#सिसई #कलश_यात्रा : अंबिकेश्वर मंदिर से सैंदा नदी तक निकली भव्य धार्मिक शोभायात्रा।
गुमला जिले के सिसई प्रखंड में अंबिकेश्वर शिव मंदिर में प्राण प्रतिष्ठा कार्यक्रम की शुरुआत भव्य कलश यात्रा से हुई। छारदा रोड स्थित मंदिर से सैंदा नदी तक हजारों श्रद्धालु शामिल हुए और विधि-विधान से जल भरकर लौटे। इस आयोजन में दूर-दराज के गांवों से भारी संख्या में लोग पहुंचे। कार्यक्रम का उद्देश्य धार्मिक आस्था के साथ सामाजिक एकजुटता को मजबूत करना रहा।
- सिसई के छारदा रोड से सैंदा नदी तक निकली भव्य कलश यात्रा।
- करीब 1500 से अधिक महिलाएं कलश यात्रा में शामिल हुईं।
- 18 से 20 अप्रैल तक प्राण प्रतिष्ठा का तीन दिवसीय आयोजन।
- पीयूष मिश्रा, रोहित मिश्रा, मुकेश श्रीवास्तव मुख्य यजमान।
- 30 किलोमीटर दूर साहिजना लरंगो से भी श्रद्धालुओं की भागीदारी।
गुमला जिले के सिसई प्रखंड में धार्मिक आस्था का अद्भुत दृश्य देखने को मिला, जब छारदा रोड स्थित नवनिर्मित अंबिकेश्वर शिव मंदिर में नर्मदेश्वर शिवलिंग प्राण प्रतिष्ठा के अवसर पर भव्य कलश यात्रा निकाली गई। शनिवार को आयोजित इस कार्यक्रम में हजारों श्रद्धालुओं की उपस्थिति ने पूरे क्षेत्र को भक्तिमय बना दिया। यह आयोजन 18 अप्रैल से 20 अप्रैल तक तीन दिनों तक चलेगा, जिसमें विभिन्न धार्मिक अनुष्ठान संपन्न होंगे।
भव्य कलश यात्रा में उमड़ा जनसैलाब
कलश यात्रा की शुरुआत अंबिकेश्वर शिव मंदिर परिसर से हुई, जहां से लगभग एक किलोमीटर लंबी कतार में श्रद्धालु सैंदा नदी की ओर बढ़े। इस यात्रा में करीब डेढ़ हजार से अधिक माताएं और बहनें शामिल हुईं, जिन्होंने पारंपरिक विधि-विधान के साथ नदी से जल भरकर मंदिर तक पहुंचाया।
पूरे मार्ग में श्रद्धालु जय श्री राम, हर हर महादेव और सनातन धर्म की जय के उद्घोष करते रहे, जिससे वातावरण पूरी तरह भक्तिमय हो गया। भगवा वस्त्रों में सजे महिला, पुरुष और बच्चियों की उपस्थिति ने इस आयोजन को और भी भव्य बना दिया।
दूर-दराज से पहुंचे श्रद्धालु
इस ऐतिहासिक आयोजन में आसपास के करीब दो दर्जन से अधिक गांवों के श्रद्धालुओं ने भाग लिया। विशेष रूप से साहिजना लरंगो से आए वीरेंद्र देवघरिया ने कार्यक्रम की भव्यता की सराहना की।
वीरेंद्र देवघरिया ने कहा: “अपने जीवन में इतनी बड़ी कलश यात्रा पहले कभी नहीं देखी, हमारे गांव से भी बड़ी संख्या में लोग शामिल हुए हैं।”
उनकी इस प्रतिक्रिया से आयोजन की व्यापकता और लोगों की आस्था का अंदाजा लगाया जा सकता है।
धार्मिक अनुष्ठानों की श्रृंखला
कलश यात्रा के बाद मंदिर परिसर में मंडप प्रतिष्ठा पूजन और भंडारा का आयोजन किया गया। भक्तों के लिए प्रसाद वितरण हेतु अलग-अलग स्टॉल लगाए गए, जहां सुव्यवस्थित तरीके से व्यवस्था की गई थी।
