
#दुमका #हिजला_मेला : राजकीय जनजातीय मेला महोत्सव के सफल आयोजन के लिए व्यवस्थाओं की समीक्षा की गई।
दुमका में राजकीय जनजातीय हिजला मेला महोत्सव की तैयारियों को लेकर उपायुक्त अभिजीत सिन्हा ने मेला परिसर का निरीक्षण किया। वरीय पदाधिकारियों के साथ आयोजित समीक्षा बैठक में उन्होंने आधारभूत सुविधाओं, सुरक्षा और सांस्कृतिक कार्यक्रमों की प्रगति का जायजा लिया। प्रशासन ने मेला का उद्घाटन 13 फरवरी को पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ करने की पुष्टि की है। यह मेला जनजातीय संस्कृति, कृषि नवाचार और स्थानीय अर्थव्यवस्था के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है।
- उपायुक्त अभिजीत सिन्हा ने मेला परिसर में स्थल निरीक्षण कर तैयारियों की समीक्षा की।
- 13 फरवरी को पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ मेला का उद्घाटन होगा।
- सांस्कृतिक कार्यक्रमों के लिए कला दल का चयन पूर्ण, करीब 100 स्टॉल लगाए जाएंगे।
- कृषि प्रदर्शनी में स्ट्रॉबेरी, मशरूम और दलहन पर विशेष फोकस का निर्देश।
- मेला अवधि में 24×7 स्वास्थ्य शिविर, मेडिकल टीम और 108 एम्बुलेंस की तैनाती।
- सीसीटीवी निगरानी, शौचालय, पेयजल, प्रकाश और पार्किंग व्यवस्था पर जोर।
दुमका जिले का प्रतिष्ठित राजकीय जनजातीय हिजला मेला महोत्सव अपने निर्धारित समय पर आयोजित हो, इसके लिए जिला प्रशासन पूरी तरह सक्रिय नजर आ रहा है। इसी क्रम में उपायुक्त अभिजीत सिन्हा ने मेला परिसर में पहुंचकर व्यवस्थाओं की गहन समीक्षा की। इस दौरान उन्होंने संबंधित विभागों के अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश देते हुए कहा कि मेला में आने वाले श्रद्धालुओं और दर्शकों को किसी भी तरह की असुविधा नहीं होनी चाहिए। बैठक में सुरक्षा, स्वच्छता, स्वास्थ्य और सांस्कृतिक गतिविधियों से जुड़ी तैयारियों पर विस्तार से चर्चा की गई।
13 फरवरी को पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ उद्घाटन
समीक्षा बैठक के दौरान यह जानकारी दी गई कि हिजला मेला महोत्सव का उद्घाटन 13 फरवरी को पारंपरिक जनजातीय रीति-रिवाजों के साथ किया जाएगा। उपायुक्त ने कहा कि इस मेला की पहचान उसकी सांस्कृतिक विरासत है, इसलिए उद्घाटन समारोह में स्थानीय परंपराओं को प्राथमिकता दी जाए।
उन्होंने सभी संबंधित विभागों को निर्देश दिया कि उद्घाटन से पहले सभी व्यवस्थाएं पूर्ण कर ली जाएं ताकि कार्यक्रम सुचारु रूप से संपन्न हो सके।
सांस्कृतिक कार्यक्रम और स्टॉल की तैयारियां
प्रशासन की ओर से बताया गया कि सांस्कृतिक कार्यक्रमों के लिए कला दल का चयन पूरा हो चुका है। मेला के दौरान विभिन्न जनजातीय नृत्य, लोकगीत और सांस्कृतिक प्रस्तुतियां होंगी, जिससे दर्शकों को क्षेत्र की समृद्ध संस्कृति से रूबरू होने का अवसर मिलेगा।
इसके साथ ही मेला परिसर में करीब 100 स्टॉल लगाए जाने की तैयारी की जा रही है, जहां स्थानीय उत्पाद, हस्तशिल्प, खानपान और सरकारी योजनाओं से जुड़ी जानकारियां उपलब्ध रहेंगी।
कृषि प्रदर्शनी में नवाचार पर जोर
