
#बोलबा #सरना_पूजा : सरना स्थल पर पूजा-अर्चना के बाद ग्रामीणों ने रंग-गुलाल लगाकर मनाई होली और गांव की सुख-समृद्धि की कामना की
सिमडेगा जिले के बोलबा प्रखंड अंतर्गत अवगा गांव में सरना पूजा के बाद पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ रंगों का त्योहार होली मनाया गया। गांव के पाट सरना स्थल पर पूजा-अर्चना के बाद ग्रामीणों ने एक-दूसरे को रंग-गुलाल लगाकर शुभकामनाएं दीं। ढोल-नगाड़ों और फागुवा नृत्य के साथ पूरे गांव में उत्सव का माहौल बना रहा।
- केश्वर पहान की अगुवाई में पाट सरना स्थल पर संपन्न हुई पारंपरिक पूजा।
- ग्रामीणों ने अच्छी बारिश और बेहतर फसल के लिए की प्रार्थना।
- गांव में बीमारियों से सुरक्षा और सुख-शांति की भी कामना की गई।
- सरना स्थल से शुरू हुआ रंग-गुलाल और फागुवा नृत्य का उत्सव।
- ढोल-नगाड़ों के साथ हर घर पहुंची फूल खोंसी और नृत्य टोली।
सिमडेगा जिले के बोलबा प्रखंड के अवगा गांव में इस वर्ष भी पारंपरिक आस्था और सांस्कृतिक उत्साह के साथ सरना पूजा के बाद रंगों का पर्व होली मनाया गया। आदिवासी परंपराओं के अनुसार पहले सरना स्थल पर पूजा-अर्चना की गई और इसके बाद पूरे गांव में फागुवा उत्सव का आयोजन हुआ।
पाट सरना स्थल पर हुई पूजा-अर्चना
गांव के पारंपरिक धर्मगुरु के रूप में माने जाने वाले केश्वर पहान की अगुवाई में गांव के पाट सरना स्थल पर पूजा संपन्न हुई। पूजा के दौरान ग्रामीणों ने प्रकृति देवता से अच्छी बारिश, बेहतर फसल और पूरे गांव की खुशहाली की कामना की।
ग्रामीणों ने यह भी प्रार्थना की कि आने वाले समय में गांव और आसपास के क्षेत्र में कोई भयंकर बीमारी प्रवेश न करे और सभी लोग स्वस्थ एवं सुरक्षित रहें। इस अवसर पर गांव के बुजुर्गों और युवाओं ने मिलकर पारंपरिक रीति-रिवाजों के अनुसार पूजा-अर्चना की।
रंग-गुलाल से शुरू हुआ होली उत्सव
सरना पूजा के बाद पहान की अगुवाई में सरना स्थल से ही ग्रामीणों ने एक-दूसरे को रंग और गुलाल लगाकर होली की शुभकामनाएं दीं। इसके साथ ही पूरे गांव में उत्सव का माहौल बन गया।
ग्रामीणों ने पारंपरिक गीतों के साथ होली का स्वागत किया। ढोल-नगाड़े और पारंपरिक बाजा-गाजा की धुन पर लोग झूमते नजर आए। बुजुर्गों से लेकर युवा और बच्चे तक सभी इस उत्सव में शामिल हुए।
फागुवा नृत्य और फूल खोंसी की परंपरा
होली उत्सव के दौरान गांव में फागुवा नृत्य की पारंपरिक टोली बनाई गई। पहान की अगुवाई में यह टोली ढोल-नगाड़ों के साथ गांव के हर घर पहुंची। प्रत्येक घर में जाकर फूल खोंसी की परंपरा निभाई गई।
फूल खोंसी की यह परंपरा आदिवासी संस्कृति का महत्वपूर्ण हिस्सा मानी जाती है, जिसमें घर-घर जाकर शुभकामनाएं दी जाती हैं और खुशहाली की कामना की जाती है।
गांव की गलियों में जब ढोल-नगाड़ों की आवाज गूंजी तो पूरा माहौल उत्सवमय हो गया। लोग पारंपरिक वेशभूषा में नाचते-गाते नजर आए और होली के रंगों में पूरा गांव सराबोर हो गया।
पारंपरिक संस्कृति की झलक
अवगा गांव में मनाया गया यह होली उत्सव केवल रंगों का त्योहार नहीं, बल्कि आदिवासी परंपरा, प्रकृति पूजा और सामुदायिक एकता का प्रतीक भी है। यहां की होली में प्रकृति और संस्कृति का अद्भुत संगम देखने को मिलता है।
इस अवसर पर गांव के कई प्रमुख लोग भी मौजूद रहे। इनमें मेरतल खलखो, जोगेंद्र मांझी, गोबिंदा खलखो, नरेश प्रधान, पीताम्बर बेसरा, जागेश्वर प्रधान, दुष्यंत खलखो, शंकर मांझी, सिलधर मांझी, राजेश प्रधान, कमल तुरी, शंकर साय मांझी, अर्जुन मांझी, कस्तू मांझी, दिनेश मांझी, सखु मांझी, दशरू मांझी, लालू मांझी, सैनका मांझी और कमलेश मांझी सहित कई ग्रामीण उपस्थित रहे।
सभी ने मिलकर इस पर्व को पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ मनाया और गांव की एकता एवं भाईचारे का संदेश दिया।

न्यूज़ देखो: परंपरा और प्रकृति का अद्भुत संगम
अवगा गांव में सरना पूजा के बाद मनाई जाने वाली होली आदिवासी संस्कृति की जीवंत पहचान है। यहां त्योहार केवल उत्सव नहीं बल्कि प्रकृति, समाज और परंपरा के प्रति सम्मान का प्रतीक भी है। ऐसी परंपराएं हमारी सांस्कृतिक विरासत को जीवित रखती हैं। हर खबर पर रहेगी हमारी नजर।
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