
#गढ़वा #छात्र_आंदोलन : नामधारी महाविद्यालय में तोरण द्वार तोड़फोड़ पर जांच और सुरक्षा की मांग उठी।
गढ़वा के नामधारी महाविद्यालय में तोरण द्वार क्षतिग्रस्त किए जाने के मामले को लेकर अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद ने प्रशासन को ज्ञापन सौंपा। प्रतिनिधिमंडल ने अनुमंडल पदाधिकारी और प्राचार्य से मिलकर घटना की जांच और दोषियों पर कार्रवाई की मांग की। इस घटना से छात्रों में आक्रोश और असुरक्षा का माहौल बना है। परिषद ने सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने की भी मांग की है।
- अभाविप गढ़वा ने तोरण द्वार क्षतिग्रस्त मामले में सौंपा ज्ञापन।
- अनुमंडल पदाधिकारी संजय पांडेय और प्राचार्य डॉ. राकेश कुमार से मुलाकात।
- असामाजिक तत्वों द्वारा नामधारी महाविद्यालय का तोरण द्वार तोड़ा गया।
- दोषियों की पहचान और कड़ी कानूनी कार्रवाई की मांग।
- सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने और पुनरावृत्ति रोकने पर जोर।
गढ़वा के नामधारी महाविद्यालय परिसर में स्थित तोरण द्वार को असामाजिक तत्वों द्वारा क्षतिग्रस्त किए जाने के मामले ने छात्रों और स्थानीय लोगों में भारी आक्रोश पैदा कर दिया है। इस घटना के विरोध में अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (अभाविप) के प्रतिनिधिमंडल ने अनुमंडल पदाधिकारी संजय पांडेय एवं महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ. राकेश कुमार को ज्ञापन सौंपकर कार्रवाई की मांग की है।
इस घटना को लेकर छात्रों के बीच असुरक्षा का माहौल बन गया है और इसे महाविद्यालय की गरिमा पर सीधा आघात बताया जा रहा है।
ज्ञापन के माध्यम से उठाई गई मांगें
अभाविप के प्रतिनिधिमंडल ने प्रशासन से मांग की कि इस घटना की उच्चस्तरीय जांच कराई जाए और इसमें शामिल दोषियों की पहचान कर उनके खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाए।
साथ ही परिषद ने महाविद्यालय परिसर और आसपास के क्षेत्रों में सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने की मांग की, ताकि भविष्य में इस तरह की घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो सके।
छात्रों में बढ़ा आक्रोश
तोरण द्वार को क्षतिग्रस्त किए जाने की घटना से छात्रों और स्थानीय लोगों में गहरा आक्रोश है। लोगों का कहना है कि इस तरह की घटनाएं न केवल संस्थान की संपत्ति को नुकसान पहुंचाती हैं, बल्कि छात्रों के मन में भय और असुरक्षा की भावना भी उत्पन्न करती हैं।
अभाविप नेताओं ने जताई नाराजगी
अभाविप के राज्य विश्वविद्यालय कार्य संयोजक मंजुल शुक्ल ने घटना की कड़ी निंदा करते हुए कहा—
“यह केवल एक संरचना को नुकसान पहुंचाने की घटना नहीं है, बल्कि इससे छात्रों और शिक्षकों के बीच असुरक्षा का माहौल उत्पन्न हुआ है।”
उन्होंने यह भी कहा कि महाविद्यालय केवल शिक्षा का केंद्र नहीं, बल्कि अनुशासन और संस्कार का आधार होता है।
वहीं जिला संयोजक शुभम तिवारी ने भी घटना को गंभीर बताते हुए कहा—
“यह कृत्य संस्थान की पहचान और सांस्कृतिक विरासत पर सीधा प्रहार है।”
उन्होंने चेतावनी दी कि यदि जल्द कार्रवाई नहीं की गई, तो विद्यार्थी परिषद आंदोलन करने के लिए बाध्य होगी।
प्रतिनिधिमंडल में कई कार्यकर्ता रहे शामिल
इस दौरान अभाविप के नगर मंत्री सुगंध बघेल, आनंद कुमार, ऋषभ आनंद, प्रवीण चंद्रवंशी, अभिषेक कुमार सहित कई कार्यकर्ता और विद्यार्थी उपस्थित रहे।
सभी ने एकजुट होकर महाविद्यालय की गरिमा की रक्षा के लिए आवाज उठाई और प्रशासन से त्वरित कार्रवाई की मांग की।
सुरक्षा व्यवस्था पर उठे सवाल
इस घटना ने महाविद्यालय परिसर की सुरक्षा व्यवस्था पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। छात्रों का कहना है कि यदि समय रहते उचित सुरक्षा इंतजाम किए गए होते, तो इस तरह की घटना नहीं होती।
न्यूज़ देखो: शैक्षणिक संस्थानों की सुरक्षा पर गंभीर सवाल
गढ़वा की यह घटना यह सोचने पर मजबूर करती है कि क्या हमारे शैक्षणिक संस्थान सुरक्षित हैं। तोरण द्वार जैसी प्रतीकात्मक संरचना को नुकसान पहुंचाना केवल संपत्ति का नुकसान नहीं, बल्कि संस्थान की गरिमा पर भी चोट है। प्रशासन को इस मामले में त्वरित और सख्त कार्रवाई करनी चाहिए, ताकि छात्रों का विश्वास बहाल हो सके। हर खबर पर रहेगी हमारी नजर।
अपनी आवाज उठाएं, संस्थानों की गरिमा बचाएं
शिक्षा संस्थान समाज की नींव होते हैं, इन्हें सुरक्षित रखना हम सभी की जिम्मेदारी है।
यदि कहीं भी इस तरह की घटना होती है, तो उसके खिलाफ आवाज उठाना जरूरी है।
जागरूक छात्र और नागरिक ही बदलाव ला सकते हैं।
एकजुट होकर ही हम अपने संस्थानों की गरिमा को बचा सकते हैं।
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