरण कार्यक्रम प्रस्तुत किया जाएगा।
आयोजन समिति ने संभाली व्यवस्थाओं की जिम्मेदारी
कार्यक्रम के सफल संचालन में विष्णु मंदिर संचालन कमिटी के अध्यक्ष सच्चिदानंद तिवारी, संरक्षक बीरेंद्र तिवारी, सचिव गोखूल तिवारी, कोषाध्यक्ष धनंजय तिवारी, तुलसी तिवारी, बिश्रामपुर के पूर्व प्रमुख संतोष चौबे, भाजपा नेता बीपी शुक्ला, अमरेश तिवारी, सुमंत तिवारी, संजय तिवारी, कौशल तिवारी, उपेन्द्र तिवारी, कमल तिवारी, मनेष तिवारी, रविन्द्र तिवारी, अखिलेश तिवारी, धर्मराज तिवारी, मुखिया रोहित तिवारी, उप मुखिया कुश तिवारी, रासबिहारी तिवारी, रामशरिख तिवारी, पिंटु त्रिवेदी, राजेश तिवारी, धीरन तिवारी सहित सैकड़ों ग्रामीणों की सक्रिय भागीदारी रही।
आयोजन समिति द्वारा बैंड-बाजे के साथ कलशयात्रा का नेतृत्व किया गया, जिससे पूरा कार्यक्रम और अधिक आकर्षक एवं भव्य बन गया।
न्यूज़ देखो: धार्मिक आयोजनों से मजबूत होती है सामाजिक एकता
तोलरा गांव में आयोजित यह धार्मिक कार्यक्रम केवल पूजा-अर्चना तक सीमित नहीं रहा, बल्कि सामाजिक एकता और सामूहिक सहभागिता का भी बड़ा उदाहरण बना। हजारों लोगों की उपस्थिति ने यह साबित किया कि गांवों में धार्मिक और सांस्कृतिक परंपराएं आज भी लोगों को जोड़ने का कार्य कर रही हैं।
ऐसे आयोजनों से नई पीढ़ी को भारतीय संस्कृति और परंपराओं से जुड़ने का अवसर मिलता है। साथ ही सामूहिक सहयोग और सामाजिक समरसता भी मजबूत होती है। प्रशासन और समाज दोनों को ऐसे सकारात्मक आयोजनों को प्रोत्साहित करने की आवश्यकता है।
हर खबर पर रहेगी हमारी नजर।
आस्था के साथ सामाजिक एकता को भी दें मजबूती
धार्मिक आयोजन केवल परंपरा निभाने का माध्यम नहीं, बल्कि समाज को जोड़ने का अवसर भी होते हैं। तोलरा गांव का यह आयोजन सामूहिक सहयोग, अनुशासन और सांस्कृतिक एकता की प्रेरणादायक मिसाल बनकर सामने आया है।
यदि समाज इसी तरह मिल-जुलकर सकारात्मक कार्यों में भागीदारी निभाता रहा, तो गांवों की सामाजिक और सांस्कृतिक पहचान और अधिक मजबूत होगी। युवा पीढ़ी को भी ऐसे आयोजनों से जुड़कर अपनी परंपराओं को समझने और आगे बढ़ाने की जरूरत है।
आप भी अपने क्षेत्र के ऐसे सकारात्मक आयोजनों को बढ़ावा दें। अपनी राय कमेंट में जरूर साझा करें, खबर को अधिक से अधिक लोगों तक पहुंचाएं और समाज में सकारात्मक संदेश फैलाने में भागीदार बनें।

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