पारसनाथ पहाड़ पर प्रशासन सक्रिय: इको सेंसेटिव जोन के गांवों का चल रहा व्यापक सर्वे, हाई कोर्ट के आदेश के बाद तेज़ी

पारसनाथ पहाड़ पर प्रशासन सक्रिय: इको सेंसेटिव जोन के गांवों का चल रहा व्यापक सर्वे, हाई कोर्ट के आदेश के बाद तेज़ी

author Surendra Verma
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#गिरिडीह #पारसनाथ – हाई कोर्ट के आदेश के बाद हरकत में जिला प्रशासन, इको सेंसेटिव जोन के गांवों की वास्तविक स्थिति की हो रही पड़ताल

  • झारखंड हाई कोर्ट ने पारसनाथ की पवित्रता और पर्यावरण सुरक्षा को लेकर राज्य सरकार को कड़े निर्देश दिए
  • गिरिडीह एसपी को पहाड़ पर होमगार्ड की संख्या बढ़ाने का आदेश
  • इको सेंसेटिव जोन में आने वाले 99 गांवों की सामाजिक, भौगोलिक और जातीय स्थिति की जांच शुरू
  • जिला प्रशासन ने अतिक्रमण, नाले की स्थिति और आबादी में बदलाव का सर्वे कराया
  • पिछले एक दशक में गांवों की स्थिति, पलायन और वन पट्टा के आंकड़ों की गहराई से हो रही पड़ताल
  • डालसा टीम भी जांच में होगी शामिल, स्टेटस रिपोर्ट की तैयारी जारी

इको सेंसेटिव जोन को लेकर प्रशासन की त्वरित पहल

पारसनाथ पहाड़, जिसे जैन धर्मावलंबी श्री सम्मेद शिखरजी के रूप में पूजते हैं, को लेकर झारखंड हाई कोर्ट द्वारा हाल ही में दिए गए अंतरिम आदेश के बाद गिरिडीह प्रशासन ने तेज़ी से कार्रवाई शुरू कर दी है।
हाई कोर्ट ने 2019 की अधिसूचना और 2023 के कार्यालय ज्ञापन को कड़ाई से लागू करने का निर्देश दिया है। इसके तहत इको सेंसेटिव जोन में कोई भी गैरकानूनी गतिविधि या पर्यावरणीय क्षति रोकना अनिवार्य कर दिया गया है।

गांवों की हकीकत जानने जुटे अधिकारी

जिलाधिकारी के निर्देश पर अनुमंडल और अंचल स्तरीय टीमें पारसनाथ के इको सेंसेटिव जोन में शामिल 99 गांवों की स्थिति का विस्तृत विश्लेषण कर रही हैं।
इस सर्वे में विशेष रूप से निम्नलिखित बिंदुओं पर ध्यान दिया जा रहा है:

  • जीओ टैग लोकेशन की पुष्टि
  • प्रदूषण की मात्रा और स्रोत
  • जातीय संरचना और सामाजिक स्थिति
  • सामुदायिक एवं व्यक्तिगत वन पट्टा की वैधता
  • पिछले 10 वर्षों में गांवों की संख्या और जनसंख्या में हुआ बदलाव
  • क्या इन क्षेत्रों से लोगों का पलायन हुआ है या नहीं

अतिक्रमण और पर्यावरणीय छेड़छाड़ पर पैनी नजर

पारसनाथ के तराई क्षेत्रों में हुए अतिक्रमण, नालों की मूल धारा में बदलाव और वन क्षेत्र की सीमा में कटौती जैसे मामलों की भी मैपिंग और दस्तावेजीकरण किया गया है।
पिछले कुछ वर्षों में हुए बदलावों की सटीक जानकारी के लिए सर्वे रिपोर्ट तैयार की जा चुकी है।

“वरीय अधिकारियों के निर्देश पर पारसनाथ का सर्वे का काम किया गया है। मैप भी तैयार है। अतिक्रमण कहां-कहां हुआ है, उसकी रिपोर्ट बना दी गई है। आगे जैसा निर्देश वरीय का रहेगा, उस तरह का कदम उठाया जाएगा।” — गिरजानंद किस्कू, सीओ, पीरटांड़

डालसा और पुलिस प्रशासन की संयुक्त भूमिका

गिरिडीह एसपी को पारसनाथ क्षेत्र में होमगार्ड की संख्या बढ़ाने का आदेश दिया गया है ताकि सुरक्षा और निगरानी और मजबूत की जा सके।
इसके अलावा झारखंड राज्य विधिक सेवा प्राधिकार (डालसा) को भी जांच में सक्रिय किया गया है, जो अपनी रिपोर्ट हाई कोर्ट में प्रस्तुत करेगी।

न्यूज़ देखो : पर्यावरण और आस्था की रक्षा में प्रशासन की भूमिका

‘न्यूज़ देखो’ नज़र रखे हुए है उन सभी प्रशासनिक कदमों पर, जो पारसनाथ जैसे धार्मिक और पारिस्थितिक रूप से संवेदनशील क्षेत्रों की सुरक्षा में उठाए जा रहे हैं।
प्रशासन की तत्परता और पारदर्शिता से यह उम्मीद की जा सकती है कि पारसनाथ की पवित्रता और पर्यावरणीय संतुलन को बनाए रखने में बड़ी सफलता मिलेगी।
हर खबर पर रहेगी हमारी नजर।

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Written by

डुमरी, गिरिडीह

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