कार्यक्रम में प्रमुख यजमान के रूप में पीयूष मिश्रा सह रश्मि मिश्रा, रोहित मिश्रा सह श्रूति मिश्रा और मुकेश श्रीवास्तव सह उर्वशी देवी शामिल हैं।
इसके अलावा आयोजन को सफल बनाने में गुरु बाबू राज किशोर प्रसाद शर्मा, गुरु बाबू शंभू शर्मा, रोहित शर्मा, शैलेश शर्मा, नीलेश शर्मा, डॉ. मुकेश कुमार पाठक, सौरभ शर्मा, गौरव शर्मा, सनबीर शर्मा, पंकज साहू सहित कई लोगों की महत्वपूर्ण भूमिका रही।
संकल्प और आस्था की अनूठी मिसाल
इस आयोजन में एक खास पहलू भी सामने आया, जहां यजमान मुकेश श्रीवास्तव डेविड ने अपने संकल्प को पूरा किया।
मुकेश श्रीवास्तव ने कहा: “मैंने आठ वर्षों तक अपने बाल और दाढ़ी नहीं कटवाने का संकल्प लिया था, और अब इस पावन अवसर पर मुंडन कर यजमान के रूप में भाग ले रहा हूं।”
उन्होंने यह भी बताया कि इससे पहले उन्होंने 2024 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के तीसरी बार पदभार ग्रहण करने के बाद पहली बार बाल और दाढ़ी कटवाई थी।
आगामी कार्यक्रमों की रूपरेखा
आयोजन के तहत शनिवार शाम को विग्रह नगर भ्रमण, आरती वंदन और हरि नाम संकीर्तन का आयोजन किया जाएगा।
इसके बाद 19 अप्रैल को मंडप पूजन, वेदी प्रतिष्ठा पूजन, कुंड पूजन और अरणी मंथन जैसे अनुष्ठान संपन्न होंगे।
20 अप्रैल को अंतिम दिन महाआहुति, प्राण प्रतिष्ठा, महा रुद्राभिषेक, महा आरती और शिखर प्रतिष्ठा जैसे महत्वपूर्ण धार्मिक कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे।
यह पूरा आयोजन धार्मिक परंपराओं के साथ सामाजिक एकता और सांस्कृतिक विरासत को भी सशक्त रूप से प्रस्तुत कर रहा है।



न्यूज़ देखो: आस्था और सामाजिक एकता का संगम
सिसई में आयोजित यह भव्य कलश यात्रा दर्शाती है कि धार्मिक आयोजन केवल पूजा तक सीमित नहीं रहते, बल्कि समाज को जोड़ने का कार्य भी करते हैं। हजारों लोगों की सहभागिता यह साबित करती है कि आस्था आज भी समाज को एकजुट करने की ताकत रखती है। ऐसे आयोजनों से सांस्कृतिक परंपराएं जीवित रहती हैं और नई पीढ़ी को भी अपने मूल्यों से जुड़ने का अवसर मिलता है। आगे भी क्या ऐसे आयोजन नियमित रूप से होते रहेंगे, यह देखना अहम होगा। हर खबर पर रहेगी हमारी नजर।
आस्था के साथ जागरूकता भी जरूरी
धार्मिक आयोजन हमें सिर्फ भक्ति ही नहीं, बल्कि सामाजिक जिम्मेदारी का भी संदेश देते हैं। जब हम एक साथ जुड़ते हैं, तो समाज में सकारात्मक बदलाव की नींव मजबूत होती है। ऐसे आयोजनों में भाग लेकर हम अपनी संस्कृति को जीवित रखते हैं और एकता का परिचय देते हैं।
आइए, हम भी अपने क्षेत्र में होने वाले ऐसे सकारात्मक आयोजनों में भाग लें और समाज को मजबूत बनाएं।
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