
#मेदिनीनगर #बजट_विवाद : आजसू नेता ने 2026 बजट को छात्र और युवा विरोधी बताया।
झारखंड सरकार के वर्ष 2026 के अबुआ दिशोम बजट को लेकर अखिल झारखंड छात्र संघ के नेता राणा हिमांशु सिंह ने कड़ी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने प्रेस विज्ञप्ति जारी कर बजट में छात्र, युवा, शिक्षा और रोजगार से जुड़े ठोस प्रावधानों की कमी का आरोप लगाया। उनका कहना है कि विश्वविद्यालय, छात्रवृत्ति और रोजगार के मुद्दों को नजरअंदाज किया गया है, जिससे युवाओं में निराशा बढ़ रही है।
- अखिल झारखंड छात्र संघ (आजसू) के राणा हिमांशु सिंह ने बजट पर जताई नाराजगी।
- वर्ष 2026 के अबुआ दिशोम बजट को बताया छात्र एवं युवा विरोधी।
- विश्वविद्यालयों में शिक्षकों की कमी और मूलभूत सुविधाओं के अभाव का उठाया मुद्दा।
- शिक्षा, रोजगार, छात्रवृत्ति और स्वास्थ्य क्षेत्र की उपेक्षा का आरोप।
- चुनावी वादों के अनुरूप योजनाओं के क्रियान्वयन पर भी सवाल।
झारखंड सरकार द्वारा प्रस्तुत अबुआ दिशोम बजट वर्ष 2026 को लेकर राजनीतिक और छात्र संगठनों की प्रतिक्रियाएं सामने आने लगी हैं। इसी क्रम में अखिल झारखंड छात्र संघ (आजसू) के नीलांबर पीतांबर विश्वविद्यालय प्रभारी राणा हिमांशु सिंह ने प्रेस विज्ञप्ति जारी कर बजट को छात्र एवं युवा वर्ग के हितों के विपरीत बताया है। उन्होंने कहा कि इस बजट में शिक्षा, रोजगार और स्वास्थ्य जैसे मूलभूत क्षेत्रों पर अपेक्षित ध्यान नहीं दिया गया है, जिससे राज्य के छात्रों और युवाओं में असंतोष की भावना बढ़ रही है।
बजट में छात्र और युवाओं की उपेक्षा का आरोप
राणा हिमांशु सिंह ने कहा कि सरकार द्वारा एक विश्वविद्यालय की घोषणा कर छात्र एवं युवाओं को भ्रमित करने का प्रयास किया जा रहा है। उनका आरोप है कि राज्य के वर्तमान विश्वविद्यालयों में पहले से ही शिक्षकों का घोर अभाव है और मूलभूत सुविधाओं की स्थिति भी संतोषजनक नहीं है।
राणा हिमांशु सिंह ने कहा: “राज्य सरकार के द्वारा प्रस्तुत अबुआ दिशोम बजट 2026 में छात्र एवं युवा वर्ग के लिए कुछ भी ठोस प्रावधान नहीं किया गया है, जो बेहद निराशाजनक है।”
उन्होंने यह भी कहा कि केवल नई संस्थाओं की घोषणा करने से शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार नहीं होगा, जब तक मौजूदा विश्वविद्यालयों में संसाधन, शिक्षक और बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध नहीं कराई जातीं।
शिक्षा व्यवस्था और गुणवत्ता को लेकर गंभीर सवाल
आजसू नेता ने शिक्षा व्यवस्था की वर्तमान स्थिति पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि राज्य के कई विश्वविद्यालयों और महाविद्यालयों में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा का अभाव है। उन्होंने कहा कि छात्र बेहतर शिक्षा और संसाधनों के लिए लगातार संघर्ष कर रहे हैं, लेकिन बजट में इस दिशा में कोई स्पष्ट और प्रभावी नीति नजर नहीं आती।