उपायुक्त अभिजीत सिन्हा ने कृषि प्रदर्शनी को मेला का महत्वपूर्ण हिस्सा बताते हुए इसमें नवाचार को प्रमुखता देने का निर्देश दिया।
उन्होंने कहा कि प्रदर्शनी में स्ट्रॉबेरी, मशरूम और दलहन जैसी उन्नत और लाभकारी फसलों पर विशेष फोकस किया जाए, ताकि किसानों को नई तकनीकों और संभावनाओं की जानकारी मिल सके।
इससे स्थानीय किसानों को आय बढ़ाने और आधुनिक कृषि पद्धतियों को अपनाने में मदद मिलेगी।
स्वास्थ्य, सुरक्षा और आपात व्यवस्था
मेला अवधि के दौरान स्वास्थ्य सेवाओं को लेकर प्रशासन ने पुख्ता इंतजाम किए हैं। निर्देश दिया गया कि 24×7 स्वास्थ्य शिविर संचालित रहेगा, जिसमें चिकित्सकों और मेडिकल स्टाफ की तैनाती होगी।
इसके अलावा 108 एम्बुलेंस सेवा को भी मेला परिसर में तैनात रखने का निर्देश दिया गया है ताकि किसी भी आपात स्थिति में त्वरित सहायता मिल सके।
साफ-सफाई, पेयजल और विद्युत व्यवस्था
समीक्षा के दौरान बताया गया कि भवन प्रमंडल द्वारा रंगाई-पुताई का कार्य पूर्ण कर लिया गया है। उपायुक्त ने नगर परिषद को निर्देश दिया कि मेला परिसर और आसपास के क्षेत्रों में साफ-सफाई, डस्टबिन की पर्याप्त व्यवस्था और नियमित कचरा निस्तारण सुनिश्चित किया जाए।
इसके साथ ही पेयजल, प्रकाश व्यवस्था और विद्युत सुरक्षा जांच पर विशेष ध्यान देने का निर्देश दिया गया ताकि रात के समय भी किसी प्रकार की समस्या न हो।
शौचालय, पार्किंग और निगरानी व्यवस्था
प्रशासन की ओर से जानकारी दी गई कि मेला परिसर में 21 स्थायी और 24 अस्थायी शौचालय की व्यवस्था की जा रही है। इसके अलावा पार्किंग और परिवहन व्यवस्था को सुव्यवस्थित रखने के निर्देश भी दिए गए।
सुरक्षा के मद्देनजर सीसीटीवी कैमरों से निगरानी, स्पष्ट साइनेज और मजबूत तोरण द्वार लगाने पर भी जोर दिया गया।
पुलिस प्रशासन की तैयारी
समीक्षा बैठक के दौरान पुलिस अधीक्षक पीताम्बर सिंह खेरवार ने कहा:
पीताम्बर सिंह खेरवार ने कहा: “स्थानीय प्रशासन और जनता के सहयोग से हिजला मेला को सुरक्षित, शांतिपूर्ण और व्यवस्थित ढंग से संपन्न कराया जाएगा।”
उन्होंने कहा कि सुरक्षा बलों की तैनाती के साथ-साथ भीड़ प्रबंधन और यातायात नियंत्रण की भी समुचित व्यवस्था की जाएगी।
न्यूज़ देखो: परंपरा और प्रशासनिक तैयारी का संगम
हिजला मेला महोत्सव दुमका की जनजातीय पहचान और सांस्कृतिक विरासत का प्रतीक है। इस बार प्रशासन की सक्रियता और विभागीय समन्वय यह दर्शाता है कि आयोजन को लेकर गंभीरता बरती जा रही है। स्वास्थ्य, सुरक्षा और सुविधा पर दिया गया जोर सराहनीय है। अब यह देखना अहम होगा कि ये तैयारियां जमीनी स्तर पर कितनी प्रभावी साबित होती हैं।
हर खबर पर रहेगी हमारी नजर।
संस्कृति से जुड़ें, जिम्मेदारी निभाएं
हिजला मेला केवल उत्सव नहीं, बल्कि हमारी परंपरा और सामूहिक जिम्मेदारी का प्रतीक है। स्वच्छता बनाए रखना, नियमों का पालन करना और सहयोग देना हम सभी का दायित्व है।
इस आयोजन से जुड़े आपके अनुभव और सुझाव महत्वपूर्ण हैं।
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