उनके अनुसार, शिक्षा के क्षेत्र में न तो ठोस सुधार योजनाओं का उल्लेख किया गया है और न ही छात्रों की आवश्यकताओं के अनुरूप कोई विशेष पहल की गई है। इससे यह संकेत मिलता है कि सरकार ने शिक्षा को प्राथमिकता सूची में पर्याप्त स्थान नहीं दिया है।
रोजगार और छात्रवृत्ति पर ठोस नीति की मांग
राणा हिमांशु सिंह ने कहा कि आज के समय में राज्य के छात्र पढ़ाई के साथ-साथ रोजगार और छात्रवृत्ति की मांग को लेकर आंदोलन कर रहे हैं। बावजूद इसके बजट में रोजगार सृजन और छात्रवृत्ति विस्तार को लेकर कोई स्पष्ट दिशा नहीं दिखाई देती।
उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार छात्र एवं युवाओं को आश्वासन देकर सत्ता में आई थी, लेकिन अब युवाओं के भविष्य से जुड़े मुद्दों पर ठोस पहल करने में विफल रही है।
उन्होंने कहा: “छात्र एवं युवा आज पढ़ाई छोड़कर छात्रवृत्ति और रोजगार के लिए आंदोलन करने को मजबूर हैं, फिर भी सरकार इस मुद्दे पर गंभीर नहीं दिख रही है।”
स्वास्थ्य और मूलभूत सुविधाओं पर भी उठाए सवाल
प्रेस विज्ञप्ति में यह भी कहा गया कि राज्य में स्वास्थ्य व्यवस्था को भी बजट में पर्याप्त प्राथमिकता नहीं दी गई है। उनका आरोप है कि बेहतर स्वास्थ्य सेवाओं और शिक्षा दोनों ही क्षेत्रों में संतुलित विकास की जरूरत है, लेकिन बजट में इन बुनियादी आवश्यकताओं को दरकिनार कर दिया गया है।
उन्होंने कहा कि एक विकसित राज्य के लिए शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार तीनों स्तंभों का मजबूत होना अनिवार्य है, लेकिन वर्तमान बजट में इन क्षेत्रों की स्पष्ट रूपरेखा दिखाई नहीं देती।
चुनावी वादों और वर्तमान बजट पर टिप्पणी
आजसू नेता ने सरकार के चुनावी वादों का उल्लेख करते हुए कहा कि सत्ता में आने के कई वर्षों बाद भी वादों के अनुरूप योजनाओं का धरातल पर प्रभावी क्रियान्वयन नजर नहीं आ रहा है। उन्होंने कहा कि युवाओं के सशक्तिकरण, कौशल विकास और रोजगार के अवसर बढ़ाने को लेकर ठोस नीति की आवश्यकता थी, जो बजट भाषण में स्पष्ट रूप से सामने नहीं आई।
राणा हिमांशु सिंह ने यह भी आरोप लगाया कि सरकार सत्ता के नशे में छात्र एवं युवा हितों की अनदेखी कर रही है और वास्तविक समस्याओं से ध्यान भटका रही है। उनके अनुसार, यदि शिक्षा और रोजगार पर ठोस कार्य नहीं किया गया तो राज्य के लाखों युवाओं का भविष्य प्रभावित हो सकता है।
न्यूज़ देखो: बजट पर युवाओं की नाराजगी का बढ़ता संकेत
अबुआ दिशोम बजट को लेकर छात्र संगठनों की प्रतिक्रिया यह दर्शाती है कि शिक्षा और रोजगार जैसे मुद्दे झारखंड की राजनीति के केंद्र में बने हुए हैं। यदि बजट में घोषित योजनाओं का प्रभाव जमीनी स्तर पर नहीं दिखता, तो असंतोष और बढ़ सकता है। सरकार के लिए यह जरूरी होगा कि वह छात्रों और युवाओं की चिंताओं पर स्पष्ट रोडमैप प्रस्तुत करे। हर खबर पर रहेगी हमारी नजर।
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छात्र और युवा किसी भी राज्य के भविष्य की सबसे बड़ी ताकत होते हैं।
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